Re: काँच की हवेली "kaanch ki haveli"

[quote="Jemsbond":1hg8p1up][size=150:1hg8p1up][color=#8000BF:1hg8p1up]5

"क्या….? ठाकुर साहब हैरान होते हुए बोले – "पहनने के लिए कपड़े नही हैं. तो क्या महाशय घर से नंगे पुँगे ही आए हैं?

"जी…नही." ये आवाज़ सीढ़ियों की ओर से आई थी. ठाकुर साहब के साथ सबकी नज़रें उस ओर घूमी. रवि सीढ़ियाँ उतरता हुआ दिखाई दिया. उसके बदन पर दीवान जी के कपड़े थे. उनके कपड़ों में रवि किसी कार्टून की तरह लग रहा था. उसे देखकर एक बार निक्की के मूह से भी हँसी छूट पड़ी. वहीं ठाकुर साहब अपनी बातों पर झेंप से गये. उन्हे बिल्कुल भी अंदाज़ा नही था कि उनकी बातें रवि के कानो तक जा सकती है.
कॉन्टिन्यू……………………………………..[/color:1hg8p1up][/size:1hg8p1up][/quote:1hg8p1up]

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दोस्त कहानी बहुत अच्छी है [/size:1hg8p1up][/color:1hg8p1up]

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