Re: Bhoot bangla-भूत बंगला

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[size=150:1l8jjxkd][color=#8000BF:1l8jjxkd]भूत बंगला पार्ट–5

गतान्क से आगे…………………

मुझे यकीन नही हो रहा था के वो मेरे सामने ही कपड़े बदल रही है. उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ किया हुआ हुआ कमर मेरी तरफ थी. सावली कमर पर वाइट ब्रा के स्ट्रॅप्स देख कर जैसे मेरे मुँह में पानी भर आया. वो उसी हालत में खड़ी अपना बॅग खोलकर कपड़े निकालने लगी. एक कपड़ा उसने खींच कर बाहर निकाला और देखा तो वो स्कर्ट थी. उसने एक पल के लिए दोबारा बॅग में हाथ डालने की सोची पर फिर एक कदम पिछे को हुई और अपनी पेंट खोलने लगी.

मैं आँखें फाडे उसको देख रहा था. मेरा मन एक तरफ तो मुझे घूम कर दूसरी और देखने को कह रहा था और दूसरी तरफ मेरा दिल ये भी चाह रहा था के मैं उसको देखता रहू. ये मेरी ज़िंदगी में पहली बार था के कोई ऐसी लड़की जिससे मेरा इस तरह का कोई रिश्ता नही था बेझिझक मेरे सामने कपड़े बदल रही थी. अगले ही पल उसने अपनी पेंट खोली और और नीचे को झुक कर उतार दी.

अब वो मेरे सामने सिर्फ़ एक वाइट कलर की ब्रा और ब्लू कलर की पॅंटी पहने मेरी तरफ पीठ किए खड़ी थी. उसकी पॅंटी ने उसकी गांद को पूरी तरह ढक रखा था पर फिर भी उस पतले कपड़े में हिलते हुए उसकी गांद के कुवर्व्स सॉफ दिखाई दे रहे थे. मेरी नज़र कभी उसकी कमर पर जाती तो कभी उसकी गांद पर. किसी गूंगे की तरह खड़ा मैं बस उसको चुप चाप देख रहा था. मैं सोच रहा था के वो यूँ ही मेरी तरफ पीठ किए स्कर्ट पहनेगी पर मेरी उम्मीद के बिल्कुल उल्टा हुआ. वो स्कर्ट हाथ में पकड़े मेरी तरफ घूम गयी.

आज पहली बार उसको आधी नंगी हालत में देख कर मुझे एहसास हुआ के उसको बनाने वाले ने भले शकल सूरत कोई ख़ास उसको नही दी थी पर वो कमी उसका जिस्म बनाने में पूरी कर दी थी. उसका जिस्म हर तरफ से कसा हुआ और कहीं ज़रा भी ढीलापन नही थी. मैने एक अपने सामने सिर्फ़ ब्रा और पॅंटी में खड़ी प्रिया को उपेर से नीचे तक देखा. वो फ़ौरन समझ गयी के मैं क्या देख रहा हूँ और हस पड़ी.

"ओह प्लीज़" वो बोली "अब तुम फिर मेरे ब्रेस्ट्स को घूर्ना मत शुरू कर देना"

मेरी शकल ऐसी हो गयी जैसे किसी चोर की चोरी पकड़ी गयी हो.

"नही ऐसा कुच्छ नही है" मैने झेन्प्ते हुए कहा

उसने फुल लेंग्थ स्कर्ट को एक बार झटका और फिर पहेन्ने के लिए सामने की और झुकी. उसकी दोनो छातिया जो अब तक मैं ब्रा के उपेर से देख रहा था उसके झुकने की वजह से आधी मेरे सामने आ गयी. भले ये एक पल के लिए ही था पर मैने अंदाज़ा लगा लिया के उसकी चूचिया बहुत बड़ी हैं और कहीं अगर उसके जिस्म पर ढीला पन है तो वो वहाँ है. वो शायद इतनी बड़ी होने की वजह से अपने वज़न से थोड़ा ढालकी हुई थी. स्कर्ट टाँगो के उपेर खींचती हुई वो उठ खड़ी हुई और नीचे से अपने बदन को ढक लिया. उसके बाद उसने बॅग से टॉप निकाला और उसको पहेन्ने के लिए हाथ उपेर उठाए.

"आह" उसके मुँह से एक आह निकली

"क्या हुआ?" मैने पुचछा

"ब्रा शाद टाइट आ गयी है. सुबह भी कपड़े बदलते हुए पिछे कमर पर स्ट्रॅप चुभ सा रहा था" उसने टॉप अपने गले से नीचे उतारते हुए कहा

"जाके बदल आना" मैं पहली बार अपने सामने एक लड़की को अपनी सेक्रेटरी के रूप में देख रहा था. आज से पहले तो मैने जैसे कभी उसपर इतना ध्यान दिया ही नही था.

"हां या शायद मुझे आदत नही है इसलिए थोड़ी मुश्किल हो रही है" कहते हुए उसने सामने से अपनी चूचियो को पकड़ा और हल्का सा इधर उधर करते हुए ब्रा के अंदर सेट करने लगी.

मेरा मन किया के मैं उसके हाथ सेआगे बढ़कर खुद उन दोनो छातियो को अपने हाथ में ले लूं. मेरा लंड पूरी तरह तन चुका था और उसको च्छुपाने के लिए मैं टेबल के पिछे से खड़ा भी नही हो रहा था के कहीं वो देख ना ले. कपड़े ठीक करके वो मेरे सामने आ खड़ी हुई और घूम घूमकर मुझे दिखाने लगी.

"कैसी लग रही हूँ?" उसने इठलाते हुए पुचछा

"पहली बार पूरी लड़की लग रही हो. बस थोडा सा चेंज और बाकी है" मैने जवाब दिया.

"क्या?" उसने पुचछा ही था के सामने रखे फोन की घंटी बजने लगी. मैने फोन उठाया. दूसरी तरफ मिश्रा था.

"वो सोनी की बीवी ने कन्फर्म कर दिया के लाश उसके पति की ही है" फोन के दूसरी तरफ से मिश्रा बोला

"अब?" मैने प्रिया की तरफ देखते हुए कहा

"कल सुबह वो पेपर्स पर साइन करके लाश ले लेगी. मैने उसको अभी कुच्छ दिन और यहीं शहेर में रहने को कहा है. वो मान गयी. पति का क्रियकरम भी यहीं करवा रही है. लाश मुंबई नही ले जा रही" मिश्रा बोला

"और कोई इन्फर्मेशन मिली उससे?" मैने सवाल किया

"नही अभी तो नही. मुझे फिलहाल उससे सवाल करना ठीक नही लगा. काफ़ी परेशान सी लग रही थी. एक दो दिन बाद फिर मिलूँगा उससे" मिश्रा ने कहा

"ह्म्‍म्म्म "मैं हामी भरी

"अच्छा एक बात सुन. मेरा पोलीस में एक दोस्त है जिसने अभी अभी शादी की है. वो पार्टी दे रहा है. शाम को तू आजा" मिश्रा ने कहा

वैसे तो मैं जाने को तैय्यार नही था क्यूंकी मैं उस पोलिसेवाले को जानता नही था पर मिश्रा के ज़ोर डालने पर मान गया. शाम को 7 बजे मिलने का कहकर मैने फोन नीचे रख दिया.

"क्या प्लान है?" प्रिया ने मुझे पुचछा तो मैने उसको शादी की पार्टी के बारे में बताया.

"ओके. एंजाय करना" उसने मुझसे कहा और वापिस अपनी टेबल पर जाके बैठ गयी.

अचानक मेरे दिमाग़ में एक ख्याल आया

"तुम साथ क्यूँ नही चलती. रात को मैं तुम्हें घर छ्चोड़ दूँगा" मेरा कहना ही था के वो इतनी जल्दी मान गयी जैसे मेरे पुच्छने का इंतेज़ार ही कर रही थी.

पार्टी मेरी उम्मीद से भी कहीं ज़्यादा बोर निकली. वो उस पोलिसेवाले के छ्होटे से फ्लॅट पर ही थी और कुच्छ फॅमिलीस आई हुई थी और मैं मिश्रा को छ्चोड़कर किसी को नही जानता था जो उस वक़्त पूरी तरह नशे में था इसलिए उसका होना या ना होना बराबर था. मैने कई बार वहाँ से निकलने की कोशिश की पर निकल ना सका. प्रिया भी मेरी तरह बोर हो रही थी और बार बार चलने को कह रही थी. आख़िर में तकरीबन 11 बजे हम दोनो वहाँ से निकल सके.

"क्या बोर पार्टी थी" मैने फ्लॅट से निकलकर नीचे बेसमेंट की ओर बढ़ते हुए कहा जहाँ मेरी कार खड़ी हुई थी

"सही में" प्रिया ने मेरे साथ कदम मिलाते हुए कहा. उसने उस वक़्त भी वही स्कर्ट और टॉप पहना हुआ था.

थोड़ी ही देर बाद हम दोनो बेसमेंट में पहुँचे और मेरी कार की तरफ बढ़े. मैने अपनी कार के पास पहुँचकर देखा तो प्रिया थोड़ा पिछे रुक गयी और एक अंधेरे कोने की तरफ ध्यान से देख रही थी. हम दोनो की नज़रें मिली और मैने के कुच्छ कहने के लिए मुँह खोला ही था के प्रिया ने मुझे हाथ से चुप रहने का इशारा किया और धीरे से अपनी और आने को कहा. मुझे समझ नही आया के वो क्या कह रही है पर मैं शांति से उसकी तरफ बढ़ा.

"क्या हुआ?" उसके पास पहुँच कर मैने कहा

"इधर आओ" उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे तकरीबन खींचते दबे पावं से उस कोने की तरफ ले गयी जहाँ वो गौर से देख रही थी.

हम लोग धीरे धीरे चलते हुए उस कोने तक पहुँचे. प्रिया ने मुझे वहाँ रुकने का इशारा किया और किसी चोर की तरह चलती हुई आगे बढ़ी. सामने एक छ्होटा सा दरवाज़ा बना हुआ था जो बिल्डिंग की सीढ़ियों की और खुलता था. दरवाज़े की हालत देखकर ही लग रहा था के उन बिल्डिंग मे आने जाने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल कम ही होता था. दरवाज़े पर ज़ंग लगा हुआ था और उसी वजह से उसको पूरी तरह बंद नही किया जा सकता था. देखकर लग रहा था के किसी ने दरवाज़ा बंद तो किया पर फिर भी वो हल्का सा खुला रह गया. प्रिया उस दरवाज़े के पास पहुँची और धीरे से उस खुले हुए हिस्से से अंदर देखने लगी. फिर वो पलटी और मुस्कुराते हुए मुझे बहुत धीरे से अपने पास आने को कहा.

मैं दरवाज़े के पास पहुँचा तो प्रिया ने साइड हटकर मुझे अंदर झाँकने को कहा. अंदर देखते ही जैसे मेरे होश से उड़ गये. अंदर मुश्किल से 17-18 साल का एक लड़का और उतनी ही उमर की एक लड़की खड़ी थी. उन दोनो को देखने से ही लग रहा था के वो दोनो अभी भी स्कूल में ही हैं. लड़की दीवार के साथ लगी खड़ी थी और लड़का उसके सामने खड़ा उसको चूम रहा था. मैने एक पल के लिए उन्हें देखा और नज़र हटाकर वापिस प्रिया की और देखा जो अब भी मुस्कुरा रही थी. मैने उसको वहाँ से चलने का इशारा किया पर उसने इनकार में सर हिलाया और फिर से मुझे हटाके अंदर झाँकने लगी. थोड़ी देर देखकर वो फिर से हटी और मुझे देखने को कहा. मैने अंदर नज़र डाली तो फिर नज़र हटाना मुश्किल हो गया.

उस लड़के ने लड़की की कमीज़ उपेर कर दी थी और उसकी छ्होटी छ्होटी चूचियो को मसल रहा था. लड़की की आँखें बंद थी और ज़ाहिर था के उसको भी बहुत मज़ा आ रहा था. मैं देख ही रहा था के पिछे से मुझे अपने कंधो पर प्रिया के हाथ महसूस हुए जो मुझे नीचे को दबा रहे थे. मैं समझ गया के वो मुझे बैठ जाने को कह रही है ताकि खुद भी मेरे सर के उपेर से अंदर देख सके. मैने नीचे को बैठ गया और अंदर देखने लगा. प्रिया पिछे से मेरे उपेर झुकी और खुद भी दरवाज़े से देखने लगी.

अब वो लड़का नीचे झुक कर उस लड़की की एक चूची को चूस रहा था और दूसरी को हाथ से मसल रहा था. लड़की का एक हाथ उसके सर पर था और वो खुद ज़ोर डालकर उस लड़के का मुँह अपनी चूची पर दबा रही थी और दूसरे हाथ से पेंट के उपेर से उसका लंड सहला रही थी. वो लड़का कभी उसकी एक चूची चूस्टा तो कभी दूसरी. हम दोनो चुप चाप खड़े सब देख रहे था और मैं अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रहा था के वो लड़का लड़की किस हद तक जाने वाले हैं. प्रिया मेरे उपेर को झुकी हुई और. उसकी चिन मेरे सर पर थी और दोनो हाथ मेरे कंधो पर.

थोड़ी देर यूँ ही चूचिया चूसने के बाद वो लड़का हटा और लड़की के होंठों को एक बार चूमकर उसे दीवार से हटाया. लड़की ने आँखें खोलकर उस लड़के की तरफ देखा जो तब तक खुद भी दीवार के साथ सॅट कर खड़ा हो चुका था. लड़की धीरे से मुस्कुराइ और उसके सामने आकर अपने घुटनो पर बैठ गयी और उसकी पेंट खोलने लगी. उसने लड़की की पेंट अनज़िप की और हुक खोलकर अंडरवेर के साथी ही पेंट नीचे घुटनो तक खींच दी. लड़का का खड़ा हुआ लंड जो की उतना बड़ा नही था ठीक उस लड़की की चेहरे के सामने आ गया. उसने एक बार नज़र उठाकर लड़के को देखा और मुस्कुरकर अपने मुँह खोलते हुआ पूरा लंड अपने मुँह में ले गयी.

लंड उस लड़की के मुँह में जाते ही मुझे अपने सर के उपेर एक सिसकी सी सुनाई दी तो मेरा ध्यान प्रिया पर गया. वो बड़ी गौर से उन दोनो को देख रही थी और शायद बेध्यानी में पूरी तरह मुझपर झुक चुकी थी. उसकी दोनो चूचिया मेरे कंधो पर दब रही थी और जिस तरह से वो हिल रही थी उससे मुझे अंदाज़ा हो गया के प्रिया काफ़ी तेज़ी के साथ साँस ले रही है. ज़ाहिर था के वो गरम हो चुकी थी और ये खेल देखने में उसको बड़ा मज़ा आ रहा था. मेरी नज़र उस लड़के लड़की पर और ध्यान अपने कंधो पर दब रही प्रिया की चूचियो पर था.

थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद उस लड़के ने लड़की को दोबारा खड़ा किया और फिर दीवार के साथ सटा दिया पर इस बार उस लड़की का चेहरा दीवार की तरफ और गांद लड़के की तरफ थी. वो लड़का उस लड़की के पिछे खड़े हुए अपने हाथ आगे को ले गया और उसकी सलवार का नाडा खोल दिया. खुलते ही सलवार सरकते हुए लड़की के पैरों में जा गिरी और बल्ब की रोशनी में उस लड़की की दूध जैसी सफेद टांगे चमकने लगी. पीछे खड़े लड़के ने लड़की की कमीज़ उपेर उठाकर उसके गले के पास फसा दी ताकि वो उपेर ही रहे और लड़की के पिछे बैठकर उसकी पॅंटी को पकड़कर नीचे खींचता चला गया.

मुझे अपने उपेर एक और सिसकी सी सुनाई दी तो ध्यान फिर प्रिया पर गया. वो अभी भी वैसे ही झुकी चुप चाप तमाशा देख रही थी. जो बदला था वो था मेरे कंधी पर उसकी चूचियो का दबाव जो पहला बहुत हल्का था पर अब इतना बढ़ चुका था के मुझे लगा के प्रिया या तो अंजाने में या जान भूझकर अपनी चूचिया मेरे कंधो पर रगड़ रही है. उधेर वो लड़का लड़की की पॅंटी को नीचे खींच कर पिछे से उसकी टाँगो के बीचे मुँह घुसाकर उस लड़की की चूत चाटने लगा. वो लड़की अब धीरे धीरे आहें भर रही थी और खुद भी अपनी गांद हिलाकर लड़के के मुँह पर अपनी चूत रगड़ रही थी. मैं उन दोनो को देखकर हैरत में पड़ गया. इतनी सी उमर में सेक्स का इतना ग्यान. वो किसी पोर्नस्तर्स की तरह सब कुच्छ एक दम सही तरीके से एक दूसरे को मज़ा देते हुए कर रहे थे. लड़की जब लंड चूस रही थी तो ऐसी थी के कोई पोर्नस्तर भी उसको देखकर शर्मा जाए और लड़का भी बिल्कुल उसी तरह उसकी चूत चाट रहा था.

प्रिया ने मेरा कंधा हिलाया और मुझे हटने को कहा. शायद यूँ मेरे पीछे से झुक कर देखने की वजह से वो थक गयी थी इसलिए मुझे हटाकर पिछे आने को कह रही थी. मैं हटा और उसके पिछे आकर खड़ा हो गया पर मेरी तरह वो नीचे नही बैठी बल्कि खड़ी खड़ी ही झुक कर उन दोनो को देखने लगी. मैं भी उसके पिछे खड़ा होकर अंदर ध्यान देने लगा.

वो लड़का अब भी लड़की की चूत चाट रहा था. उसने पिछे से दोनो हाथों से लड़की की गांद पकड़ कर खोल रखी थी और धीरे धीरे अपनी ज़ुबान उसकी चूत पर चला रहा था. एक हाथ की अंगुली से वो लड़की की गांद के छेद को टटोल रहा था. थोड़ी देर यूँ ही चलता रहा और फिर उसके बाद लड़का खड़ा होकर लड़की के पिछे पोज़िशन लेने लगा. लड़की ने खुद अपना एक हाथ टाँगो के बीचे से निकालकर लड़के का लंड पकड़ा और अपनी चूत में सही जगह पर रखा. लड़के ने उसकी कमर को पकड़ा और ज़ोर लगाया. लड़की के मुँह से अचानक निकली आह सुनकर मैं समझ गया के लंड अंदर जा चुका है जिसके बाद लड़की ने हाथ लंड से हटाकर फिर से दीवार पकड़ ली और आधी झुक गयी. अपनी गांद उसके उपेर को उठाकर और पिछे निकाल दी ताकि लड़के का लंड आसानी से अंदर बाहर हो सके. लड़का भी पिछे से स्पीड बढ़ा चुका था और तेज़ी के साथ लंड को चूत के अंदर बाहर कर रहा था. उसकी एक अंगुली अब भी उस लड़की की गांद पर घूम रही थी जिसे देख कर मेरे मंन में ख्याल आया के ये शायद उसकी गांद भी मरेगा.

गांद का ख्याल आते हुए मेरा ध्यान अपने सामने झुकी प्रिया की गांद पर गया और तब मुझे एहसास हुआ के पिछे से देखने के कारण मैं प्रिया के कितना करीब आ चुका था. मेरा लंड ठीक उसकी गांद के बीचे दबा हुआ था. वो भी ठीक अंदर खड़ी लड़की की तरह सामने दरवाज़े को पकड़े आधी झुकी खड़ी थी और मैं उसके पिछे था. मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ था और जिस तरह प्रिया की गांद पर दबा हुआ था उससे ऐसा ही ही नही सकता था के प्रिया को ये महसोस ना हुआ हो. मैं अजीब हालत में पड़ गया. समझ नही आया के लंड हटा लूँ या फिर ऐसे ही रगड़ता रहूं. प्रिया की भारी गांद उस वक़्त मेरे लंड को जो मज़ा दे रही थी उसके चलते मेरे लिए मुश्किल था के मैं वहाँ से हट पाता. मैं उसकी हालत में खड़ा रहा और फिर अंदर देखने लगा.

लड़का अब भी उसी तेज़ी से पिछे से लड़की की चूत पर धक्के मार रहा था.उसके दोनो हाथ लड़की के पूरे जिस्म पर घूम रहे थे और वो लड़की भी उसका भरपूर साथ दे रही थी. जब वो आगे को धक्का मारता तो वो भी अपनी गांद पिछे को करती. उस लड़की के ऐसा करने से मुझे ऐसा लगा या सही में ऐसा हो रहा था ये पता नही पर मुझे महसूस हुआ के प्रिया भी अपनी गांद मेरे लंड पर ऐसे ही धीरे धीरे दबा रही थी. मैं भी काफ़ी जोश में आ चुका था और मैं अपना एक हाथ सीधा उसी गांद पर रख दिया और लंड धीरे से थोडा और उसकी गांद पर दबाया. उसके मुँह से एक बहुत हल्की सी आह निकली जिससे मैं समझ गया के उसको पता है के क्या हो रहा है और वो खुद भी गरमा चुकी है. मैं हाथ यूँ ही थोड़ी देर उसकी गांद पर फिराया और धीरे से आगे ले जाते हुए उसकी एक चूची पकड़ ली.

मेरा ऐसा करना ही था के प्रिया फ़ौरन सीधी उठ खड़ी हुई और मेरी तरफ पलटी. उसकी आँखों में वासना मुझे सॉफ दिखाई दे रही थी जो वो बुरी तरह से कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी.

"चलें?" उसने कहा और बिना मेरे जवाब का इंतेज़ार किए कार की तरफ बढ़ चली.

मैं मंन मसोस कर रह गया. एक आखरी नज़र मैने लड़का लड़की पर डाली. लड़की अब नीचे ज़मीन पर घोड़ी बनी हुई थी और लड़का अब भी पिछे से उसको पेल रहा था. मैने एक लंबी आह भारी और प्रिया के पिछे अपनी कार की ओर बढ़ चला.

उस रात नींद तो जैसे आँखों से कोसो दूर थी. मैं काफ़ी देर तक बिस्तर पे यहाँ से वहाँ डोलाता रहा. करवट बदल बदल कर थक गया पर नींद तो जैसे नाराज़ सी हो गयी थी. उस लड़के और लड़के के बीच सेक्स का खेल और उपेर से प्रिया की गांद पर डाबता मेरा लंड दिमाग़ से जैसे निकल ही नही रहे थे. एक पल के लिए मैने सोचा था के जिस तरह प्रिया की गांद पर मेरा लंड दबा था और उसने कुच्छ नही कहा था तो शायद बात इससे आगे बढ़ सके पर कुच्छ नही हुआ. वो खामोशी से कार में जाकर बैठ गयी और उसी खामोशी से पूरे रास्ते बैठी रही . घर जाकर भी वो कार से निकली और अंदर चली गयी, बिना कुच्छ कहे. मैं बुरी तरह से गरम हो चुका था और किस्मत खराब के जिस वक़्त घर पहुँचा तो रुक्मणी के साथ कोई मौका हाथ नही लगा. और दिमाग़ में अब भी सेक्स ही घूम रहा था. मैने हर कोशिश की सेक्स से ध्यान हटाने की पर कामयाब नही हुआ. परेशान होकर मैने विपिन सोनी मर्डर के बारे में सोचना शुरू कर दिया पर सोचने के लिए ज़्यादा कुच्छ था नही सिवाय इसके के वो एक अजीब सा आदमी था और बहुत ही अजीब तरीके से मारा था. अजीब बातें करता था और अजीब सा लाइफस्टाइल था. पर हाँ उसकी बीवी सुंदर थी. इस बार भी नाकामयाभी ही हाथ लगी. सेक्स से ध्यान हटाने की सोची और घूम फिरकर फिर वहीं पहुँच गया. अब विपिन सोनी की बीवी आँखो के सामने घूम रही थी.

ऐसे ही पड़े पड़े आधी रात का वक़्त हो गया. मैने घड़ी पर नज़र डाली तो रात का 1 बज रहा था. जब मुझे महसूस होने लगा के आज पूरी रात यूँ ही गुज़रने वाली है तो मैने कमरे में रखे टीवी का रिमोट उठाया. टीवी ऑन करने ही वाला था के एक अजीब सी आवाज़ पर मेरा ध्यान गया. ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत ही हल्की सी आवाज़ में गा रहा है. मैने ध्यान से सुनना शुरू किया. आवाज़ किसी औरत की थी पर वो क्या गा रही थी ये समझ नही आ रहा था. मैने एक नज़र टीवी पर डाली पर वो बंद था. म्यूज़िक सिस्टम को देखा तो वो भी बंद. अपने कंप्यूटर की तरफ नज़र डाली तो वो भी ऑफ था फिर भी लग रहा था जैसे कहीं दूर किसी ने म्यूज़िक सिस्टम ओन किया हुआ हो या वॉल्यूम बहुत धीरे कर रखा हो पर फरक सिर्फ़ ये था के म्यूज़िक नही था. सिर्फ़ एक औरत के हल्के से गाने की आवाज़. मेरे दिमाग़ में रुक्मणी का नाम आया पर मैं जानता था के वो बहुत बेसुरा गाती थी जबकि ये आवाज़ जिस किसी की भी थी वो बहुत सुर में गा रही थी. घर में बाकी देवयानी ही थी. मैं समझ गया के आवाज़ देवयानी की ही है. अंधेरे में यूँ ही पड़े पड़े मैं उसकी आवाज़ पर ध्यान देने लगा. जितनी अच्छी तरह से वो गा रही थी उस हिसाब से तो उसको इंडियन आइडल में ट्राइ करना चाहिए था. जो बात मुझे अजीब लगी वो था गाना. वो कोई फिल्मी गाना नही था. लग रहा था जैसे कोई माँ अपने किसी बच्चे को लोरी सुना रही हो. लोरी के बोल मुझे बिल्कुल भी समझ नही आ रहे थे पर उस आवाज़ ने मुझपर एक अजीब सा असर किया. कई घंटो से खुली हुई मेरी आँखें भारी होने लगी और मुझे पता ही नही चले के वो आवाज़ सुनते सुनते मैं कब नींद के आगोश में चला गया.

सुबह उठा तो मुझपर एक अजीब सा नशा था. दिल में बेहद सुकून था. लग रहा था जैसे एक बहुत लंबी सुकून भरी नींद से सोकर उठा हूँ. मैं आखरी बार इस तरह कब सोया था मुझे याद भी नही था. जब भी सोकर उठता तो दिल में एक अजीब सी बेचैनी होती. उस दिन क्या क्या करना था और कल क्या क्या बाकी रह गया था ये सारे ख्याल आँख खोलते ही दिमाग़ में शोर मचाना शुरू कर देते थे. पर उस दिन ऐसा कुच्छ ना हुआ. मेरा दिमाग़ और दिल दोनो बेहद हल्के थे. और दीनो की तरह मैं परेशान ना उठा बल्कि आँख खोलते ही चेहरे पर मुस्कान आ गयी. मैं किस बात पर इतना खुश था ये मैं खुद भी नही जानता था.

"तुम गाती भी हो?" ब्रेकफास्ट टेबल पर मैने देवयानी से पुचछा

मेरी बात सुनकर उसने हैरत से मेरी तरफ देखा. फिर एक नज़र रुक्मणी पर डाली और दोनो हस्ने लगी.

"मज़ाक उड़ा रहे हो?" रुक्मणी ने मुझसे पुचछा.

"नही तो" मैने इनकार में सर हिलाया "मैं तो सीरियस्ली पुच्छ रहा था"

"ओह तो सीरियस्ली मज़ाक उड़ा रहे हो" देवयानी ने कहा

"तुम्हें कैसे पता के हम दोनो बहुत बेसुरी हैं?" रुक्मणी ने आगे कहा

"बेसुरी?" मैने आँखें सिकोडते हुए कहा

"हां और नही तो क्या" देवयानी बोली "हर वो इंसान जो हमको बचपन से जानता है इसी बात को लेकर हमारा मज़ाक उड़ाता है. अगर हम दोनो में से कोई भी गाने लगे तो घर के सारे शीशे टूट जाएँ"

मैं उन दोनो की बात सुनकर चौंक पड़ा. कल रात तो वो बहुत अच्छा गा रही थी. इतना अच्छा के 5 मिनट के अंदर अंदर मैं सो गया था

"तो कल रात तुम नही गा रही ही" मैने देवयानी और रुक्मणी दोनो से पुचछा

"नही तो" रुकमनि बोली और उन दोनो ने इनकार में सर हिलाया "हम दोनो भला रात को बैठके गाने क्यूँ गाएँगे?"

थोड़ी देर तक मैं उस रात के गाने को बारे में सोचता रहा पर फिर वो बात दिमाग़ से निकाल दी. रात का 1 बज रहा था और मैं सोने की कोशिश कर रहा था. बहुत मुमकिन था के किसी पड़ोसी ने गाना चला रखा था जिसकी हल्की सी आवाज़ मुझ तक पहुँच रही थी. मैं तैय्यार होकर घर से ऑफीस के लिए निकला. आधे रास्ते में ही था के मेरा फोन बजने लगा. कॉल मिश्रा की थी.

"कोर्ट में हियरिंग तो नही है तेरी आज?" मिश्रा ने पुचछा

"2 बजे के करीब एक केस की हियरिंग है. क्यूँ?" मैने पुचछा

"गुड. तो एक काम कर फिलहाल पोलीस स्टेशन आ जा" उसने मुझसे कहा. मैं खुद ही समझ गया के बात विपिन सोनी मर्डर केस को लेकर ही होगी

"क्या हुआ?" मैने पुचछा

"अरे यार यहाँ कुच्छ क़ानूनी बातें होने वाली हैं और तू जानता ही हैं के ये सब मेरे पल्ले नही पड़ता. तो मैने सोचा के मेरे पास जब एक घर का वकील है तो उसी को क्यूँ ना बुला लूँ"

वो बिल्कुल सही कह रहा था. लॉ से रिलेटेड बातें मिश्रा की समझ से बाहर थी जबकि वो एक पोलिसेवला था. उसके लिए तो उसका काम सिर्फ़ इतना था के जो भी ग़लत दिखे पकड़के उसकी हड्डियाँ तोड़ दो ताकि अगली बार कुच्छ ग़लत करने से पहले हज़ार बार सोचे.

"ठीक हैं मैं आ जाऊँगा. कितने बजे आना है?" मैने पुचछा

"अभी" मिश्रा ने जवाब दिया

पोलीस स्टेशन पहुँचा तो भूमिका सोनी और उसका बाप ऑलरेडी वहाँ बैठे हुए थे और मिश्रा उनसे कुच्छ बात कर रहा था. जाने क्यूँ दिल ही दिल में सोनी मर्डर केस में मुझे कुच्छ ज़्यादा ही इंटेरेस्ट था जबकि इससे मेरा कुच्छ लेना देना नही था. पर फिर भी मैं क्लोस्ली इस केस को फॉलो करना चाहता था इसलिए मुझे अपने उस वक़्त पोलीस स्टेशन में होने पर बेहद खुशी हुई.

"तो आपको कोई अंदाज़ा नही के आपसे अलग होने और यहाँ आने के बीच आपके पति कहाँ थे" मिश्रा भूमिका से पूछ रहा था. जवाब में भूमिका और उसके बाप दोनो ने इनकार में सर हिलाया

मेरे आने पर थोड़ी देर के लिए बात रुक गयी. मैं उन दोनो से मिला और एक चेर लेकर वहीं पर बैठ गया. हैरत थी के मेरे वहाँ होने पर ना तो भूमिका ने कोई ऐतराज़ जताया और ना ही उसके बाप ने.

"मेरी और मिस्टर सोनी की कभी बनी नही" भूमिका ने अपनी बात जारी की "काफ़ी झगड़े होते थे हम दोनो के बीच और ऐसे ही एक झगड़े के बाद वो घर छ्चोड़कर चले गये थे. उसके बाद मुझे उनके बारे में कुच्छ पता नही चला तब तक जब तक की मुझे आपकी अड्वर्टाइज़्मेंट के बारे में पता नही चला"

"आपने ढूँढने की कोशिश की?" मिश्रा ने पुचछा

"हाँ पोलीस में रिपोर्ट भी लिखवाई थी. न्यूसपेपर में आड़ भी दिया था" इस बार भूमिका का बाप बोला

"झगड़े किसी ख़ास बात पर" मिश्रा ने सवाल किया

"ऐसे ही मियाँ बीवी के झगड़े पर बहुत ज़्यादा होते थे. छ्होटी छ्होटी बात पर. मैने जितना उनके करीब जाने की कोशिश करती वो उतना ही दूर चले जाते. बात इतनी बिगड़ चुकी थी के अगर वो घर से ना जाते तो शायद मैं चली जाती " भूमिका ने जवाब दिया

"ह्म्‍म्म्म " मिश्रा सोचते हुए बोला "तो वो कोई 8 महीने पहले आपको छ्चोड़के चले गये थे और अपना कोई अड्रेस नही दिया था"

भूमिका ने फिर इनकार में सर हिलाया

"बॉडी हमें कब तक मिल सकती है?" भूमिका के बाप ने पुचछा

"शायद आज ही. पोस्ट मॉर्टेम हो चुका है. मौत उनके दिल में किसी तेज़ धार वाली चीज़ से हमले की वजह से हुई थी. हमारी तलाश अब भी जारी है और शायद इस वजह से कुच्छ दिन आपको और यहीं रुकना पड़े." मिश्रा ने पेन नीचे रखता हुए कहा

"पर मुझे प्रॉपर्टी के सिलसिले में वापिस मुंबई जाना पड़ सकता है" भूमिका बोली "मिस्टर सोनी की विल पढ़ी जानी है"

उसकी बात सुनकर मिश्रा ऐसे मुस्कुराया के मुझे लगा के भूमिका अभी उसको थप्पड़ मार देगी

"हाँ दौलत तो काफ़ी मिली होगी आपको. जिस तरह से आपने बताया है उससे तो लगता है के मिस्टर सोनी काफ़ी अमीर आदमी थे. अब तो आप एक अमीर औरत हो गयी" उसने कहा

मुझे यकीन नही हुआ के वो ये कह रहा है. ये उसके मतलब की बात नही थी और मुझे समझ नही आया के वो ऐसा क्यूँ कह रहा था पर उससे ज़्यादा हैरत तब हुई जब भूमिका भी जवाब में मुक्सुरा उठी.

"ये तो विल पर डिपेंड करता है" वो बोली "यहाँ से देअथ सर्टिफिकेट मिलने पर जब विल खुलेगी तब पता चलेगा के कितना मुझे मिला और कितना मिस्टर सोनी की बेटी को"

ये एक नयी बात थी. मैं और मिश्रा दोनो ही चौंक पड़े

"मिस्टर सोनी की बेटी?" मैं पूरी बात के दौरान पहली बार बोला "आपसे?"

"नही" वो मेरी तरफ देखकर बोली "मुझसे होती तो मैं हमारी बेटी कहती, सिर्फ़ मिस्टर सोनी की बेटी नही"

"तो आप उनकी दूसरी बीवी थी" मैने कहा

"जी हां" भूमिका ने एक लंबी साँस छ्चोड़ते हुए कहा "पहली बीवी से उनकी एक 24 साल की बेटी है, रश्मि"

"और उनकी वो बेटी कहाँ है?" मैने भूमिका से पुचछा

"अब ये तो भगवान ही जाने" उसने जवाब दिया "कोई साल भर पहले ऑस्ट्रेलिया गयी थी और अब वहाँ है के नही मैं नही जानती"

"क्या उसको इस बात की खबर है के उसके पिता अब नही रहे?" मिश्रा बोला

"पता नही" भूमिका ने कंधे हिलाते हुए कहा "मेरे पास ना तो उसका कोई अड्रेस है और ना ही फोन नंबर. जो पहले था अब वो फोन काम नही कर रहा और मुझसे उसने कभी बात नही की"

"और अपने पिता से?" मैने पुचछा

"पता नही" भूमिका ने जवाब दिया "शायद फोन करती हो"

कमरे में थोड़ी देर के लिए खामोशी च्छा गयी

"आपको क्या लगता है किसने मारा होगा आपके पति को?" मैने थोड़ी देर बाद सवाल किया

"नही जानती" भूमिका ने छ्होटा सा जवाब दिया

"उनके कोई दुश्मन?"

"नही जानती" फिर वही छ्होटा सा सवाल

"मुझे तो उन्होने कहा था के उनके दुश्मन थे जो उन्हें नुकसान पहुँचाना चाहते थे" मैने कहा

"मुझसे इस बारे में कभी कोई बात नही की उन्होने" भूमिका ने जवाब दिया

"देखा जाए तो पैसे के मामले में बड़ा टेढ़ा था वो" इस बार भूमिका के बाप ने जवाब दिया "इसके चक्कर में कई लोग उसको पसंद नही करते थे, जिनके साथ बिज़्नेस था वो. पर ऐसी कोई बात नही थी के कोई उसका खून ही कर दे. उसने तो कभी किसी को कोई नुकसान नही पहुँचाया"

"फिर भी उनका खून तो हुआ ही ना" मैने कहा तो कमरे में फिर पल के लिए सन्नाटा फेल गया

"सही कह रहे हैं आप" इस बार सनना भूमिका के बाप ने ही तोड़ा "और ये किसने किया ये सबसे ज़्यादा अगर कोई जानना चाहता है तो वो मैं और मेरी बेटी ही हैं"

"किसने किया ये तो फिलहाल कोई नही जानता पर कैसे किया ये मैं आपको ज़रूर बता सकता हूँ. उनपर किसी तेज़ धार वाली चीज़ से हमला किया गया था जो सीधा उनके दिल में उतर गयी. उनकी मौत भी फ़ौरन ही हो गयी." मैने कहा

"अगर बिल्कुल सही बात कहूँ तो हमला एक खंजर से किया गया था. पोस्ट मॉर्टेम की रिपोर्ट के हिसाब से वो ऐसा खंजर था जो पुराने ज़माने में राजा महाराजा रखा करते थे. वो तलवार जैसे होता है ना, आगे से मुड़ा हुआ" इस बार मिश्रा ने बात की

"खंजर?" भूमिका ने कहा और वो बेहोश होकर कुर्सी से गिर पड़ी.

क्रमशः……………………………………

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