Re: Marwar ki mast malaai-मारवाड़ की मस्त मलाई

[size=150:10u64bwr][color=#8000BF:10u64bwr]मारवाड़ की मस्त मलाई पार्ट –१२

लेखक– दा ग्रेट वोरिअर

हिंदी फॉण्ट बाय राज शर्मा

गतांक से आगे……………………

पिंकी की शादी को तकरीबन 2 महीने के करीब हो गये थे और इतना ही वक़्त पिंकी की सास को पटाने और चोदने मे लगा था. अब हम डेली चुदाई करने लगे. बड़े मज़े से दिन और रात गुज़र ते रहे. कभी पिंकी और उसकी सास को अलाग चोद्ता तो कभी थ्रीसम. अब हम तीनो एक दम से बे-शरम हो गये थे कभी कभी तो आंटी और पिंकी एक दूसरे की चूत भी चाटने लगी थी. आंटी को अपनी चूत चटवाने मे बोहोत ही मज़ा आता था. अब मैं बिंदास उनके घर आनने जाने लगा था और दोनो को चोदने लगा था. एक दिन पिंकी ने अपने हज़्बेंड लाला से बोल दिया के उसका लंड किसी काम का नही है और अब तुम्है डाइवोर्स दे रही हू तो वो घबरा गया और पिंकी के पैर पकड़ लिए और बोला के प्लीज़ पिंकी ऐसा ना करो तुम जो कहोगी मैं वैसे ही करूँगा तो पिंकी ने बोला के मुझे अछी तरह से चोद के मेरी प्यासी चूत की प्यास बुझा सकते हो तो लाला खामोश होगया और बोला के पिंकी तुम्है तो पता है के मेरी नुनु कमज़ोर है और मैं यह नही कर सकता तो पिंकी ने बोला के अगर मैं अपने किसी दोस्त से चुदवाउ तो तुम्है कोई प्राब्लम होगी तो उसने बोला के अगर किसी को पता चल जाएगा तो बोहोत मुस्किल हो जाएगी तो पिंकी ने बोला के नही होगी तुम उसकी फिकर ना करो तो लाला ने पूछा कोई है तुम्हारा ऐसा फ्रेंड तो पिंकी ने बोला के हा मेरा राजा है ना तो लाला ने बोला के कैसे करोगी तो पिंकी ने बोला के तुम उसकी फिकर ना करो मैं राजा को पटा लूँगी तुम्है कोई प्राब्लम तो नही है ना तो लाला ने बोला के अगर तुम राजा के साथ अपने बदन की प्यास को शांत करना चाहती हो तो मुझे कोई प्राब्लम नही है क्यॉंके वो तुम्हारे और हमारे घर का ही एक सदस्य है ठीक है तुम्है मेरी तरफ से पर्मिशन है तो पिंकी ने बोला के ठीक है लाला अब मैं तुम्है डाइवोर्स नही दूँगी पर तुम राजा को मेरे साथ सोने से रोकना नही और हा मैं तुम्हारे सामने ही उस से चुदवाना चाहुगी तो उसने बोला के अरे ऐसे कैसे तो पिंकी ने बोला के मैं उसको बोलूँगी के तुम्हारे सामने एक टाइम चोद ले ता के तुमको भी पता चले के उसका लंड कितना बड़ा मोटा और सख़्त है और वो कैसे चोद्ता है तो लाला ने बोला के तुम पहले भी राजा से चुदवा चुकी हो क्या तो पिंकी ने बोला के तो फिर तुम क्या समझते हो तुम जो मुझे रात मैं इधर उधर मसल के गरम कर के सो जाते हो तो मैं क्या करू. इसी गर्मी के चलते मैं ने राजा से चुदवा लिया है और अब मैं चाहती हू के तुम भी हमारी चुदाई देखो तो लाला राज़ी होगया. और फिर एक दिन मैं ने लाला के सामने ही पिंकी को खूब ज़ोर ज़ोर से चोदा तो लाला हैरत से मेरे लंड और मेरे चुदाई को देखने लगा और बोला के मुझे ताज्जुब है के इतना बड़ा और इतना मोटा लौदा इतनी छोटी चूत मे कैसे घुस जाता है. अब मैं पिंकी को उसके हज़्बेंड के सामने भी चोद लेता था और आंटी को भी पता

चल चुका था के मैं लाला के सामने ही पिंकी को चोद रहा हू तो उन्हो ने पूछा के लाला को कैसा लगा उसके सामने उसकी पत्नी को कोई और चोद रहा है तो पिंकी ने बोला के वो तो राजा का इतना बड़ा और मोटा लंड देख के घबरा ही गया और एक टाइम तो उसने राजा के लंड को अपने हाथ मे भी पकड़ के देखा तो आंटी हस्ने लगी और बोली के गन्दू का बेटा गन्दू है साला. इसी तरह से पिंकी की और आंटी की चुदाई करते टाइम पास होने लगा. अब वाहा सब हसी खुशी रहने लगे.

दोस्तो अब अपने दोस्त शांति लाल की तरफ चलते हैं

शाँतिलाल की शादी की तय्यारी

शांति लाल की शादी का टाइम करीब आने लगा था तय्यारिया ज़ोर ओ शोर से चल रही थी. पूजा आंटी खुद ही शादी की सारी परचेसिंग हयदेराबाद, कोलकाता और देल्ही से कर चुकी थी और अभी उनको मुंबई जाना था जहा उनका कोई भी रिश्तेदार नही था. अब तक तो उनके साथ कभी शांति होता था तो कभी वो अपनी किसी रिश्ते की कज़िन्स के साथ ही शॉपिंग करने के लिए जा रही थी. मुंबई जाने के लिए उनका और शांति का रिज़र्वेशन फर्स्ट क्लास ए/सी कॉमपार्टमेंट मे हो चुका था और होटल ओबेरोइ मे एक वीक के लिए भी एक सूयीट बुक करवा लिया गया था. इत्तेफ़ाक़ ऐसा हुआ के जिस रात उनकी ट्रेन थी उसी शाम को शांति मिल की सीढियो से नीचे गिर गया और उसके पैर मे हेरलाइन फ्रॅक्चर आ गया और उसको बॅंडेज कर दी गयी थी वो चलने फिरने के काबिल नही था और वो अपनी मम्मी के साथ मुंबई को भी नही जा सकता था. मुंबई को जाना भी ज़रूरी था. रिज़र्वेशन्स और दूसरे कंप्लीट अरेंज्मेंट्स हो चुके थे तो शांति ने बोला के राजा को ले जाओ मम्मी तो पूजा आंटी ने बोला के हा यह ठीक रहेगा और उन्हो ने मुझे बुलाया और बोला के मैं जल्दी से रेडी हो जाउ उनके साथ जाने के लिए तो मैं ने मम्मी को फोन किया तो मम्मी ने बोला के ठीक है तुम चले जाओ मैं तो अब शांति की शादी के करीब ही वापस आउन्गि तो मैं ने कहा के ठीक है मम्मी आप अपने टाइम से आओ यहा तो कोई प्राब्लम नही है.

ट्रेन रात के 10 बजे नामपल्ली रेलवे स्टेशन से निकली. हम रात का खाना तो खा चुके थे. यह फर्स्ट क्लास के कॉमपार्टमेंट मे 2 – 2 ही सीट्स थे एक ऊपेर और एक नीचे. बाहर की गर्मी से ए/सी कॉमपार्टमेंट के अंदर की ठंडक बोहोत अछी लग रही थी. पूजा आंटी नीचे की सीट पे सो गयी और मैं ऊपेर की सीट पे चला गया और थोड़ी ही देर मे सो गया. सुबह 4 बजे के आस पास ट्रेन वीटी स्टेशन पे रुक गयी और हम दोनो उतर गये. बाहर ओबेरोई की लिमज़ीन हमै पिक करने के लिए रेडी खड़ी थी. हम कार मे बैठ के होटेल चले गये. होटेल मे चेक इन किया. हमारा सूयीट 20थ फ्लोर पे था जहा से

दूर तक समंदर का नीला नीला पानी और ऊँची ऊँची बिल्डिंग्स बड़ी रोमॅंटिक लग रही थी. हमारा सूयीट 2 कमरो का था और एक छोटा सा सिट्टिंग रूम टाइप था जहा पर एक छोटी सी डाइनिंग टेबल थी और सोफा सेट विद सेंटर टेबल रखा हुआ था और एक कॉर्नर मे एक बड़ा सा फ्रिड्ज भी रखा था जिस मे मिनरल वॉटर के बॉटल्स, डिफ टाइप्स के जूसज़, कुछ बॉटल्स बियर, ब्रॅंडी, विस्की और शॅंपेन के भी रखे हुए थे. इन सब चीज़ो को जितना यूज़ करते उसका बिल बनता इस्तेमाल ना करो तो बिल नही बनता था. वाहा पे एक बड़ा सा केबल कनेक्टेड टीवी सेट भी रखा हुआ था.

दोनो कर्मरो मे अटॅच बाथरूम था. एक मास्टर बेडरूम जो थोड़ा बड़ा था जहा पे एक क्वीन साइज़ बेड था जिसपे एक दम से वाइट कलर की चदडार बिछी हुई थी और 2 पिल्लो और 4 स्क्वेर साइड पिल्लो भी थे जो प्रॉबब्ली सोने के टाइम पे पैरो के बीच मे दबाने के काम आते थे और वो मास्टर बेडरूम मे एक सोफा सेट और सेंटर टेबल और एक राइटिंग टेबल भी थी वो आंटी के लिए था और मेरे लिए दूसरा वाला थोड़ा छोटा था जहा एक डबल बेड पड़ा था और एक राइटिंग टेबल और एक चेर पड़ी हुई थी. सूयीट बड़ा ही शानदार था. दोनो बेडरूम्स के डोर्स सिट्टिंग रूम मे खुलते थे. इस से पहले भी मैं 5 स्टार होटेल्स मे ठहर चुका था लैकिन सूयीट मे यह फर्स्ट टाइम ही आया था. सूयीट मे अड्जस्ट होने होने तक सुबह के 6 बज गये थे. आंटी ने बोला के वो एक घंटा और सोना चाहती है तो मैं अपने कमरे मे आ गया और मैं भी सो गया. आँख खुली तो 8 बज चुके थे 2 घंटे की नींद से तबीयत काफ़ी फ्रेश लग रही थी. मैं बाथरूम मे चला गया और शवर ले के फ्रेश हो के बाहर आ गया इतनी देर मे आंटी भी नहा धो के फ्रेश हो चुकी थी. मैं आंटी को देखा तो देखता ही रह गया. एक तो आंटी का बोहोत ही गोरा रंग और उसके ऊपेर लाइट गुलाबी रंग की फ्लवर प्रिंटेड सारी और मॅचिंग ब्लाउस जो नवल तक नीचे उतरी हुई थी जहा से उनका पेट और बेल्ली बटन सॉफ नज़र आ रहा था. आंटी दूसरे मायनो मे गाज़ाब ढा रही थी मुझे अपनी तरफ ऐसे देखता पा कर हंस पड़ी और बोली हे राज्ज तुम तो मुझे ऐसे देख रहे हो जैसे आज पहले बार देख रहे हो तो मैं अपने ख़यालो से बाहर आ गया और मुस्कुराते हुए बोला के आंटी आप इतनी खूबसूरत हो यह मैं ने कभी भी धयान नही दिया था. आप तो बोहोत ही खूबसूरत हो और एक दम से किसी आकाश से उतरी हुई अप्सरा लग रही हो तो वो मुस्कुरा दी और बोली क्या राज अब मे इतनी खूबसूरत भी नही हू तो मैं ने बोला के नही आंटी आप सच मे बे इंतेहा खूबसूरत हो पता न्ही आज कितने लोग आपको देख के घायल हो जाए तो वो हंस के बोली चलो अब ज़ियादा ना बनाओ और नाश्ता करो. ब्रेकफास्ट अपने सूयीट पर ही मंगवा लिया था. नाश्ता कर के हम होटेल से बाहर आए और टॅक्सी कर के शॉपिंग के लिए निकल गये. शाम देर गये तक शॉपिंग करते

रहे. आंटी को मेरी चाय्स भी अछी लगी और वो मेरी पसंद के आइटम्स ही पर्चेस करती रही. शॉपिंग करते टाइम मेरे और आंटी के हाथ एक दूसरे के हाथो से टच हो रहे थे और मुंबई के रश मे हमारे बदन भी कभी कभी एक दूसरे के बदन से रगड़ खा जाते थे तो कभी जहा ज़ियादा भीड़ होती वाहा मुझे आंटी के बूब्स अपने हाथ पे लगते महसूस होते तो मेरे बदन मे एक सनसनाहट दौड़ जाती इसी तरह से शॉपिंग चलती रही.

शाम को हम वापस अपने कमरे मे आ गये और नहा धो कर फिर से फ्रेश हो गये तो मैं ने पूछा के आंटी क्या प्रोग्राम है अब तो उन्हो ने बोला के तुम जैसा बनाओगे वोही प्रोग्राम होगा तो मैं ने कहा के आंटी पिक्चर देखेगे या बीच पे फ्रेश एर तो उन्हो ने बोला के चलो आज समंदर की सैर ही करते है फिल्म कल देखेंगे तो मैं ने कहा के ठीक है आंटी आज हम डिन्नर भी बाहर ही करेंगे. थोड़ी देर मे हम होटेल से बाहर निकल गये और टहलते हुए नरीमन पॉइंट से चोपॅटी की तरफ चल दिए. सूरज समंदर के अंदर डूब रहा था हल्की हल्की हवा चल रही थी मौसम बोहोट अछा हो रहा था. हम दो घंटे तक ऐसे ही घूमते रहे. वाहा से चाट की बंदी से चाट खरीद के रेत (सांड) मे आ के बैठ गये और इधर उधर की बातें करने लगे. जब रात होने लगी तो आंटी ने बोला के चलो राज खाना खाते है तो हम दोनो फिर से वॉकिंग करते हुए ब्रबोवर्न स्टेडियम की तरफ चले गये जहा पे एक अछा रेस्टोरेंट था इस रेस्टोरेंट मे एक गोल वुडन प्लॅटफॉर्म भी बना हुआ था जहा पे शाम से ही कुछ लड़के और लड़कियाँ गाना सुनाते थे और कभी कोई लड़की डॅन्स भी कर जाती थी. आंटी को यह रेस्टोरेंट बोहोत पसंद आया. वही खाना खा के हम तकरीबन 11 बजे अपने सूयीट मे वापस आ गये. मुंबई के मौसम मे अच्छी ख़ासी ह्यूमिडिटी होती है और सारे बदन को चिप चिपा कर देती है. कमरे मे आने के बाद स्नान करना ज़रूरी था. आंटी शवर ले के आने तक टीवी देखता रहा और फिर मैं ने नीचे कॉफी शॉप से कॉफी का ऑर्डर दे दिया और अपने कमरे मे नहाने चला गया इतनी देर मे आंटी स्नान कर के बाहर आ चुकी थी और उन्हो ने शवर गाउन पहना हुआ था और अपने सर पे टवल लपेटा हुआ था और वेटर के कॉफी लाने का इंतेज़ार कर रही थी.

मैं अभी बाथरूम मे स्नान करके टब से बाहर निकल रहा था के नीचे रखे वाइट टवल पे मेरा पैर फिसल के मूड गया और मैं धप्प से नीचे गिर पड़ा, बतटब की छोटी सी दीवार मेरे थाइस के अन्द्रूनि भाग से लगी और मेरी स्किन वाहा से फॅट गयी और थोड़ा सा खून भी निकला मगर उतना ज़ियादा नही और गिरते ही दरद से मेरे मूह से एक लंबी चीख निकल गयी

और आंटी दौड़ते हुए बाथरूम तक आ गयी और दूर के बाहर से ही पुकार के पूछा के क्या हुआ राज्ज तो मैं ने बड़ी मुश्किल से बोला के मैं नीचे गिर गया हू आंटी और मेरा पैर मूड गया है उठ नही सकता. बाथरूम अंदर से बंद था. आंटी को सडन्ली याद आया के एक एमर्जेन्सी के बाथरूम के दूर फ्रेम मैं राइट साइड पे एक कील होती है जहा स्पेर के लटकी होती है तो उन्हो ने वो स्पेर चाबी दूर के फ्रेम से निकाली और बाथरूम का दूर खोल दिया. मुझे गिरा हुआ देख के आंटी जल्दी से मेरे पास आ गयी. मेरे बदन पे तो टवल भी नही था मैं नंगा ही नीचे गिरा पड़ा था लैकिन कुछ ऐसे स्टाइल मैं था के मेरी एक टाँग के ऊपेर दूसरी टांग रखी थी जिसकी वजह से मेरा लंड आंटी को इमीडीयेट्ली नज़र नही आ रहा था. आंटी मेरे करीब आ गयी और अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाया और बोली के उठो राज्ज चलो बाहर बेड पे लेट जाओ तो मैं उठने की कोशिश किया पर उठा नही गया. आंटी बड़ी मीठी नज़रो से मेरे नंगे बदन को देख रही थी. बड़ी मुश्किल से आंटी ने पीछे से मेरे बगल मे अपने दोनो हाथ डाल के उठाया. मैं तो अपने पैरो पे खड़ा होने के काबिल नही था और सारा वेट आंटी के ऊपेर ही था जिस से मेरे नंगे शोल्डर पे आंटी के बूब्स लग रहे थे. आंटी अभी भी शवर गाउन मैं ही थी जो सामने से ऑलमोस्ट खुला हुआ ही था और बीचे मैं फोल्ड कर के एक डोरी से बँधा हुआ था. मैं ने आंटी से बोला के आंटी मुझे एक टवल देदो तो आंटी ने बोला के बाहर तो चलो बेड पे लेट जाओ अभी तुम्है छोड़ा तो तुम नीचे गिर जाओगे. मैं नंगा ही आंटी के सहारे से उठ गया और ऐसे ही बड़ी मुश्किल से घसीट ते हुए आंटी मुझे बाथरूम से बाहर ले के बेड तक ले आई और मुझे बेड पे लिटा दिया मेरी नज़र आंटी पर पड़ी तो देखा के आंटी की नज़र मेरे लंड से हट नही रही थी वो मेरे लंड को खा जाने वाली नज़रो से देख रही थी. मेरे लंड की तरफ उनको इस तरह घूरते हुए देख कर मेरे लंड मे कुछ मूव्मेंट्स शुरू हो गयी और वो थोड़ा हिलने लगा. मैं अपने लंड को अपने हाथो से छुपाते हुए बोला के आंटी वो चदडार डाल दो मेरे ऊपर तो उन्हो ने कहा के ठहरो पहले मुझे देखने तो दो के कहा चोट लगी है. मेरे पास कुछ पेन किल्लर टॅब्लेट्स और आयंटमेंट है मैं लगा दूँगी तो मैं ने बोला के आंटी मुझे शरम आती है प्लीज़ चदडार डाल दो तो उन्हो ने कहा के अरे मेरे से शरम करोगे अब तुम, तुम्हे तो मैं एक हज़ार बार नंगा देख चुकी हू तो मैं ने हंस के बोला के हा आंटी तब मे बच्चा था लैकिन अब मैं बड़ा हो गया हू बच्चा नही रहा तो उन्हो ने कहा के तो क्या हुआ तुम कितने भी बड़े हो जाओ मेरे सामने तो बच्चे ही रहोगे. अब तुम चुप चाप लेते रहो मैं अभी आती हू और आंटी जैसे ही बेड से उठी मुझे उनकी लाइट क्रीम कलर की पॅंटी और ब्रस्सिएर नज़र आ गयी और फिर आंटी के जाने के बाद मैं ने च्छददर को खेच के ओढ़ लिया और

लेट के आंटी का वेट करने लगा.

आंटी 5 मिनिट के बाद कमरे मे आई तो उनके हाथ मे कॉफी के 2 कप्स भी थे एक कप मुझे दिया और एक कप से वो खुद कॉफी पीने लगी और बोली के राजा गरम गरम कॉफी पिलो थोड़ा आराम आजाएगा और साथ मे एक पेन किल्लर टॅबलेट भी दे दिया. कॉफी ख़तम करके आंटी कप्स ले गयी और आते समय एक मस्क्युलर क्रीम का ट्यूब ले के आ गयी इतनी देर मे मेरा लंड चदडार के अंदर टेंट बना चुका था जिसे आंटी बड़े गौर से देखते हुए बोली के चलो अब निकालो इसे तो मैं ने बोला के आप रहने दो आंटी मैं खुद ही लगा लूँगा तो आंटी बोली के क्यों मेरे लगाने से दरद कम नही होगा क्या तो मैं ने बोला के नही आंटी ऐसी बात नही बस मुझे शरम आती है तो उन्हो ने बोला के अरे मेरे से शरम करने की ज़रूरत नही और फिर यहा और कोई भी तो नही है किसी को क्या पता चलेगा तो मैं ने कहा के आंटी मुझे शरम आती है प्लीज़ कम से कम लाइट्स तो बंद करदो ना तो उन्हो ने कहा के अछा ठीक है और फिर बेड से उठ कर लाइट बंद करदी लैकिन ग्लास के विंडो से बाहर की थोड़ी थोड़ी रोशनी फिर भी कमरे के अंदर आ रही थी तो उन्हो ने पूछा के अभी भी शरम आ रही है या यह कर्टन्स भी बंद कर दू तो मैं ने बोला के हा आंटी बंद करदो कंप्लीट अंधेरा करदो प्लीज़ तो उन्हो ने बोला के अरे अगर कंप्लीट अंधेरा हो गया तो मुझे कैसे नज़र आएगा के दवा कहा लगानी है तो मैं ने बोला के आ जाएगा आंटी आप प्लीज़ सब कुछ बंद करदो तो उन्हो ने खिड़की के पर्दे भी गिरा दिए और बाहर सिट्टिंग रूम की लाइट्स भी बंद करदी जिस से कमरे मे अब एक दम से अंधेरा च्छा गया.

आंटी बेड पे मेरे राइट साइड के थाइस के करीब आके बैठ गयी और चादर को निकाल दिया. चादर के निकलते ही मेरा लंड जोश मे हिलने लगा. आंटी ने मेरे थाइस को टटोलना शुरू किया और पूछा के बताओ दरद कहा पे है तो मैं ने उनका हाथ अपने हाथ से पकड़ा और थाइ के इन्नर पोर्षन जो के मेरे गोल्फ बॉल के साइज़ के बॉल्स के करीब था उनका हाथ वाहा रख के बताया के यहा है. आंटी ने थोड़ा हाथ को इधर उधर घुमाया और बोली के ठीक है अब तुम चुप चाप लेते रहो मैं मस्क्युलर क्रीम लगाती हू और क्रीम का ट्यूब उठा के जहा मैने बताया था तकरीबन वाहा पे रख के ट्यूब को दबाया और ढेर सारी क्रीम मेरे इन्नर थाइ पे लग गयी. अब आंटी ने उसको स्प्रेड करना शुरू कर दिया. मेरे लंड का तो बुरा हाल हो गया था इतने दीनो बाद लंड के करीब किसी औरत के हाथो का स्पर्श मेरे लंड को दीवाना बना रहा था और मेरी गंद तो अपने आप ही ऊपेर उठ ने लगी थी. मैं चुप चाप लेटा रहा लैकिन मेरी साँसें बोहोट तेज़ी से चल रही थी. क्रीम लगाते

लगाते आंटी की उंगलियाँ मेरे बॉल्स को छू रही थी. हम दोनो मे से कोई भी बात नही कर रहा था कमरे मे अजीब सा सन्नाटा और रोमॅंटिक महॉल था. अब आंटी के उंगलियाँ मेरे बॉल्स को टटोलने लगी थी और फिर एक ही मिनिट के अंदर हाथ को थोड़ा ऊपेर कर के लंड को भी सहलाने लगी तो मैं ने बोला के अरे आंटी यह आप क्या कर रही हो तो उन्हो ने बोला के चुप लेटा रह मैं जो कर रही हू मुझे करने दे बॅस तो मैं ने बोला के आपकी मर्ज़ी आंटी मैं कुछ नही बोलूँगा आप जो करना चाहो सो करो. मेरे मूसल लंड पे उनका हाथ महसूस करके मस्ती से मेरी गंद एक दम से ऊपेर उठ गयी. लंड को सहलाते सहलाते आंटी ने मेरे लंड के डंडे को पकड़ के दबाया और फिर दोनो हाथो से पकड़ लिया फिर भी लंड का सूपड़ा उनके दोनो हाथो से बाहर ही निकला हुआ था और इतना मोटा था के उनकी मुति मे नही समा रहा था और उनकी उंगलियाँ नही मिल रही थी. इतनी देर तक हम दोनो खामोश ही थे फिर जब उन्हो ने मेरे लंड को अछी तरह से अपनी मुथि मे पकड़ लिया तो एक दम से उनका मूह सीटी बजाने वाली तरह से गोल खुल गया और हैरत से निकला अरे बाप रे राजा इतना लंबा इतना मोटा यह तो बड़ा ही शानदार है, लगता है भगवान ने तुम्हारे लिए स्पेशल लिंग बना के तुम्है गिफ्ट किया है. मैं कुछ बोला नही तो फिर आंटी बोली के इतना बड़ा और लोहे जैसा सख़्त भी है इस को पाने के लिए तो कोई भी लड़की या औरत सिर्फ़ सपने मे ही सोचा करती है और दोनो हाथो से लंड को पकड़ के ऊपेर नीचे करते हुए मूठ मारने लगी.

आंटी मेरे साइड मे ही बैठी हुई थी लैकिन शाएद उनको यह पोज़िशन कंफर्टबल नही लग रही थी इसी लिए वो साइड से उठ के मेरी दोनो टाँगो के बीच मे घुटने मोड़ के बैठ गयी और दोनो हाथो से मेरे लंड को पकड़ के मूठ मारने लगी. मैं खामोश ही लेटा रहा और आंटी के हाथो का मज़ा लेता रहा और यह सोच रहा था के क्या आंटी को चोदने का मोका मिलेगा या नही. अब आंटी क्रीम व्रीम सब भूल कर मेरे लंड की सेवा कर रही थी जो किसी मूसल की तरह से मोटा और लोहे जैसा सख़्त हो के किसी मिज़ाइल की तरह से खड़ा था. कमरे मे अंधेरा, और दो जलते बदन होने की वजह से कमरे का महॉल कुछ ज़ियादा ही गरम और सेक्सी हो गया था. आ राजा यह तो इतना शानदार है के इसको किस करने का मंन कर रहा है और बिना कुछ बोले वो झुकी और झुकते झुकते अपने हाथ पीछे कर के अपने बदन से शवर गाउन निकाल के फ्लोर पे फेक दिया और झुक के मेरे लंड को सूपदे पे किस किया और चूसना भी शुरू कर दिया. ऐसा लग रहा था जैसे आंटी मेरे लंड को देख के अपने होश ही खो बैठी है. मैं ने गौर किया तो देखा के आंटी की ब्रस्सिएर और पॅंटी गायब थी शाएद वो जब कॉफी, टॅब्लेट्स और क्रीम लाने के लिए अपने कमरे मैं गयी थी तब ही उन्हो ने ब्रा और पॅंटी को निकाल दिया होगा और शाएद मेरे लंड की सवारी का

मंन भी बना लिया होगा यह सोच कर मैं दिल ही दिल मे मुस्कुराने लगा.

आंटी दोनो हाथो से मूठ मार रही थी और सूपदे को चूस भी रही थी फिर उन्हो ने दोनो हाथ हटा लिए और पूरे लंड को अपने मूह मे ले के चूसने लगी तो मैने अपने पैर आंटी के बॅक पे लपेट लिए और उनका सर पकड़ के उनके मूह को चोदने लगा. मेरा लंड बोहोत बड़ा और मोटा है इसी लिए पूरा उनके मूह मे नही घुस रहा था उनके दाँत मेरे लंड के डंडे पे लग रहे थे. ऐसे ही चूस्ते चूस्ते आंटी का मूह मेरे लंड से अड्जस्ट हो गया और अब वो पूरा मूह के अंदर ले के चूस रही थी. मेरा लंड उनके हलक तक जा रहा था. मैं ने बोला के आंटी कुछ स्वाद मुझे भी तो दो, तो वो मेरा मतलब समझ गयी और पलट के मेरे ऊपेर 69 की पोज़िशन मे आ गयी. उनकी चूत तो बे इंतेहा गीली हो चुकी थी और उनकी चूत से बड़ी मस्त खुहबू भी आ रही थी. मैं आंटी की चूत को चाट रहा था ज़ुबान नीचे से ऊपेर और ऊपेर से नीचे और फिर क्लाइटॉरिस को दांतो से पकड़ा तो आंटी काँपने लगी और मेरे मूह मे ही झाड़ गयी. आंटी की चूत का जूस बोहोत मीठा था. आंटी बड़ी मस्ती से मेरा लंड चूस रही थी आंटी के बूब्स मेरे पेट से लग रहे थे तो मैं ने उनको अपने हाथो मे पकड़ लिया आहह क्या मस्त बूब्स थे आंटी के, इतनी एज मे भी इतने कड़क और निपल्स भी एरेक्ट हो गये थे मैं उनको पकड़ के मसल्ने लगा और अपने पेट से उनकी चुचिओ को रगड़ने लगा. मैं अपने पैर घुटनो से मोड अपनी गंद उठा उठा के उनके मूह को चोद रहा था और फिर मेरी मलाई भी रेडी हो गयी थी और फिर उनके सर को पकड़ के अपने लंड को पूरे का पूरा उनके हलक तक घुसा के पकड़ लिया और मेरे लंड मे से गरम गरम मलाई का फव्वारा निकल के आंटी के पेट मे डाइरेक्ट गिरने लगा जिसे वो एक ड्रॉप गिराए बिना पी गयी.[/color:10u64bwr][/size:10u64bwr]

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