Re: चाचा चाची की चुदाई

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[size=150:jegbxc3v][color=#8000BF:jegbxc3v]उधर जब सूरज की गांद पूरी तरह खुल गयी तो गीता ने निशा को इसकी सूचना दी,’ मेमसाहिब अब सूरज . की गांद पूरी तरह चुड़ाने के लिए तय्यार है,’ उसने कहा. "मगर मेरी एक शर्त और है गीता,’ निशा बोली.’ वो क्या मेमसाहिब?" गीता ने पूछा. अगर तुम एक रात साधु और कालू को चोदो तो उस से पहले पूरी एक रात सूरज उन दोनो से गांद मरवाएगा,’ वो बोली. "जितनी चुदाई मेरे सॅंडो से चाहिए उतनी ही मेरे पति की गांद घिसेगी,’ निशा बोली.

गीता अब सब कुछ समझ गयी. उसको और चाचिजी को समझ आ गया की अब सूरज मर्द नही रह पाएगा. " इतनी गांद मरवाते मरवाते वो पूरा गान्डू हो जाएगा फिर उसका लंड बेकार हो जाएगा चाचिजी,’ गीता ने कहा.’ हा वो तो है मगर इस से हुमको क्या, उल्टा हुमारे लिए नये लॉड खुद ढूँढ ढूँढ कर लाएगा,’ चाचिजी हस कर बोली. मगर गीता की खुद की चूत भी तो साधु का लंड ख़ान एके लिए खुजली मचा रही थी,’ हा चाचिजी अब होने दो सूरज बाबा को गान्डू,’ उसने कहा. रात मे चुदाई चालू होते ही चाचिजी ने कहा,’ सूरज बेटा, कल तू कालू और साधु से चुड ले ताकि हम दोनो बुद्धि चुतो को चैन पड़े,’ उन्होने कहा और ऊओह आ करने लगी. " लेकिन चाची मुझे इसका अनुभव नही,’ वो बोला.’ मे कल कालू को ले आउन्गि सूरज दादा आप एक बार उस से चुड कर देखना अच्छा लगे तो फिर साधु को बुलाएँगे,’ गीता बोली.’ "ठीक है चाची आप देख लो,’ सूरज ने कहा और उसके धक्के तेज़ हो गये.’ गीता उसकी गांद मे लगभग पूरा हाथ डाले हुए थी,’ ओह सूरज बाबा क्या रसीली गांद है आपकी,उसने कहा.

जैसा की तय था अगले दिन कालू आया. दोनो औरतो ने कालू को सब बता रखा था,’ देख धीरे धीरे मारना और मज़ा देना ताकि गांद मरवाने का इसको मज़ा आए,’ गीता ने अपने बेटे से कहा,’ तू चिंता मत कर मा मे ऐसी गांद मारूँगा को वो गान्डू बन कर रहेगा,’ कालू ने कहा. चाचिजी ने कालू के आने से पहले एक बार सूरज को चोद दिया था ताकि उसका पुरुष्टव थोड़ा और कमज़ोर हो जाए. जब गीता और कालू कमरे मे पहुचे तो भतीजा और चाची दोनो नंगे लेटे हुए थे. कालू और गीता ने भी कापरे उतार दिए. "ले बेटा घोड़ी बन तो ज़रा तेरी गांद की मालिश कर दू ज़रा,’ गीता बोली. ये सुनते ही किसी अग्यकारी पशु की तरह सूरज ने अपनी बड़ी गांद उप्पेर कर दी. गीता और चाचिजी दोनो उसके पीछे आ गयी. चाचिजी ने अपने दोनो हाथो से उसकी गांद के काले च्छेद को फैलाया और गीता ने कोई पाव भर नारियल का तेल अंडर सरका दिया, उसकी उंगलिया अब सूरज की गांद मे पच पच्छ की आवाज़े करने लगी. गीता ने धीरे धीरे सूरज की गांद को एक उंगली से चोदना शुरू कर दिया,’ अपनी गांद का च्छेद तो किसी कुँवारी की चूत सा टाइट है सूरज बाबू,’ गीता बोली. " हा रे आज इसकी गांद की सील कालू तोड़ेगा और कल साधु के साथ इसकी सुहग्रात है,’ चाचिजी बोली. गीता अब दो उंगलिओ से चोदने लगी,’ अब तुम्हारी गांद थोड़ी खुली बाबूजी मज़े लो मेरी चुदाई के,’ उसने कहा. गीता ने अब पूरी तीन उंगलिया अंडर सरका दी थी सूरज की गांद उत्तेजना मे उप्पेर नीचे हो रही थी,’ देखो इस कुँवारी गांद को लंड लेने के लिए कैसी मचल रही है,’ गीता बोली.’ " मगर तेरे बेटे से कहना मेरे बेटे को धीरे धीरे चोदे खून ना आए कही और हा बीज इतना गहरा ना डाले की इसके पेट मे बच्चा ठहर जाए,’ चाचिजी बोली. उधर सूरज की गांद अब पूरी खुल चुकी थी गीता को पता चल गया कि लोहा गरम है, उसने इशारा किया और उसके इशारा करते ही चाचिजी ने कालू के लंड पेर तेल मालिश शुरू कर दी. चाचिजी ने पहले उसके लंड की चमरी पीछे कर सुपरे को खूब रग्रा और उसको तेल पिलाया फिर चमरी से वापस सुपरे को क़ैद कर दिया और उसके लंड पेर चारो तरफ और अप्पर नीचे तेल मलने लगी, उसकी गोलिओ तक को नही छोड़ा. कालू का लंड अब तय्यार था और तेल से एकद्ूम चिकना हो चक्का था.

कालू सूरज के पूछे आया और अपना हथियार उसकी गांद के च्छेद पेर रखा, गीता ने अपने बेटे के लंड की चमरी पीछे खिसका दी और तेल से गीला सुपरा सूरज के मलद्वार के प्रवेश पेर दबा दिया. कालू ने हल्का सा ज़ोर लगाया तो खुली हुई गांद मे उसका मोटा सुपरा फँस गया. वो एक मिनिट तक ऐसे ही रहा फिर उसने थोडा अड्जस्टमेंट किया और हल्का सा लंड और अंडर सरका दिया. अब तक सूरज को दर्द नही हुआ था. कालू ने थोडा और ज़ोर लगाया तो आधा लंड सरक गया अब सूरज के मूह से हल्की चीख निकली मगर चाचिजी ने अपने होट उसके होटो मे डाल उसको किस करना शुरू कर दिया ताकि वो कुछ बोल ना सके. उधर कालू का लंड सरकता रहा. कोई 3 मिनिट मे उसका लगभग पूरा लंड भीतेर सरक गया. अब कालू अपनी गांद हिला हिला कर लंड को अड्जस्ट करने लगा. उसको लगा की अब सब ठीक है तो उसने चोदना शुरू कर दिया. " मज़ा आ रहा है बेटे?" चाचिजी ने पूछा.’ ज़्यादा नही आ रहा चाचिजी ,’ सूरज बोला. तू बस मज़े ले मेरे बेटे, कालू बहुत प्यार से ले रहा है तेरी,’ चाचिजी बोली. " ऊ चाची ये मोटा लॉडा मेरी गांद का कचूमर निकल देगा,’ सूरज बोला. " बेटा मोटा लंड तो चूत और गांद का कचूमर निकालने की लिए ही बना होता है,’ चाचिजी बोली.

उधर कालू को पता था अब सूरज की गांद लंड खाने को तय्यार है इसलिए उसने स्पीड बढ़ा दी. " चोद मेरे लाल चोद इसकी मोटी गांद, तेरा मोटा लंड इसको खूब मज़ा देगा,’ गीता बोली.’ सूरज ऊवू आ करता रहा मगर कालू के लंड की चुदाई के मज़े भी लेता रहा. 5 मिनिट की चुदाई के बाद कालू ने हथियार डाल दिए और उसकी पिचकारी सूरज की कुँवारी गांद मे जा गिरी,’ श मा मेरा पानी छ्छूट रहा है,’ वो बोला.’ " डाल मेरे बेटे डाल इसकी गांद मे अपना पानी और सींच इसको,’ गीता बोली.’ " ले ले बेटा इस सांड़ का ताक़तवर पानी अपने अंडर,’ चाचिजी बोली.’ सूरज भी पानी के गिरते ही सुस्त पड़ गया. अद्ढा काम हो चुका था. उस रात कालू ने चार बार सूरज की गांद मारी. अब अगले दिन सूरज को सुहाग रात थी.

उधर जब सूरज की गांद पूरी तरह खुल गयी तो गीता ने निशा को इसकी सूचना दी,’ मेमसाहिब अब सूरज . की गांद पूरी तरह चुड़ाने के लिए तय्यार है,’ उसने कहा. "मगर मेरी एक शर्त और है गीता,’ निशा बोली.’ वो क्या मेमसाहिब?" गीता ने पूछा. अगर तुम एक रात साधु और कालू को चोदो तो उस से पहले पूरी एक रात सूरज उन दोनो से गांद मरवाएगा,’ वो बोली. "जितनी चुदाई मेरे सॅंडो से चाहिए उतनी ही मेरे पति की गांद घिसेगी,’ निशा बोली.

गीता अब सब कुछ समझ गयी. उसको और चाचिजी को समझ आ गया की अब सूरज मर्द नही रह पाएगा. " इतनी गांद मरवाते मरवाते वो पूरा गान्डू हो जाएगा फिर उसका लंड बेकार हो जाएगा चाचिजी,’ गीता ने कहा.’ हा वो तो है मगर इस से हुमको क्या, उल्टा हुमारे लिए नये लॉड खुद ढूँढ ढूँढ कर लाएगा,’ चाचिजी हस कर बोली. मगर गीता की खुद की चूत भी तो साधु का लंड ख़ान एके लिए खुजली मचा रही थी,’ हा चाचिजी अब होने दो सूरज बाबा को गान्डू,’ उसने कहा. रात मे चुदाई चालू होते ही चाचिजी ने कहा,’ सूरज बेटा, कल तू कालू और साधु से चुड ले ताकि हम दोनो बुद्धि चुतो को चैन पड़े,’ उन्होने कहा और ऊओह आ करने लगी. " लेकिन चाची मुझे इसका अनुभव नही,’ वो बोला.’ मे कल कालू को ले आउन्गि सूरज दादा आप एक बार उस से चुड कर देखना अच्छा लगे तो फिर साधु को बुलाएँगे,’ गीता बोली.’ "ठीक है चाची आप देख लो,’ सूरज ने कहा और उसके धक्के तेज़ हो गये.’ गीता उसकी गांद मे लगभग पूरा हाथ डाले हुए थी,’ ओह सूरज बाबा क्या रसीली गांद है आपकी,उसने कहा.

जैसा की तय था अगले दिन कालू आया. दोनो औरतो ने कालू को सब बता रखा था,’ देख धीरे धीरे मारना और मज़ा देना ताकि गांद मरवाने का इसको मज़ा आए,’ गीता ने अपने बेटे से कहा,’ तू चिंता मत कर मा मे ऐसी गांद मारूँगा को वो गान्डू बन कर रहेगा,’ कालू ने कहा. चाचिजी ने कालू के आने से पहले एक बार सूरज को चोद दिया था ताकि उसका पुरुष्टव थोड़ा और कमज़ोर हो जाए. जब गीता और कालू कमरे मे पहुचे तो भतीजा और चाची दोनो नंगे लेटे हुए थे. कालू और गीता ने भी कापरे उतार दिए. "ले बेटा घोड़ी बन तो ज़रा तेरी गांद की मालिश कर दू ज़रा,’ गीता बोली. ये सुनते ही किसी अग्यकारी पशु की तरह सूरज ने अपनी बड़ी गांद उप्पेर कर दी. गीता और चाचिजी दोनो उसके पीछे आ गयी. चाचिजी ने अपने दोनो हाथो से उसकी गांद के काले च्छेद को फैलाया और गीता ने कोई पाव भर नारियल का तेल अंडर सरका दिया, उसकी उंगलिया अब सूरज की गांद मे पच पच्छ की आवाज़े करने लगी. गीता ने धीरे धीरे सूरज की गांद को एक उंगली से चोदना शुरू कर दिया,’ अपनी गांद का च्छेद तो किसी कुँवारी की चूत सा टाइट है सूरज बाबू,’ गीता बोली. " हा रे आज इसकी गांद की सील कालू तोड़ेगा और कल साधु के साथ इसकी सुहग्रात है,’ चाचिजी बोली. गीता अब दो उंगलिओ से चोदने लगी,’ अब तुम्हारी गांद थोड़ी खुली बाबूजी मज़े लो मेरी चुदाई के,’ उसने कहा. गीता ने अब पूरी तीन उंगलिया अंडर सरका दी थी सूरज की गांद उत्तेजना मे उप्पेर नीचे हो रही थी,’ देखो इस कुँवारी गांद को लंड लेने के लिए कैसी मचल रही है,’ गीता बोली.’ " मगर तेरे बेटे से कहना मेरे बेटे को धीरे धीरे चोदे खून ना आए कही और हा बीज इतना गहरा ना डाले की इसके पेट मे बच्चा ठहर जाए,’ चाचिजी बोली. उधर सूरज की गांद अब पूरी खुल चुकी थी गीता को पता चल गया कि लोहा गरम है, उसने इशारा किया और उसके इशारा करते ही चाचिजी ने कालू के लंड पेर तेल मालिश शुरू कर दी. चाचिजी ने पहले उसके लंड की चमरी पीछे कर सुपरे को खूब रग्रा और उसको तेल पिलाया फिर चमरी से वापस सुपरे को क़ैद कर दिया और उसके लंड पेर चारो तरफ और अप्पर नीचे तेल मलने लगी, उसकी गोलिओ तक को नही छोड़ा. कालू का लंड अब तय्यार था और तेल से एकद्ूम चिकना हो चक्का था.

कालू सूरज के पूछे आया और अपना हथियार उसकी गांद के च्छेद पेर रखा, गीता ने अपने बेटे के लंड की चमरी पीछे खिसका दी और तेल से गीला सुपरा सूरज के मलद्वार के प्रवेश पेर दबा दिया. कालू ने हल्का सा ज़ोर लगाया तो खुली हुई गांद मे उसका मोटा सुपरा फँस गया. वो एक मिनिट तक ऐसे ही रहा फिर उसने थोडा अड्जस्टमेंट किया और हल्का सा लंड और अंडर सरका दिया. अब तक सूरज को दर्द नही हुआ था. कालू ने थोडा और ज़ोर लगाया तो आधा लंड सरक गया अब सूरज के मूह से हल्की चीख निकली मगर चाचिजी ने अपने होट उसके होटो मे डाल उसको किस करना शुरू कर दिया ताकि वो कुछ बोल ना सके. उधर कालू का लंड सरकता रहा. कोई 3 मिनिट मे उसका लगभग पूरा लंड भीतेर सरक गया. अब कालू अपनी गांद हिला हिला कर लंड को अड्जस्ट करने लगा. उसको लगा की अब सब ठीक है तो उसने चोदना शुरू कर दिया. " मज़ा आ रहा है बेटे?" चाचिजी ने पूछा.’ ज़्यादा नही आ रहा चाचिजी ,’ सूरज बोला. तू बस मज़े ले मेरे बेटे, कालू बहुत प्यार से ले रहा है तेरी,’ चाचिजी बोली. " ऊ चाची ये मोटा लॉडा मेरी गांद का कचूमर निकल देगा,’ सूरज बोला. " बेटा मोटा लंड तो चूत और गांद का कचूमर निकालने की लिए ही बना होता है,’ चाचिजी बोली.

उधर कालू को पता था अब सूरज की गांद लंड खाने को तय्यार है इसलिए उसने स्पीड बढ़ा दी. " चोद मेरे लाल चोद इसकी मोटी गांद, तेरा मोटा लंड इसको खूब मज़ा देगा,’ गीता बोली.’ सूरज ऊवू आ करता रहा मगर कालू के लंड की चुदाई के मज़े भी लेता रहा. 5 मिनिट की चुदाई के बाद कालू ने हथियार डाल दिए और उसकी पिचकारी सूरज की कुँवारी गांद मे जा गिरी,’ श मा मेरा पानी छ्छूट रहा है,’ वो बोला.’ " डाल मेरे बेटे डाल इसकी गांद मे अपना पानी और सींच इसको,’ गीता बोली.’ " ले ले बेटा इस सांड़ का ताक़तवर पानी अपने अंडर,’ चाचिजी बोली.’ सूरज भी पानी के गिरते ही सुस्त पड़ गया. अद्ढा काम हो चुका था. उस रात कालू ने चार बार सूरज की गांद मारी. अब अगले दिन सूरज को सुहाग रात थी.

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