अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता

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[color=#000080:2l6e81t9][size=200:2l6e81t9]अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता –01[/size:2l6e81t9][/color:2l6e81t9]

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उस सोसाइटी का नाम अमन सोसाइटी था और रियल मै वहाँ से सब धरम के लोग अमन शांति से रहते थे .सब लोग एकदुसरे के काम आते थे,सब फेस्टिवल्स मिलके धूम धाम के साथ मानते थे. जब कोई भी डिस्प्यूट होती तो सब लोग एक साथ मिलके सल्यूशन ढूनडते और प्राब्लम का फ़ैसला करते. इससे कोई भी बात हाथ से ज़्यादा बाहर नही जाती**** सोसाइटी के 3र्ड फ्लोर पे अपनी बीवी और बेटी के साथ रहते थे मिस्टर प्रमोद भोसले. वो सुशील स्वाभाव के पति पत्नी जॉब करते थे. उनकी बेटी संगीता, अब सीनियर कॉलेज जाने लगी थी. संगीता एक अछी लड़की थी जिसपे उमर के साथ-साथ जवानी भी आये थी.17-18 के उमर होने से जिस्म अब भरने लगा था उसका .दिखने मै कोई हूर तो नही थी संगीता पर जिस्म सही जगहो पे भरने और बढ़ने से वो काफ़ी खूबसूरत लगती थी. कॉलेज के लड़के उसपे कॉमेंट्स मारते थे और संगीता को वो अक्चा भी लगता थ.ईन सबके बावजूद वो क़िस्सी को लिफ्ट नही देती थी क्योंकि उसका दिल मै तो उसके सोसाइटी मई रहनेवाले अफ़रोज़ के लिए प्यार जाग गया था. अफ़रोज़ रहीम ख़ान, जो 2न्ड फ्लोर पे रहता अपनी मा बाप की दूसरी औलाद था अफ़रोज़ की बड़ी बेहन, सलमा का निकाह पिछले साल हुआ था अफ़रोज़के मया बाप भी नौकरी करते थे. अफ़रोज़ 25 साल का था, पढ़ाई पोरी करके अब जॉब ढ़ूंड रहा था. दिखने मई एकद्ूम स्मार्ट और बतो मई किसको भी अपना बनाने मै वो एकद्ूम माहिर था . आcचि नौकरी मिलने तक कोई आइसे वैसे नौकरी नही करना चाहता था वो. अफ़रोज़ गये कई दीनो से देख रहा था की संगीता उससे आते जाते देखती थी. जब वो किसी के साथ बिल्डिंग के नीचे खड़ी होके बात करती थी और अफ़रोज़ बालकोनी मई आता तो वो नज़र चुराते उससे देखती. अफ़रोज़ भी संगीता को देखने लगा थ.ज़ब संगीता स्टेरकेस से नीचे या उप्पर जाती तो वो ज़रूर अफ़रोज़ के डोर मई झाँकती. अफ़रोज़ को भी संगीता पसंद थी. कई दीनो तक यह सिलसिला चलता रहा. अफ़रोज़ अब संगीता को देखके स्माइल भी करने लगा और धीरे-धीरे संगीता भी अब उसके स्माइल का जवाब दाने लगी. अफ़रोज़ संगीता से बात करना चाहता था पर मौका ही नही मिल रहा था. संगीता भी अफ़रोज़ से बात करना चाहती थी पर शर्म से वो कर नही पा रही थी. आख़िर मै संगीता को मिलने की अफ़रोज़ ने पोरी प्लांनिंग की. वो जनता था की दोफर को सोसाइटी मई एकदम सन्नाटा रहता है. घर के मर्द काम पे जाते है और उनकी बीवी घर का काम पूरा करके ज़रा आराम करती है. 3-4 बार अफ़रोज़ ने संगीता को डूफर को घर आते देखा था. संगीता को डूफर के वक़्त मिलने का उसने फ़ैसला किया अफ़रोज़ दिन अफ़रोज़ बाल्कनी मई खड़ा था जब उससे संगीता बिल्डिंग के गाते से अंदर आती दिखी. जल्दी से अफ़रोज़ घर से निकलते जाके स्टेर केस पे खड़ा हुआ. 2 मिनिट बाद उससे संगीता के आने की आहत हुई.1स्ट फ्लोर की सीढ़िया चढ़के जैसे संगीता उप्पर आए तो उसने अफ़रोज़ को देख.शन्गित की धड़कन अब तेज़ हुई. जिस अफ़रोज़ के लिए वो तड़प रही थी वो आज जब खुद उसके सामने खड़ा था तो संगीता कुछ बोल ही नही पा रही थि.शन्गित ने सलवार कमीज़ पहनी थि.शन्गित को इस दुविधा मई देखके अफ़रोज़ हल्के से स्माइल करके बोला,"हेलो संगीता,कैसे हो तुम?"संगीता शरमाते बोली,"हेलो अफ़रोज़,मई ठीक हून,तुम कैसे हो?"अफ़रोज़ संगीता के पास आते बोला,"जब तक तुझे नही देखा ठीक नही था पर अब तुझे देखके जान मई जान आई मेरि.शन्गित मुझे तुमसे एक बात कहनी है, मई तुमसे बहाड़ मोहब्बत करता हून और तुमको मेरी माशुका बनाना चाहता हून,क्या तुम भी मुझे चाहती हो संगीता?"अफ़रोज़ की बात सुनके संगीता शरमाये अफ़रोज़ ने आइसा सीन आजतक सिर्फ़ हिन्दी मूवीस मई देखा था. अफ़रोज़ की बात से उसकी धड़कन तेज हुई. अब नीचे देखते बोली,"अफ़रोज़ यह तुम क्या बोल रहे हो?मुझे कुछ समझ मई नही आ रहा है."अफ़रोज़ संगीता के और पास आते उसका हाथ हल्के से थमते बोला,"संगीता आईसी नादान मत बनो,तुम भी तो मुझे चुप-चिपके देखती हो ना?मुझे मालूम है की तुम भी मुझे चाहती हो है ना?"अफ़रोज़ के हाथ पकड़ने से संगीता डर गयी. अफ़रोज़ की हिम्मत देखके उस्से अछा भी लगता है पर क़िस्सी के आने का डर भी थ.Wओह अफ़रोज़ को चाहती थी पर ऐसे अचानक अपने प्यार का इज़हार कैसे करती?अपना हाट चुराने की कोशिश करते वो बोली, "प्लीज़ अफ़रोज़ तुम मेरा हाथ चोरो ना,यह मेरा हाथ क्यों पकड़ा है तूने?देखो कोई भी आ सकता है यहाँ. मेरा हाथ छोरो."अफ़रोज़ को पता था की इस वक़्त कोई नही आता इसलिए वो बिंडास्ट थ.शन्गित जैसे हाथ चुराने की कोशिश करने लगी अफ़रोज़ उसका हाथ और कासके पकड़ते उसके और पास आया और अब उसकी कमर मई एक हाथ डालते बोला,"आरे हाथ क्यों खिच रही है तू?क्या तू मुझसे प्यार नही करती?मई तेरा दीवाना हो गया हूँ संगीता अब तू ही मेरी ज़िंदगी है.शन्गित तेरा हाथ ज़रूर चूर दूँगा लेकिन पहले मेरी बात का जवाब दे और मेरा प्यार कबूल कर."संगीता अब पूरी तरह डर गये.आप्ने आपको अफ़रोज़ की गिरफ़्त से डोर करते, हाथ चुराने की कोशिश करते वो बोली,"अफ़रोज़ यह क्या कर रहे हो तुम?देख प्लीज़ मुझे जाने दो.Mऐ मनती हून की मुझे तू पसंद है पर अब सोचा तो समझी की मई तारे सामने कितनी छोटी हून."अफ़रोज़ फिर संगीता की कमर मई हाथ डालके उससे अब अपने से चिपकता है. चिपकने से अब संगीता का सीना अफ़रोज़ के सिने पे दबा है.ईधर उधर देखके अफ़रोज़ बोला,"संगीता तू मुझे प्यार करती है तो उसमे छोटा बड़ा क्या करना है. वैसे माना की उमर मई तू छोटी है, बाकी देखो तुम्हारा बदन कैसे एक जवान लड़की के जैसा है. देख जबतक तू हन मई बोलती तुझे जाने नही दनेवाला मई."संगीता अब कोई जवाब नही दे पाई. पहला प्यार जिसे किया वोही लड़के के बहो मई वो अब थी पर डर गये थि.Wऐसे संगीता ज़रा भोली और शर्मीली लड़की थी पर अपनी सहेलियो की चुदाई की बाते सुनके उसके दिल मई भी अपनी चूत चुड़वा लाने की उमंग जाग उठी थी. अफ़रोज़ के हॅंडसम लुक्स पे वो फिदा थी और इसलिए उससे बार-बार देखती. अफ़रोज़ उमर और एक्सपीरियेन्स मई संगीता से काफ़ी बड़ा था. वो संगीता जैसे भोली लड़की को फसके मस्ती करने के मूड मई था. जबसे उससे समझा की संगीता उससे देखती है उसने भी संगीता को देखना शुरू किया था. अफ़रोज़ ने इस संगीता की कोरी जवानी को मसल्ने का पोरा प्लान बनाया था. संगीता के मुहसे कोई जवाब ना पके अफ़रोज़ हल्के से संगीता के मम्मे पे हाथ फेरते बोला,"संगीता, मई तुझसे शादी करना चाहता हून.टुझे दुनिया की सब खुशी दूँगा,अcचे ड्रेसस दूँगा और तुझे हमेशा खुश रखूँगा. देख संगीता,आगर तूने फिर भी इनकार किया तो मई जान दे दूँगा तारे नाम से."अपने सिने पे पहले बार और वो भी आइसे खुले जगह मई मर्द का हाथ महसूस करते ही संगीता हड़बड़ाई अफ़रोज़ का जिस्म मई एक करेंट दौड़ते जिस्म मई सरसराहट फैलि.शन्गित पे एक अजेब मस्ती छा गये और वो उससी मस्ती मई बोली है,"अफ़रोज़ देख मई भी तुझे प्यार करती हून और मुझे यकीन है की तू मुझे खुश रखेगा पर शादी कैसे कर सकती हून तुझसे?एक तो हमारा धर्म अलग है और हमारी उमर मई भी कितना फ़र्क है ना?प्लीज़ अब मुझे जाने दे अफ़रोज़,कोई हमे यहाँ देखेगा तो मेरी बड़ी बदमानी होगी."अफराज़ जनता था की कोई नही आता है उस डूफर के वक़्त इसलिए वो बींदस्त थ.ःअल्के से संगीता के सिने पे हाथ घूमते वो बोला,"संगीता अगर तुझे मुझसे प्यार नही तो क्यों मारे आते जाते तू मुझे देखती रहती है?क्यों बार बार मारे सामने से आते जाते तड़पति हो?अगर तू जानती है की मई तुझे खुश रखूँगा तो क्यों खुले दिल से मेरा प्यार नही आक्सेप्ट करती है तू? और यह धरम की बात तूने तब सोचनी चाहाए थी जब तू मुझे देखने लगी. आरे मुस्लिम हुआ तो क्या मई भी तो इंसान हून ना?" अचानक संगीता का लेफ्ट मम्मा दबाते असलम बोला,"जैसे तारे इधर एक दिल है वैसे मुझे भी दिल है. मुझमे नेया पसंद की यह क्या बात है संगीता?"मम्मा दबने से संगीता को मज़ा आता है पर वो बहुत शरमाती भी है. अफ़रोज़ की दरिंग पे संगीता खुश हुई पर डर से उसका दिल और ज़ोरो से धड़कने लगता है. मम्मा दबने से वो हकले से चीकते बोली,"आह,अफ़रोज़ दर्द हो रहा है,क्यों दबा रहे हो आइसा?देखो मई कुछ नही जानती यह सब,मुझे प्लीज़ तुम जाने दो अफ़रोज़."अफ़रोज़ समझा की संगीता शर्म से इनकार कर रही थि.शन्गित का सीना हल्के मसालते उसका गाल किस करते अफ़रोज़ बोला, "संगीता तुझे तेरा दिल दिखाने मैने सीना दबय.डेखो मुझे पता है है तू भी मुझे चाहती है तो क्यों इतना तडपा रही है मुझे? एक बार प्यार का इज़हार तू कर तो तुझे जाने दूँगा मई."अफ़रोज़ के किस से संगीता पूरी तरह हड़बड़ा गये.आफ्रोz को धक्के डाके डोर करते वो बोली,"उम्म्म मुझे छोरो प्लीज़ अफ़रोज़,यह सब क्या है?मुझसे दूर रहो तुम." अफ़रोज़ से दूर होके संगीता जैसे जाने लगती है अफ़रोज़ उसका हाथ पकड़ते बोला, "अच्छा संगीता एक काम करो,मुझे आज श्याम को मारे घर मई मिलके बताओ की तुझे मई क्यों पसंद नही ओक?मुझे मिलने तू आएगी ना मेरी जान?प्लीज़ आओ ना,एक बार सिर्फ़ एक बार . नही तो मई आज जान दे दूँगा और देअथ नोट मई तेरा नाम लिखूंगा,तब तो आओगी ना रानी मुझे मिलने?"अफ़रोज़ से हाथ चुराते संगीता बोली,"नही मई नही आयूंगी अफ़रोज़ तुमसे मिलने." पर अफ़रोज़ की जान दाने की धमकी से डरके उसने आगे कहा,"नही अफ़रोज़ ऐसा मत करना प्लीज़,नही मुझे कुछ सोचने का समय दो,मै तुमको सोचके बतौँगी पर तब तक तुम अपने आप को कुछ मत करना,मेरी कसम है तुमको.

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