मनोरमा compleet

[color=#FF0000:184may6y][size=200:184may6y] मनोरमा [/size:184may6y][/color:184may6y]

[size=150:184may6y][color=#4000BF:184may6y]मनोरमा शिशोदिया अपने गाँव राम नगर की बहुत सब से हसीन लड़की थी. रंग गोरा शरीन ऐसा की देखने वाला बस देखता रह जाए. वह पढने लिखने में एकदम सामान्य से लड़की थी, लेकिन गाँव के सारे लड़के यही तमन्ना करते थे कि किसी तरह मनोरमा उन पर मेहरबान हो जाए. ऐसा सुनने में आया है की मनोरमा जब भी मेहरबान हुई उन्होंने जाति, धर्म, आयु, कुंवारा या शादीशुदा के बीच में कोई भेद नहीं किया. मतलब ये है कि उन्होंने राम नगर में युनुस से चुदवाया जो १८ साल का नौजवान था और उनकी नुक्कड़ पर पंचर की दूकान थी. मनोरमा ने विवेक से पहली बार गांड मराने का अनुभव प्राप्त किया जो कॉलेज का टोपर था. उन्होंने एक बार ६० बर्षीय बेंछु से भी चुदवाया क्योंकि बेंछु की बीवी कई साल पहले भगवान् को प्यारी हो चुकी थी. मनोरमा के मन में सब के लिए बड़ा प्यार था.

मनोरम के लिए जब फुर्सतगंज से ठाकुरों के खानदान से रिश्ता आया, राम नगर तो मानों एक "राश्ट्रीय शोक" में डूब गया. जो लोग मनोरमा को चोद रहे थे वो तो दुखी थे ही, पर उनसे ज्यादा वो लोग दुःख में थें जिन्हें ये उम्मीद थी की उन्हें कभी न कभी मनोरमा को भोगने का मौका मिलेगा.

मनोरमा के पिता श्रीराम सिंह ने मनोरमा की शादी बड़ी धूमधाम से की. मनोरमा की मा के मरने के बाद श्रीराम सिंह का जीवन काफी कठिन रहा था, और वो चाहते थे की वो मनोरम के विवाह के बाद वो अपने जीवन के बारे में फिर से सोचेंगे.

शहनाइयों के बीच मनोरमा शिशोदिया से मनोरमा ठाकुर बनी और अपने पति रवि ठाकुर के साथ उनकी पुशतैनी हवेली आयीं. उनके ससुर शमशेर ठाकुर फुर्सतगंज के जाने माने ज़मीदार थे और हवेली के मालिक भी. ठाकुर परिवार में शमशेर और उनके थीं बेटे थे. रवि सबसे छोटा बेटे था. अनिल और राजेश रवि के दो बड़े भाई थे. ये बात सभी को अजीब लगी को शमशेर सबसे पहले अपने सबसे छोटे बेटे का विवाह क्यों कर रहे हैं. श्रीराम सिंह की तरह शमशेर की पत्नी कई वर्ष पहले इश्वर को प्यारी हो चुकी थी. अनिल एवं राजेश ने कुंवारा रहने का निर्णय लिया हुआ था. राजेश और अनिल खेतों का पूरा काम देखते थे. मनोरमा का पति रवि तो बाद खेतों पर पार्ट टाइम ही काम करता था. वो बगल के शहर सहारनपुर में एक टेक्सटाइल मिल में काम करता था. मनोरमा ने अपने विवाह के बाद अपना काम ठीक से संभाला. शीघ्र ही वो हवेली और खेतों की मालकिन बन गयी. खेतों के मामले में उसने सारे काम किये, पर परिवार के मामले में मनोरमा ने और भी ज्यादा काम किये. मनोरमा को पता था की पूरे ठाकुर खानदान में वह एक अकेली औरत है. उसे पता था कि उसके परिवार में चार मर्द हैं जिन्हे उसकी जरूरत है. मनोरमा के जीवन में ये नया चैप्टर था.

उस दिन शाम को, मनोरमा के पति रवि की रात की शिफ्ट थी. वो शाम को ६:०० बजे उसे उसके अधरों पर एक चुम्बन दे कर अपनी मोटरसाइकिल में सवार हो कर अपनी नौकरी को करने टेक्सटाइल मिल चला गया. मनोरमा ने शाम के सारे काम सामान्य तरीके से किये. उसने स्नान किया, टीवी देखा और गुलशन नंदा की नावेल पढने लगी.

शमशेर और उसके दोनों बेटों ने मिल कर बियर पी और टीवी देखा, और उन्होंने मनोरम के जिस्म को अपनी भूखी नज़रों से देखा.
मनोरमा को ये बिलकुल इल्म नहीं था की उसेक ससुर और दोनों देवर उसके बदन को वासना की नज़र से निहार रहे हैं. सारे उसे किसी तरह से शीशे में उतारने की मन ही मन योजना बना रहे थे.

मनोरमा जो इन सब बातों से अनजान थी थोडा जल्दी ही अपने बिस्तर पर चली गयी. उसे पता ही नहीं चला की कब उनकी आँख लग गयी. जवानी न जाने कैसे कैसे स्वप्न दिखाती है…. मनोरमा को जैसे चुदाई का कोई स्वप्न आया.. स्वप्न में उसे उसके गर्म बदन में कोई मादक आनंद की लहरें लगा रहा था…मनोरमा को बड़ा ही आनंद आ रहा था …. उसे लग रहा था मानों कोई गरम और बड़ा सा लंड उसकी चूत में अन्दर बाहर हो रहा हो….

घने अँधेरे कमरे में मनोरमा की नींद टूट गयी. उसने तुरंत महसूस किया की कोई चीज उसके पैरों के बीच में थी जो उसकी चूत चूस रही थी. शीघ्र ही उसने महसूस किया किया की कोई उसे जीभ से चोद रहा है.

उसे लगा कि ये उसका पति रवि है. उसने गहरी साँसों में बीच गुहार लगाईं, "ओह राजा,चूसो मेरी चूत को"

मनोरमा ने अपनी गांड पूरी उठा ली ताकि वो अपनी चूत पूरी तरह से चुसाई के के लिए समर्पित कर सके. उसी समय उसने महसूस किया की चूत चूसने वाले ने अपने दोनों हाथ उसकी जाँघों पर रखे और अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया. उसकी साँसें भारी हो रही थीं. एक ही ठाप में पूरा का पूरा लंड मनोरमा की चूत के अन्दर हो गया.

मनोरमा इस समय तक पूरी तरह से जाग गयी थी. उसे अच्छी तरह से मालूम था की उसे छोड़ने वाला इंसान उसका पति नहीं है. मनोरमा ने शादी के पहले कई लोगों से चुदवाया था. पर जब से शादी की बात हुई थी, उसने अपने पति रवि के प्रति वफादारी का फैसला लिया था. पर इस समय जो भी उसे चोद रहा था, उसकी चूत को पूरी तरह से संतुष्ट कर रहा था. उसकी चूत पूरी तरह से भरी हुई थी. लंड चूत को भकाभाक छोड़ रहा था, चूत पूरी तरह से लंड से भर सी गयी थी. मनोरमा इस बात को पूरी तरह महसूस कर सकती थी की जो लंड उसकी चूत को छोड़ रहा है वो उसके पति से बड़ा है और उसे उसके पति से कहीं ज्यादा वासना से चोद रहा है.

कमरे में इतना घुप्प अँधेरा था की मनोरम को ये बिलकुल समझ नहीं आया की उसकी चूत में जिस इंसान का लुंड इस समय घुसा हुआ है वो है कौन. चुदाई का पूरा आनंद उठाते ही मनोरमा सोच रही थी की ये उसका ससुर हो सकता है या उसके देवरों में से एक. पर इस समय मनोरमा चोदने वाले का चेहरा तो नहीं देख पा रही थी पर केवल उसके हांफने की आवाज ही सुन सकती थी. चुदाई में इतना मज़ा आ रहा था की मनोरमा से ये सोचना की बंद कर दिया की साला छोड़ने वाला है कौन. मनोरम ने अपनी टाँगे चोदने वाले के कन्धों पर रखे और अपनी चूत को ऊपर उठाया ताकि छोड़ने वाले का पूरा लंड अपनी चूत में उतार सके.

चोदने वाले ने भी रफ़्तार पकड़ ली. भकाभक मनोरमा की चूत छोडनी चालू करी.

"हाय मार डाला ….फाड़ दी तूने साले मेरी चूत" , मनोरमा ने हाँफते हुए बोला,

मनोरमा ने अपनी गांड उठा उठा के अपने गुप्त प्रेमी के धक्के स्वीकार किये.

चोदने वाले ने अपना बड़ा सा लौंडा मनोरमा की चूत में भकाभक पेश किया और ऐसा झडा की मनोरमा की चूत से उसका सामान बह बह के निकलने लगा.

मनोरमा बोली, " ओ ओह ..मार ले मेरी .. मैं गयी रे ….मेरी चूत का मक्खन निकला रे ………."

मनोरमा को छोड़ने वाला बड़ा ही महीन कलाकार निकला. उसने अपने झड़ने हुए लंड को मनोरमा की गरम चूत में एकदम अन्दर तक पेल दिया. लंड का रस मनोरमा की चूत के सबसे अन्दर वाले इलाके में जा के जमा हुआ. मनोरमा को इतना घनघोर तरीके से किसी ने नहीं चोदा था. पर वो संतुष्ट एवं परिपूर्ण महसूद कर रही थी.

उसे जो भी चोद रहा था, उसने अपना लंड बिना कुछ कहे मनोरमा की चूत से निकाला. इसके पहले की मनोरमा या किसी को कुछ पता चले वो गायब हो गए.

मनोरमा अपने बिस्तर पर लेती हुई थी, सोच रही थी की उसे इतना "खुश" किसी ने नहीं किया आज तक.

अगले दिन, मनोरमा पूरे दिलो-दिमाग से ये जानने की कोशिश में थी की पिछली रात उसकी चूत को इतनी अच्छी तरह चोदने वाला था कौन. उसे ये तो पता था की वो या तो उसका ससुर था या उसके देवरों में से कोई एक. उसने पूरे दिन अपने ससुर, अनिल और राजेश को पूरी तरह से observe किया. पर तीनों मर्दों ने कतई कोई भी ऐसा हिंट नहीं दिया जिससे मनोरमा को जरा सी भनक पड़े की की गई रात उसे चोदने वाला था कौन.

उस दिन लंच के बाद जब उसके ससुर और देवर खेतों पर चले गये, उसके पति रवि ने उसे नंगा कर के उसे जम के चोदा. मनोरमा एक पतिव्रता नारी के तरह अपनी जांघो और चूत को पूरी तरह से खोल कर लेटी रही, रवि उसे अपनी पूरी सामर्थ्य से चोदता रहा, पर उसका लंड मनोरमा की चूत के लिए छोटा था. रवि अपनी बीवी की चूत में झड गया पर मनोरमा इस चुदाई से असंतुष्ट अपनी चूत को खोल के लेटी हुई थी और सोच रही थी कि रात की चुदाई में और उसके पति की चुदाई में कितना ज्यादा फर्क है.

उस शाम मनोरमा का पति अपनी टेक्सटाइल मिल की नाईट ड्यूटी पर फिर से गया. मनोरमा अपने ससुर और देवरों के बारे में गहन विचार में थी. वो इस बात से कम परेशान थीं की किसने उसे पिछली रात चोदा था. वो इस बात से परेशान थी की इस रात उसकी चुदाई होगी या नहीं.

उस रात मनोरमा जब फिर से सोने गयी, उसने अपने गाउन के नीचे कोई चड्ढी नहीं पहनी थी. क्योंकि वो मन ही मन चुदवाने का प्लान कर रही थी.

थोड़ी ही देर में मनोरमा को उसी तरह से जगाया गया जैसे उसे पिछली रात जागाया गया था. उसकी चूत पर कोई अपनी गीली जीभ लगा कर अपनी पूर लगन एवं श्रद्धा से उसकी चूत का मुख-चोदन कर रहा था. मनोरमा ने अपने पैर उठा लिए, चूसने वाले व्यक्ति का सर पकड़ा और तेजी से अपनी चूत में गडा दिया. चोदने वाले व्यक्ति की जीभ बुरी तरह से मनोरमा की चूत में घुसी हुई थी. जीभ वाला आदमी मनोरमा की चूत का पूरा आनंद ले रहा था, वो अपनी जीभ को मनोरमा की चूत के ऊपर नीचे कर रहा था. मनोरमा की चूत जैम के अपना पानी छोड़ रही थी.

"ओह उम् आह", मनोरमा ने सिसकारी भरी.

मनोरमा ने अपने छोड़ने वाले के लंड को पकडा और उसे सोंटना शुरू कर दिया.

पर इसी बीच इसे चोदने वाला मनोरमा ऊपर आया और अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर लगा के एक ठाप मारी. उसका लंड चूत में आधा घुस गया,

"ये ले मेरा लंड", चोदने वाले ने मनोरमा के कान में फुसफुसाया.

मनोरमा ने तुरंत ये आवाज़ पहचानी. ये तो उसका ससुर शमशेर था.

"ओह शमशेर पापा जी!" वो चुदवाते हुए बोली.

मनोरमा ने अपने हाथ और पैर शमशेर के शरीर पर रख कर चूत उसके लंड पर भकाभक धक्के लगाना चालू किया….

"साली हरामजादी तुझे तेरे ससुर की चुदाई पसंद है…."

शमशेर मनोरम की चूत में बेरहमी से लंड के धक्के लगाते ही बोला.

"हाँ जी ससुर जी… आपका लंड कितना अच्छा है…..मेरी चूत पानी छोड़ रही है ……" मनोरमा बोली.

शमशेर ने अपनी बहु की चूत में अपने लंड के भालाभाक धक्के लगाए.

"तुम्हारा लंड कितना बड़ा है….. फाड़ दो मेरी चूत को…मैं झड रही हूँ . पापा आ…आ …आ … ….." मनोरमा चिल्लाते हुए झड रही थी

"मेरा लंड भी तेरी चूत में पानी छोड़ रहा है ……. मैं झड रहा हूँ", शमशेर झाड़ते हुए बोला.

इस घटना के बाद, मनोरमा ने महसूस किया की इस परिवार में उसका स्थान काफी ऊपर है.

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