कमसिन कलियाँ compleet

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[size=150:2k6fthhl][color=#800080:2k6fthhl]कमसिन कलियाँ-1

प्रस्तावनारात का समय, तेज घनघोर बारिश हो रही है। सुनसान जगह पर स्तिथ एक महलनुमा हवेली से एक के बाद एक गोली चलने की आवाज बिजली कड़कने के शोर में दब के रह गयी थी। उस हवेली के ड्राइंगरूम में पड़ी हुई रक्तरंजित लाश को घूरते हुए जड़वत खड़े हुए लोग। एक लम्बा और चौड़ा दबंग सा दिखने वाला व्यक्ति हाथ में गन थामे नीचे पड़ी हुई लाश को घृणा भरी नजरों से घूरता हुआ जिसे चार मुस्टंडे कस कर पकड़े हुए हैं। एक ओर पड़ी हुई घायल लड़की को अपनी बाँहों में थामे एक नवयुवक जिसकी सिसकियाँ की आवाज कमरे में गूँज रही है। उन्हीं दोनों को घेरे हुए एक छोटी बच्ची और एक नवयौवना गोदी मे बच्ची को लिए घायल लड़की को घूरती है…।

घायल लड़की अपनी उखड़ी हुई आवाज में बोलती है… मै तुम पर अपनी दीदी और उनकी बच्चियों की जिम्मेदारी डाल रही हूँ प्लीज उनका ख्याल रखना। युवक पास खड़ी हुई छोटी बच्ची के हाथ को थाम कर सिसकते हुए हामी भरता है।

तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे… मगर मै तुम्हें भूलने नहीं दूँगी क्योंकि मै वापिस आऊँगी… कहते हुए घायल पड़ी लड़की एक आखिरी हिचकी लेकर हमेशा के लिए शान्त हो जाती है।

नवयुवक उस लड़की से लिपट कर रोता है। पास खड़ी नवयुवती उसे सांत्वना देती हुई उसका ध्यान सामने पड़ी हुई दूसरी लाश की ओर खींचती है। नवयुवक की नजर पड़ते ही उसके मुख से चीख निकल जाती है… पिताजी…। उठ कर कहते हुए सामने पड़ी हुई लाश से लिपट कर बिलख-बिलख कर रोने लगता है। कुछ देर के बाद अपने आप को शान्त करते हुए कहता है… ठाकुर तूने अपनी झूठी शान के लिए मेरी पत्नी और मेरे पिता को मार दिया… मै कसम खाता हूँ कि तेरे जीतेजी मै तेरी हर एक बेटी को अपनी हमबिस्तर बनाऊँगा अब तू रोक सके तो रोक लेना… साले हवस के पुजारी… तूने मेरा घर बर्बाद कर दिया अब तू अपनी बर्बादी का मंजर देख…

नवयुवती गोदी मे बच्ची लिए उस दबंग से दिखने वाले व्यक्ति की ओर बढ़ती है और गुस्से में बिफरती हुई… पिताजी आज से मै और मेरी बच्चियाँ आप के लिए हमेशा के लिए मर गयी है… मै जा रही हूँ… कहते हुए नवयुवक का हाथ थाम कर चली जाती है।

मेरा नाम राजेश है, मेरी उम्र 38, अपना व्य्वासय है। मेरे परिवार और नजदीकी दोस्तों बहुत गिने चुने है। प्लीज एक बार सब से मिल लिजिए।

1) मुमताज- मेरी पत्नी- 35 वर्षीय, गुदाज-भरीपूरी देह, मोहिनी मूरत, भारी वक्ष और गोल नितंब, नयन नक्श एक दम तीखे

2) लीना- मेरी पुत्री- 16 वर्षीय, माँ की तरह तीखे नयन नक्श, मोहिनी मूरत, उभरता योवन, कोमल देह

3) टीना- मेरी पुत्री- 13 वर्षीय, चंचल, माँ का प्रंतिरुप

4) एलन: मेरा मित्र- 40 वर्षीय, साँवला रंग, कसरती जिस्म, लम्बा कद, मिलनसार, अच्छे खासे व्यक्तित्व का मालिक, फिटनेस सेन्टर का मालिक

5) डौली: एलन की पत्नी- 32 वर्षीय, छरहरा बदन, गुदाज, भारी वक्ष और नितंब एवं tतीखे नयन नक्श

7) स्वीटी: एलन और डौली की पुत्री- 14 वर्षीय, सुन्दर नयन नक्श, मोहिनी मूरत, चंचल, माँ का प्रंतिरुप

8) करीना: टीना की सहेली- 13 वर्षीय, तीखे नयन नक्श, गेहुआँ रंग, छरहरा बदन, गुदाज, भारी वक्ष और नितंब, चंचल

सीन-1

(शाम का समय: बीयर बार, राजेश अपने दोस्त एलन और उसकी पत्नी डौली के साथ गपश्प करता हुआ।)

राजेश: बहुत दिनों के बाद दिखे, क्या हाल है।

एलन: कुछ खास बात नहीं। कुछ घरेलू कार्य की वजह से निकलना नहीं हुआ।

राजेश: और डौली तुम कहाँ गायब हो गयी थी। अगर एलन नहीं है, तुम तो अपना समय हमारे साथ गुजार सकती हो? बहुत दिन हो गये तुम्हारे साथ रात बिताये हुए।

डौली: नहीं, एसी कोई बात नहीं। आपके दोस्त की मदद कर रही थी। एक साल से पीछे पड़े थे कि स्वीटी तेरह सावन पार कर गयी हे, अभी भी बच्ची बनी हुई है, कब बड़ी होगी?

राजेश: यार, तुम दोनों की मदद चाहिये। अगर कामयाब हो गया, तो जन्न्त, वरना निश्चित तलाक।

एलन: लगता हे कि अब गाड़ी लाईन पर आ गयी। लीना या टीना? आखिर दोनों अपनी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी है। यार तूने अपनी बच्चियो को प्यार के सुख से वन्चित रखा है। अगर किसी स्कूली भँवरे को उनकी मह्क लग गयी, तो बहुत पछ्ताएगा।

राजेश: तू सही कह रहा है। पर तू मुमु को जानता है, वह डौली की तरह खुले विचारों की नहीं है। सेक्स के मामले में बहुत दकियानूसी है।

(एलन दंपति एक दूसरे की तरफ मुस्कुरा कर देखते है)

राजेश: मुझे एक कातिल आइडिया आया है, जो तुम्हारी मदद के बिना पूरा नहीं हो सकता।

(तीनो नजदीक आकर खुसर-पुसर करते है। अचानक राजेश और डौली खिलखिला कर हँसते है और डौली एलन को चूम लेती है)

सीन-2

(राजेश के घर के ड्राइंगरूम का सीन)

(राजेश सोफे पर लेट कर टीवी देख रहा है, मुमु नजदीक बैठी हुई है। राजेश बार-2 अपना हाथ मुमु के सीने की तरफ बढ़ाता है पर मुमु उसके हाथ को झट्क देती है। टीना का आगमन।)

(अभी-2 टीना सो कर उठी है। छोटी सी महीन टी-शर्ट मे से छोटे-छोटे नांरगी जैसे पुष्ट सीने के उभार साफ दिखते हुए, और घुटने से भी एक फुट उपर मिनि सर्क्ट जो बामुश्किल जांघो को छुपाने की नाकाम कोशिश करती हुई। आकर राजेश के उपर गिर कर लिपट जाती है।)

टीना: मम्मी, मुझे दीदी की याद आ रही है।

(राजेश अपने हाथ प्यार से धीरे-धीरे टीना की पीठ पर फिराते हुए उसे अपनी ओर खीचता है। टीना की अर्धविकसित उरोज, राजेश की बालिष्ट छाती से जा टकराते है। राजेश का हाथ नीचे की ओर चला जाता है और टीना के नग्न जांघों पर आ टिकता है। मुमु इन सब से बेखबर, टीवी देखने मे मस्त।)

टीना: (थोड़ा कसमसाते हुए) मम्मी तुम सुन नहीं रहीं।

(राजेश थोड़ा मस्ती में टीना की नग्न जांघ पर अपना हाथ फिराते हुए, नीचे से अपने खड़े होते लिंग का दबाव बढ़ाता है। कोई चीज अपनी जांघ के निचले हिस्से में गड़ती हुई मह्सूस करती हुए, टीना फिर से एक बार कसमसाती है।)

मुमु: एक महीने कि तो बात है। अपनी क्लास के साथ छुट्टियां मनाने कशमीर गयी है, कोई फोरन तो नहीं गयी है।

टीना: (थोड़ा कसमसाते हुए) पापा, मुझे छोड़ो।

राजेश: (अपने तन्नाए हुए लिंग का दबाव बढ़ाते हुए और नग्न जांघ पर अपना हाथ फिराते हुए) न मेरा प्यारा बेटा, लीना जल्दी वपिस आएगी। तेरी मम्मी को तो टीवी देखने से फुरसत मिले तो वह तेरे बारे में सोचे कि तू अपनी छुट्टियाँ कैसे बिताए।

मुमु: तुम तो रहने दो। टीना ह्ट वहां से, अब तू छोटी बच्ची नहीं रही। कोई देखेगा तो क्या कहेगा।

टीना: (थोड़ा इठलाते हुए) क्यों पापा, क्या मैं बच्ची नहीं रही, अब मैं जवान हो गयी हुं ।

राजेश: (अपने लिंग को धीरे से घिसते और दबाव बढ़ाते हुए) न मेरा प्यारा बेटा, तू तो अभी मेरी छोटीसी गुड़िया है। तेरी मम्मी के दिमाग का तो भगवान ही मालिक है। (टीना के गाल को चूमते हुए) तुझे नहीं लगता, तेरी मम्मी अक्ल और शरीर से मोटी होती जा रही है?

मुमु: (आंख तरेरते हुए) तुम रहने दो। तुमको इतने दिनों से कह रहीं हुं कि मेरा वजन बढ़ता जा रहा है, कोई फिट्नेस सेन्टर के बारे मे पता लगाओ। पर तुम हो कि कुछ भी नहीं करते।

टीना: (अपने को राजेश की बाहो से छुड़ाते हुए) मम्मी, यह ठीक रहेगा। मैं और आप, दोनों एक ही फिट्नेस सेन्टर जौइन कर लेते है क्योंकि मुझे भी अपना फ़िगर और वजन ठीक रखना है। मेरी छुट्टियाँ भी अच्छी तरह से इस्तेमाल हो जाएगी।

राजेश: (टीना को अपनी ओर खींचते हुए) मैनें तुम्हारे बारे मैं एलन और डौली से बात की है, उनका कहना है कि पहले तुम एक बार उनके फिट्नेस सेन्टर पर आओ और देखो, फिर वह दोनों तुमसे बात करने घर पर आएगें।

मुमु: उनको तो रहने दो, मैनें उनके बारे मे बहुत सुन रखा है। दोनों बहुत लम्पट किस्म के है।

राजेश: (टीना की नग्न जांघ पर अपना हाथ फिराते हुए, नीचे से अपने खड़े हुए लिंग को घिसते हुए) तुम पता नहीं घर मे बैठ कर कहाँ से उल्टी-सीधी बातें सुन लेती हो। उनका फिट्नेस सेन्टर शहर का सबसे बड़ा और एक्स्क्लुसिव सेन्टर है। हर कोई उसका मेम्बर नहीं बन सकता।

टीना: (फिर से एक बार कसमसाती है, हिलने से उसके अर्धविकसित उरोज राजेश की छाती पर घिसाव करते है जिस से उसकी छोटी-छोटी घुन्डियां खड़ी होने लगती है। लाल-लाल डोरे मासूम आँखों में तैरने लगते है। अजीब सी कश्मकश मासूम टीना को अपने शरीर में महसूस होने लगी थी। छातियों की घुन्डियों से करन्ट उत्पन्न हो कर पुरे शरीर में फैल रहा था और सीधे नीचे जाकर योनिद्वार पर दस्तक दे रहा था। उधर राजेश के हाथ और लिंग के जैसे अपने दिमाग थे, कि हाथ का निशाना टीना की नग्न जांघों पर था और खड़ा हुआ लिंग कपड़ों से ढंकी योनिद्वार पर बार-बार ठोकर मार रहा था) (हल्की सी कपकंपायीं आवाज मे) मम्मी अ…हं..ह्ह…..लन अंकल का फिट्नेस सेन्टर बहुत मशहूर है। मेरी कुछ फ्रेंड्स के पेरन्ट्स मेम्बरशिप पाने के लिये बहुत दिनों से कोशिश कर रहे है पर उन्हें अभी तक नहीं मिला है .अंह..अंह..ह.ह..(अचानक बार-बार घर्षण और ठोकर से टीना की योनिद्वार के मुख से गर्म लावा बह निकला, वह राजेश से कस के लिपट गयी)

मुमु: अरे इसे क्या हुआ?

राजेश: (अपने तन्नाए हुए लिंग को और भीषणता से घिसते हुए, टीना को अपनी बाँहों मे भींचते हुए) कुछ नहीं, बस जरा कस के पकड़ लिया तो बेचारी की साँस घुट कर रह गयी। तुम बताओ कि क्या सोचा? (इस बीच टीना ने जबरदस्ती अपने को राजेश की बाँहों से मुक्त किया और बाथरुम की ओर भाग गयी। आखिरी कश्मकश मे राजेश के लिंग ने भी उफनता हुआ लावा हल्का सा छ्लका दिया, इस से पहले मुमु देखे जल्दी से राजेश ने पाजामा ठीक-ठाक किया) …. अं.ह… मेरा ख्याल है कि एक बार तुम जा कर देख लो, अगर अच्छा लगे तो करना अन्यथा कुछ और सोचेंगे।

मुमु: लेकिन जो बाते मैनें सुनी है, मै टीना को उधर ले जाना ठीक नही समझती क्योंकि मैनें सुना है कि उधर बहुत अश्लील पहनावे मे जवान युवक-युवतियां योग एवं क्रीड़ा में मग्न होते है।

…(दरवाजे के पीछे से टीना ने सब सुन लिया और पैर पट्कती हुई आती है और मुमु से लड़ती है)

टीना: (रुआंसी हो कर) मम्मी तुम हमेशा ऐसे ही करती हो। तुम्हारी दकियानूसी बातें हमे अच्छी नहीं लगती। तुम लीना दीदी को भी टूर पर जाने से मना कर रही थी। अगर पापा जिद्द नहीं करते तो लीना दीदी भी आज शायद यहीं पर बैठ कर बोर हो रही होती।

राजेश: (जरा कठोरता से) टीना बेटा, तुम्हें अपनी मम्मी से ऐसे बात नहीं करनी चाहिये। वह हमेशा तुम्हारी भलाई की सोचती है। अगर वह सोचती है कि फिट्नेस सेन्टर में तुम्हारा जाना अच्छा नहीं है तो तुम्हें जिद्द नहीं करनी चाहिये। तुम्हें अपनी मम्मी से माफ़ी माँगनी चाहिये।

(राजेश को मुमु की तरफदारी करते हुए देख कर, टीना झेंप जाती है और रोते हुए अपने कमरे मे चली जाती है।)

राजेश: मुमु, टीना नाराज हो गयी। अब कई दिनों तक मुँह फुला के बैठी रहेगी। बेचारी की सारी छुट्टियाँ बरबाद हो जायेंगी।

मुमु: लेकिन उसकी हर जिद्द तो पूरी नहीं की जा सकती। और वैसे भी मैं उसके खुले विचारों से पहिले से ही काफी चिन्तित हूँ।

राजेश: तुम चिन्ता मत करो, मैं उसे मनाने की कोशिश करुँगा। पर तुम अब अपनी सेहत के बारे मे सोचो, एलन का फिटनेस प्रोग्राम बहुत लाभदायक है। मैंने कई लोगों से इसके बारे मे सुना है।

मुमु: तुम जा कर टीना को मनाओ, वर्ना आज वह पूरे दिन मातमी चेहरा बना कर बैठी रहेगी।

राजेश: हाँ, मैं उसके पास जाता हुं।

मुमु: मैं थोड़ी देर के लिये बेला के घर जा रही हुं, उसकी बेटी और दामाद आए हुए है। तुम दरवाजा बंद कर लो क्योंकि तुम उपर टीना के पास बैठने जा रहे हो। मैं आकर घंटी बजा दूँगी।

(मुमु घर से जाती है, राजेश दरवाजे को लाक करके टीना के पास जाता है।)

सीन-3 (टीना का बेडरूम)

(राजेश धीरे से टीना के दरवाजे पर दस्तक देता है।)

राजेश: बेटा टीना, क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ ?

(कोई जवाब न पा कर, राजेश धीरे से दरवाजे को अन्दर की ओर ढ्केलता है और बेडरूम मे दाखिल हो जाता है। टीना उन्हीं वस्त्रों मे अपने बिस्तर पर ओंधे मुँह लेटी हुई सुबक रही है। मिनी-स्कर्ट कुछ उपर खिसक जाने से उसकी मासंल जांघे और आधे अधूरे गोल-गोल नितंब सर्वविदित होते हुए। पीठ पर से टी-शर्ट भी कुछ उपर खिसक गयी है।)

राजेश: बेटा, मुझसे बात भी नहीं करोगी? क्या बहुत नाराज़ हो?

(यह सब बोलते हुए, राजेश बेड के पास आ कर खड़ा हो जाता है। टीना हल्के से कुनमुनाती है पर कुछ नहीं बोलती है। राजेश धीरे से उसके साथ ही बेड पर लेट जाता है। और धीरे से उसे पलट कर सीधा कर देता है। रोता हुआ चेहरा लाल हो गया है, यह देख कर झट से टीना के गाल चूम लेता है और उसे अपनी ओर खींच लेता है।)

टीना: मैं आपसे नहीं बोल रहीं।

राजेश: क्यों नहीं बोल रहीं? बेटा, क्या मुझसे कोई गल्ती हो गयी? लड़ाई तुम माँ-बेटी करती हो और अपनी नाराजगी मुझ गरीब पर उतारती हो।

(यह सब बात करते हुए, राजेश जबरदस्ती टीना को अपने उपर घसीट लेता है। इस खीचाँतानी मे टीना का दायाँ ऊरोज उघड़ गया, गोरे स्तन पर एक गुलाबी घुंडी के दर्शन मात्र से राजेश के रोंगटे खड़े हो गये। अर्धविकसित बायाँ उरोज, राजेश की बालिष्ट छाती से दब गया। इन सब से अनिभिज्ञ, मासूम टीना मचलती हुई राजेश की गिरफ्त से निकलने की पुरजोर कोशिश करते हुए उसके और चिपक जाती है। राजेश का हाथ नीचे की ओर चला जाता है और टीना के नग्न नितंबों पर आकर ठहर जाता है। अब वही पहिले जैसी स्थिति मे दोनों आ जाते है। टीना को पकड़े हुए राजेश करवट बदलता है और उसे अपने नीचे दबा लेता है। अपने तन्नाए हुए लिंग का दबाव बढ़ाते हुए और टीना के गालों को लगातार चूमता हुआ गिड़गिड़ाता है।)

राजेश: न मेरा प्यारा बेटा, इतनी नाराज़गी अच्छी नहीं। (चूमते हुए……..) क्या मैने तुम्हारी कोई इच्छा को आज तक मना किया है?

(सिल्क पाजामे मे से राजेश का तन्नाया हुआ लिंग टीना की जांघों के बीचोंबीच आ टिकता है। फिर से एक बार टीना कसमसाती है, हिलने से उसकी अर्धविकसित छोटी-छोटी घुन्डियां रगड़ खा कर खड़ी होने लगती है। राजेश अपनी बालिष्ट छाती से टीना के स्तनों को पीस देता है। टीना की मासूम आँखों में एक बार फिर से लाल-लाल डोरे तैरने लगते है। अजीब बैचैनी और कश्मकश में मासूम टीना अपनी आँखे मूंद लेती है। छातियों की घुन्डियों मे से करन्ट फिर से प्रावाहित होना शुरु कर देता है। नीचे लिंगदेव कठोरता धारण कर योनिद्वार पर बार-बार ठोकर मारना शुरु कर देते है।

राजेश: क्या हुआ, टीना की मुआफी नहीं मिलेगी। मुझसे बात नहीं करोगी।

टीना: (नशीली आवाज में) आपने मम्मी की साइड क्यों ली? आप लीना दीदी को ज्यादा प्यार करते हो, मुझे नहीं। जाओ मैं आपसे बात नहीं करती।

(अब राजेश के हाथ भी हरकत मे आ गये और नीचे की ओर सरकते हुए टीना के नग्न नितम्बों पर जा कर ठहर गये। कुछ ढूँढते हुए और हल्के-2 हाथ से सहलाते हुए कुछ दबाते हुए इधर-उधर बेटोक विचरने लगे। अचानक, राजेश को विदित हुआ कि टीना नीचे से बिलकुल नग्न अवस्था में लेटी हुई है और उसके लिंग और योनिमुख के बीच मे बस एक रेशम की दीवार है। अपनी भुजाओं मे कस कर, राजेश धीरे से टीना का बायां पाँव उपर उठा कर अपने लिंग को ढकेलता है। एक हल्की सिसकारी के साथ टीना कस के राजेश को चिपट जाती है।)

राजेश: नहीं बेटा, घर मे मुझे सबसे ज्यादा प्रिय कोई है तो वह तुम और लीना हो और कोई नहीं। अगर मै उस समय तुम्हारा साथ देता तो तेरी मम्मी कभी भी फिट्नेस सेन्टर जाने के लिये सहमति नहीं देती। (बात करते हुए, राजेश अपने तन्नाए हुए लिंग को भीषणता से ठेलता है। जोर-जबरदस्ती के आलम मे रेशम से ढके लिंगदेव का अग्र भाग अछूती योनिमुख के कपाट थोड़ा सा खोलने मे सफल हो जाता है।)

टीना: पा .उई….प.आ… पा, मै भी अपने वजन को कम करना चाहती हूँ। मै भी मम्मी की तरह अपनी फिगर को मेन्टेन करना चाहती हूँ। आगे चलके मेरा भी मम्मी जैसा हाल न हो जाए इसलिए मै फिट्नेस सेन्टर जाना चाहती हूँ.उ.उ.उ…आह……

(राजेश बार-बार टीना के गालों को चूमता, नीचे से अपने लिंग को धीरे से ठेलता हुआ अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ता जा रहा है। बार-बार नितम्बों पर दबाव, लगातार घर्षण और ठोकर से टीना की योनिद्वार के मुख से गर्म लावा बह निकलता है, टीना बदहवासी मे राजेश से कस कर लिपट जाती है। राजेश के लिंगदेव ने भी गुस्से से लावा उगलना शुरु कर दिया। राजेश ने वक्त़ की नजाकत को समझते हुए टीना को पुचकारना शुरु किया।)

राजेश: टीना ..टीना..क्या हुआ। (पिण्डलियों मे से हाथ निकाल कर, टीना को हिलाते हुए).. टीना..क्या हुआ।

टीना: (झेंप कर) कुछ.. नहीं।

राजेश: क्या हुआ बताओ। मुझे फिकर हो रही है। तुम बोल क्यों नहीं रहीं?

(सब तूफान शांत हो गया था। राजेश धीरे से टीना के उपर से सरक कर उसकी ओर मुख करके लेट जाता है। पाजामे के सामने का हिस्सा दोनों के प्रेमरस के मिश्रण की गाथा से सरोबर हो रहा था।)

राजेश: (टीना को अपनी छाती से लगाते और दिखाते हुए) अररे…यह क्या हुआ? क्या यहां पानी पड़ा था? सारा पाजामा गीला हो गया।

(उघड़ा हुआ अपना दायाँ ऊरोज को देख कर टीना जल्दी से टी-शर्ट नीचे खींचती है। अपनी झेंप मिटाने के लिये, झुकी हुई आँखें लिये राजेश के सीने से लग जाती है।)

टीना: (रुआँसी आवाज में) पापा, पता नहीं मुझे क्या हो गया है। जब भी आप मुझे प्यार से लिपटाते हो, मुझे न जाने क्या हो जाता है। मेरे पूरे शरीर में और पेट में अजीब सी हलचल मच जाती है और अचानक ऐसा लगता है कि मेरा पेशाब निकल जायगा। (और यह कर रोने लगती है)

राजेश: न बेटा, न रो। मेरा पजामा तेरे पेशाब से नहीं भीगा है। (टीना को पुचकारता हुआ) अब तू जवान हो गयी है। जब तुझे बहुत प्यार आता है तो तेरे शरीर में से एक तरह के टाक्सिन बनने लगते है और जब तू बहुत एक्साईटिड हो जाती है तो सारे टाक्सिन बाहर निकल जाते हैं।

(टीना ढ्बढबाई आँखों से चुपचाप राजेश के सीने से लग कर सारी बात सुनती है। राजेश भी आत्मग्लानि मे डुबा हुआ मासूम टीना को प्यार से समझाता है।)

राजेश: बेटा, जैसे तुम्हारी माहवारी होती है। वैसे ही तुम्हारे जवान होने पर यह टाक्सिन बनने और निकलना शुरु हो जाते है। यही हाल लड़कों के साथ भी होता है। मेरे को भी जब तुम पर बहुत प्यार आता है, मेरे शरीर से भी टाक्सिन निकल जाते है। खैर, तुम इसकी चिन्ता न करो। मुँह-हाथ धो कर फ्रेश हो जाओ। हम दोनों नीचे ड्राइंगरूम में बैठ कर फिट्नेस सेन्टर की पहेली सुलझाते है।

(राजेश उसके गाल थपथपाता है और टीना के कमरे से बाहिर निकल जाता है।)

क्रमशः

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