Re: महँगी चूत सस्ता पानी

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[size=150:187y1zvx][color=#8000BF:187y1zvx]महँगी चूत सस्ता पानी–7

गतान्क से आगे…………………………….

हम दोनों एक दूसरे को बार बार चिपकते , गाल चूमते …होंठ चूमते ..एक दूसरे के पैरों से पैर मिला जाकड़ लेते ..मानों कभी अलग नहीं होना चाहते ….

दीदी सिसकते सिसकते कहती जातीं " हां रे शादी के बाद मेरा सब कुछ तेरे जीजा जी का होगा ..पर मेरा मन तो तेरा ही रहेगा ना किशू ..बिल्कुल तेरा ……हमेशा ..सारी जिंदगी …..तू ही तो मेरा सब कुछ है …मेरी जिंदगी है रे…"

और फिर दीदी ने झट अपनी ब्लाउस और ब्रा उतार दी , मेरे सर अपने हाथों से थामते हुए अपने सीने से चिपका लिया ..मेरा चेहरा उनकी गुदाज , कड़ी पर फिर भी मुलायम चूचियों में धँस गया ……

अपनी चूची अपने हाथ से थामते हुए उसे मेरे मुँह में डाल दिया "ले ..मेला बच्चा ..पी …देख कितनी गर्मी है तेरे लिए मेरे अंदर ….."

मैने भी अपना मुँह खोलते हुए होंतों के बीच उनकी चूची थामते हुए बूरी तरह चूसने लगा ……" हां दीदी बहुत गर्मी है यहाँ ..लग रहा है जैसे तुम मेरे अंदर आती जा रही हो ….." और सही में मुझे ऐसा महसूस हुआ उनकी चूची नहीं मैं उनकी जान , उनके दिल की धड़कन ..उनका पूरा अस्तित्व सब कूछ अपने अंदर समाए जा रहा हूँ …..एक अद्भुत अनुभव था …

मैं लगातार चूसे जा रहा था …चूसे जा रहा था , पूरे कमरे में चप चप की आवाज़ आ रही थी ..

" हां रे किशू बस चूस ..चूस ..मुझे पूरा चूस ले , निचोड़ ले ..भर ले अपने अंदर ….."

फिर उन्होने अपनी दूसरी चूची भी मेरे मुँह में लगा दी ……उफफफफफफफ्फ़ हम दोनों जैसे एक दूसरे के लिए पागल थे ..

इसी दौरान पता नहीं कब और कैसे दीदी ने अपनी साड़ी और पेटिकोट भी उतार दी थी और मेरे पॅंट के बटन भी खोल रही थी ..एक झटके में ही उन्होने मुझे भी नंगा कर दिया और मुझे अपने उपर करते हुए चिपका लिया बूरी तरह …….

हम दोनों के बीच अब हवा भी नहीं जा सकती ….उन्होने अपनी टाँगें भी मेरे जांघों पर रखते हुए वहाँ भी जाकड़ लिया ..मेरा कड़ा लंड उनकी चूत की दीवारों में रगड़ खा रहा था …..

एक एक अंग एक दूसरे से चिपका एक दूसरे को महसूस कर रहा था …एक दूसरे को अपने में समा रहा था ……

अब दीदी ने मेरा चेहरा अपनी हाथों से थाम लिया …..अपनी जीभ मेरे मुँह के अंदर डाल दी और मुझ से कहा

" ले ले ……किशू ..तू ने छाती का रस तो पी लिया ना ..अब ले मेरे मुँह का रस भी ले ले ……चूस मेरी जीभ ..अच्छे से चूसना ..मेरा पूरा लार ..मेरा पूरा थूक ….सब कूछ ले ले ..कुछ मत छोड़ना ..है ना …..??"

"हां दीदी ..आज मैं आप का सब कुछ अंदर ले लूँगा …सब कुछ …आख़िर ये सब तो मेरा ही है ना दीदी ……"

और दीदी की जीभ चूसने लगा … दीदी अपनी जीभ गीली करती जातीं और मैं चूस्ता जाता …उफफफफफफफफफ्फ़ मैं मस्ती में था ..उनके लार का स्वाद अमृत जैसा था ..मैं पिता जा रहा था ..चूस्ता रहा था ……मैने अपनी जीभ भी उनके गालों के अंदर , उनके तालू , उनके कंठ तक ले जाता और चाट ता जाता ..हम एक दूसरे की हर चीज़ अपने अंदर ले रहे थे..

"हां हाआँ किशू …चाट ले …चाट ले ……अच्छा लग रहा है ना ..??? "

"हां दीदी बहुत अच्छा लग रहा है …."

फिर दीदी ने अपना हाथ मेरे कड़क लंड पर ले गयीं ……उसे जाकड़ लिया ..उनकी चूत से तो बस लगातार पानी रिस रहा था ..अपनी गीली ऊट में अपने हाथों से मेरा लंड घिस रही थी …… उनका चूतड़ उछल रहे थे …..अंग अंग कांप रहा था ..सिहर रहा था ..

मस्ती में वो कुछ भी बोले जा रही थी ..मैं भी आनंद और मस्ती में सराबोर था ……

मैं लगातार उनके मुँह के अंदर चाट रहा था उनकी जीभ चूस रहा था …फिर मैने महसूस किया मेरा लंड उनके चूत की रस से बूरी तरह भीग गया था …..पूरी तरह गीला था …..

" दीदी ….आपकी चूत चाटने का मन कर रहा है ..देखिए ना कितना गीला है ..उसका रस भी अंदर लेना है.."

" अरे तो रोका किस ने है किशू ..??"

और उन्होने अपनी टाँगें फैला दी और अपनी उंगलियों से अपनी चूत की फांके भी चौड़ी कर दी

" आ जा ..मेला बच्चा …..चूस …जो जी में आए चाट ले ..जहाँ जी में आए चूस ले ….ले एयेए "

मैं अपनी जीभ उनकी चूत में ले जाते हुए उनकी खूली , गुलाबी फांकों के अंदर डाल दी और लपा लॅप..सटा सॅट चाटने लगा …… पूरी गीली चूत का रस अब मेरे मुँह के अंदर जा रहा था …..दीदी ने भी अपने चूतड़ को उपर कर लिया था और मेरे सर को थामते हुए चूत में धंसा लिया था..

मैं कभी चूस्ता , कभी चाट ता कभी अपने होंठों से उनकी चूत की पंखुड़ीयाँ दबा लेता ….

" हां ..हां किशू ..तू अब काफ़ी कुछ सीख गया है …..बस ऐसे ही करता रह …उफफफफफफ्फ़ ….तू सही में मेरी जिंदगी है रे ….सही में …देख ना तेरे जीजा मुझे चोद के भी इतना मज़ा नहीं दे सकते ..जितना तू सिर्फ़ चूस चूस के दे रहा है ….है….उूउउइईई माआआं …..आआआआः ….हां …"

उनके मुँह से चोद्ना शब्द सुन ते मेरा लॉडा एक दम से फॅन फ़ना उठा ..और मैं काफ़ी उत्तेजित हो गया , मेरे उनकी चूत को चाटने की स्पीड बढ़ गयी ….

दीदी चूतड़ उछाल रही थी ….मेरे सर को जकड़ी थी अपनी टाँगें मेरी पीठ पर रखे मुझे अपनी ओर खींच रही थी …..मेरे में समान जाना चाह रही थी ….. सिसकारियाँ और आहों से कमरा गूँज रहा था ……

और फिर " हाइईइ रीईईईईई…..उफफफफफफफफफफफफ्फ़ किशुउऊुुुुुुुुुुुुुुुुउउ ले ले मेरी पूरी चूत ले ले ……आआआआआआआआआअ…." और जोरों से चूतड़ उछलते हुए एक जोरदार रस की फुहार मेरे मुँह पर छोड़ दिया उन्होने …दो तीन जोरदार उछाल मारी उनकी चूतड़ ने , मेरा पूरा मुँह उनके रस से भर गया , और वह शांत हो कर पड़ गयीं ….

मेरा लंड पूरी तरह आकड़ा था ….

मैं हाथ चला रहा था , दीदी ने देखा …वो झट से उठीं और मेरे लौडे को अपने हाथों में ले लिया ..उनकी गरम गरम हथेलियों के छूने से मेरा लॉडा और भी अकड़ गया …लॉडा हाथ में थामे पहले उन्होने जीभ चलाते हुए मेरे मुँह में लगे अपनी चूत रस को चाटा और फिर मेरे लौडे को मुँह में डालते हुए कहा " वाह रे मेरा रस तो तू पी गया …और अपना रस ऐसे ही हाथ से बाहर गिराएगा और वो भी मेरे सामने ……..?????"

और उन्होने अपने होंठों से जकड़ते हुए बूरी तरह मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया …अपने हाथ से सहलाती भी जातीं …….मैं तो वैसे ही काफ़ी एग्ज़ाइटेड था ..और दीदी के होंठ और जीभ के कमाल के सामने टिक नहीं पाया …और मैने भी अपनी पिचकारी उनके मुँह मेी छ्चोड़ दी …….

उनका पूरा मुँह भर गया …उन्होने एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी ..पूरे का पूरा गटक गयीं ..और जो भी मेरे लंड में लगा था ..जीभ से सॉफ कर दी ….[/color:187y1zvx][/size:187y1zvx]

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