मेरी पाठिका की चूत चुदाई

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बात कुछ महीने पहले की है। मैं अपना मेल बॉक्स चैक कर रहा था.. उसमें मैंने अपनी पिछली कहानी से रिलेटेड एक मेल देखा.. और आदत के मुताबिक मैंने उस मेल का रिप्लाई दिया।
कुछ दिन बाद फिर से उसका मेल आया, उसने मेरी कहानी देर से पढ़ने के लिए सॉरी कहा और मेल का रिप्लाइ देने के लिए शुक्रिया भी किया।
मैंने उसके बारे में पूछा.. तो उसने अपना नाम बेला बताया।

इसी तरह हमारी मेल पर ही बातें होने लगीं।
मैं उससे कभी डबल मीनिंग बातें लिख देता.. तो वो भी मुझे भी डबल मीनिंग में रिप्लाई करती थी। हमारी बातें सिर्फ़ मेल पर ही होती थीं। मैंने उसका मोबाइल नंबर माँगा.. तो उसने नहीं दिया।

ऐसे ही कुछ दिन बीतने के बाद एक मेल में उसने मुझे मिलने की बात कही। मैंने कहा- क्या सच में तुम मुझसे मिलना चाहती हो.. मज़ाक तो नहीं कर रही हो?
उसने कहा- नहीं.. मैं सच में तुमसे मिलना चाहती हूँ।

मैंने उसको अपने बारे में बताया.. तो उसने कहा- मुझे पता है.. मैंने तुम्हारी कहानियाँ पढ़ी हैं.. जिसमें तुमने अपने बारे में पहले ही बताया हुआ है।
मैंने पूछा- तुमको मुझसे क्यों मिलना है?
उसने कहा- मिलकर बताऊँगी।
मैंने उससे पूछा- ठीक है ये बताओ कि कहाँ मिलना है?

मुझे उसने सिर्फ़ अपना नाम बताया था और मैं ये भी नहीं जानता था कि वो कौन से शहर में रहती है।
उसने कहा- मैं भी नागपुर की ही रहने वाली हूँ और रविवार को नागपुर के कपल के लिए फेमस गार्डन (नाम भी बताया) में मुझसे मिलना चाहूँगी।

मैंने उससे पूछा- तुम नागपुर में रहती हो.. ये बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई?
तब उसने कहा- मैंने इसलिए नहीं बताया कि शायद मैं तुम्हें बताती तो तुम उसी वक्त मुझसे मिलने की फरमाइश करते।
मैंने उससे कहा- ऐसी कोई बात नहीं है।
पर बात तो उसकी भी सही थी।

मैंने उससे पूछा- मेरे पास तो तुम्हारा मोबाइल नंबर नहीं है.. तो मैं तुमको पहचानूँगा कैसे?
उसने कहा- मैं गुलाबी रंग का सलवार कुर्ता पहन कर आऊँगी।

उसने मुझे भी सफेद शर्ट और ब्लू जींस पहनकर आने को कहा। रविवार को मैं ठीक एक बजे अपने तय हुई जगह पर पहुँच गया और गार्डन के गेट पर टिकट लेकर इंतजार कर रहा था।

वहाँ पर सिर्फ़ कपल आ रहे थे.. कोई भी लड़की अकेले नहीं थी। उसने कहा था कि वो अकेली ही आएगी।
कुछ देर इंतजार करने के बाद मन में ख्याल आने लगे कि कहीं कोई मुझे बेवकूफ़ तो नहीं बना रहा है।

लगभग आधे घंटे बाद एक लड़की स्कूटी पर अकेली आई, उसने पिंक कलर का सूट पहना हुआ था, अपना पूरा मुँह दुपट्टे से ढका हुआ था। हाथ में ग्लव्ज़.. आँखों पर गॉगल पहनकर आई थी।

मुझे लगा कि शायद ये वही है। अब मन में जो हलचल चल रही थी.. वो शांत हो गई थी।

तब तक वो गाड़ी पार्क करके एंट्री गेट की तरफ आ रही थी। उसने मुझे देखा पर वो पहले टिकट लेने के लिए टिकट काउंटर की तरफ मुड़ी तो मैंने खुद वहाँ जाकर पहले उसको ‘हैलो..’ कहा।

मैंने उसे अपना परिचय दिया और पूछा- क्या आप बेला हैं?
उसने ‘हाँ’ में सिर हिलाया।
मैंने कहा- मैंने आपकी भी टिकट ले ली है।

फिर हम दोनों गार्डन में आ गए और अपने लिए अच्छी सी जगह देख कर बैठ गए। उसने दुपट्टा नहीं हटाया था, मैंने बात शुरू करते हुए पूछा- आने में इतनी देर क्यों हो गई?
उसने बताया- मैं अपनी फ्रेंड के यहाँ शादी में गई थी और वहाँ से निकलने में वक़्त लग गया।

मैंने उससे कहा- अब तो ये दुपट्टा निकाल लो।
उसने कहा- मैं यहाँ कंफर्ट फील नहीं कर रही हूँ।

मैं उसे गार्डन में थोड़ा और अन्दर ले कर गया और उससे कहा- यहाँ बहुत कम लोग आते हैं.. यहाँ तुम दुपट्टा हटा सकती हो।
उसने दुपट्टा हटा दिया।

यारों क्या बताऊँ.. मेरा तो मुँह खुला का खुला रह गया। वो शादी से होकर आई थी इसलिए उसने मेकअप भी वैसा ही किया था। एकदम सुर्ख लाल होंठ, कजरारी आँखें.. गुलाबी गाल.. सच में वो अप्सरा तो नहीं थी.. लेकिन उससे कम भी नहीं लग रही थी।
थोड़ा अपने आपको संभालते हुए मैंने कहा- आप बहुत ही खूबसूरत हैं और बहुत ही प्यारी लग रही हैं।
उसने एक प्यारी स्माइल दी और थैंक्यू बोलते हुए कहा- तुम भी हैण्डसम हो।

मैंने कहा- लड़कियों को कैसा भी लड़का हीरो ही दिखता है।

दोस्तो इसका मतलब ये नहीं कि मैं इतना बुरा दिखता हूँ.. पर मैंने ऐसी बहुत सी जोड़ियां देखी हैं जिन्हें देखकर लंगूर के हाथ में अंगूर कहावत याद आती है।

मैंने बात आगे बढ़ाते हुए उसके बारे में पूछा तो उसने बताया- मैं नागपुर के एक गर्ल्स कॉलेज से अपना ग्रॅजुयेशन कर रही हूँ, फैमिली में चार लोग हैं। पापा और मम्मी दोनों जॉब करते हैं। छोटी बहन जूनियर कॉलेज में पढ़ती है।
मैंने उससे कहा- तुम बहुत स्वीट और सिंपल हो.. तो मेल पर इतनी बोल्ड बातें कैसी कर लेती हो?

उसने कहा- मैंने आज तक ऐसी बातें नहीं की.. कॉलेज में फ्रेंड्स बातें करती हैं पर मुझे पसंद नहीं हैं और मैं तुमसे भी ऐसी बातें नहीं करती.. अगर तुम खुद मुझे ऐसे सवाल ना पूछते। मैंने सिर्फ़ ये सोच कर जवाब दिए थे कि शायद हम कभी मिलेंगे ही नहीं।

मैंने कहा- फिर अचानक ये मुझसे मिलने का प्रोग्राम कैसे बना और मुझे यहाँ मिलने क्यों बुलाया?
उसने कहा- तुमसे मेल पे बातें करते करते पता नहीं मुझे क्या हुआ और तुमसे मिलने की इच्छा हो गई।
मैंने पूछा- क्यों?
उसने कहा- ये मुझको नहीं पता.. बस ऐसे ही।

मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?
उसने ‘ना’ कहा।
मैंने पूछा- फिर कहानी पढ़ने का शौक कैसे लगा?
उसने कहा- सहेली ने बताया और उसे उसके बॉयफ्रेंड ने बताया था।

मैंने पूछा- क्या कभी कोई अडल्ट मूवी देखी है?
उसने कहा- मैं मोबाइल पर वीडियो देखती हूँ.. जो मुझे अपनी फ्रेंड से मिलती हैं। पहले तो मुझे पसंद नहीं था.. पर अब मुझे इस तरह की क्लिप्स अच्छी लगती हैं। इन्हें देखकर मुझे कुछ होता भी है।

मैंने कहा- सिर्फ़ देखना और पढ़ना ही पसंद है.. या कभी कुछ करने का भी मन किया?
तो उसने कहा- मन तो करता है.. पर डर भी बहुत लगता है। मेरी सहेलियां अपने बॉयफ्रेंड्स के साथ जाती रहती हैं और उनके बॉयफ्रेंड और उनके दोस्तों के साथ मुझे भी चलने के लिए कहते हैं.. पर उनके साथ जाने का मेरा कभी मन नहीं किया।

मैंने उससे कहा- अगर मैं कुछ करूँ तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?
वो शर्मा कर बोली- क्या?
मैंने उसे गालों पर एक किस किया.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे मजा आ गया पर तो वो शरमा गई और कुछ नहीं बोली।
अब मैंने उसे होंठों पर किस की.. वो भी मेरा साथ दे रही थी।

तभी उसका मोबाइल बज उठा। उसने बात खत्म की और मुझसे कहा- अभी मुझे जाना होगा.. वैसे भी बहुत देर हो गई है।
हमें वहाँ बैठे हुए बहुत वक़्त हो गया था इसीलिए हमें मन ना होते हुए भी वहाँ से जाना पड़ रहा था।

मैंने उससे कहा- दोबारा कब मिलने आओगी?
उसने कहा- जल्दी ही।
मैंने उससे कहा- क्या हम फोन पे बातें कर सकते हैं?

तो उसने मेरा मोबाइल नंबर ले लिया और खुद के मोबाइल से मेरे मोबाइल पर मिस कॉल किया।
उसने कहा- तुम कॉल मत करना.. मैं ही तुमको कॉल करूँगी।
उसके बाद मैंने उसको हग किया और एक किस करके हम लोग बाहर निकल आए।

उसी रात को उसका कॉल आया और हमने ढेर सारी बातें की।
मैंने उससे पूछा- अब हम कब मिलेंगे?
उसने कहा- फिलहाल मेरे कॉलेज की छुट्टियां चल रही हैं.. तो वो बिना कारण बताए ज़्यादा वक़्त के लिए घर से नहीं निकल पाऊँगी।

अब हमारी रोज बातें होने लगीं। फोन पर भी मैं उससे सेक्स चैट, उत्तेजित करने वाली बातें करता.. जिससे वो गर्म हो जाती। फिर हम फ़ोन सेक्स करके एक दूसरे की गर्मी को शांत करते।

एक दिन सवेरे उसका कॉल आया कि आज वो अपनी सहेली के घर जाने के बहाने से मुझसे मिलने आ रही है.. तो मैं 11 बजे उसको वहीं मिलूँ.. जहाँ हम पिछली बार मिले थे।

मैं वहाँ पहुँच गया, वो भी जल्दी ही आ गई, वो लॉन्ग स्कर्ट और टॉप पहन कर आई थी। ऐसा लगा कि जैसे आज पूरी तैयारी के साथ आई हो।

हम दोनों साथ में अपनी उसी जगह पर जाकर बैठ गए। सवेरे का वक़्त गुजर चुका था.. इसलिए गार्डन में ज़्यादा लोग नहीं थे। हम दोनों ज़्यादा खुल कर बैठे थे और बातें कर रहे थे।

मैंने उससे पहल करने के लिए कहा.. तो वो मुझे कभी माथे पर चूमती.. तो कभी गालों पर… वो मस्ती के मूड में थी और मुझे तड़पाना चाहती थी.. पर मैं भी कहाँ हार मानने वाला था, मैंने भी उसको कमर से पकड़ कर अपनी ओर खींचा और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।

हम दोनों एक दूसरे का पूरा साथ दे रहे थे, उसके हाथ मुझे अपनी आगोश में जकड़ रहे थे, वो मुझे खुद में समा लेना चाहती थी। मैंने भी उसको कसके पकड़ा और उसके मुँह में अपनी जुबान घुमाने लगा।

मैं उसके मम्मों को दबाने लगा.. तो वो गर्म सिसकारियां भरने लगी, उसकी साँसें तेज होने लगी थीं, उसने थोड़ा संभलते हुए कहा- प्रेम, सच में हमें यहाँ कोई देखेगा तो नहीं ना?
मैंने उससे कहा- यहाँ पर फिलहाल कोई नहीं आएगा।
वो फिर से मुझे किस करने लगी।

अब मैं ज़्यादा जोश में आ गया था.. इसलिए हाथों से उसकी बुर को सहलाने लगा। उसने भी साथ देते हुए मेरे लंड पर दबाव बनाना शुरू किया, हम एक-दूसरे को अपने हाथों से मज़ा दे रहे थे और सिसकारियां ले रहे थे।

उसने मेरे पैंट की चैन खोली और मेरे लंड को बाहर निकाल कर मजा देने लगी।
मैंने उसकी पेंटी उतार दी, वो स्कर्ट पहनकर आई थी.. इसलिए मुझे ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी।

उसकी पेंटी गीली हो चुकी थी, मैं उसकी बुर को मजा दे रहा था, उसने कहा- अब मुझसे सहा नहीं जा रहा है।
वो चुदास में भर कर मेरा लंड अपना बुर चोदन करवाना चाह रही थी।

गार्डन में तो चुदाई करना नामुमकिन तो नहीं था.. पर मुश्किल जरूर था। मैंने उससे कहा- मैं पेड़ से सट कर बैठ जाता हूँ और तुम मेरे लंड के ऊपर आकर बैठ जाओ।
उसने सर हिलाया।

मैं पेड़ से सट कर बैठ गया और वो मेरे लंड पर अपनी बुर का निशाना लगाकर बैठ गई।

अभी मेरा लंड उसकी बुर के थोड़ा ही अन्दर गया था कि वो खड़ी हो गई।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
उसने कहा- दर्द हो रहा है।
मैंने उसको समझाया- शुरूआत में तो दर्द होता ही है.. बाद में फिर सिर्फ़ मजा आता है।

वो मान गई और वापस मेरे लंड पर बैठने को राज़ी हो गई। मैंने अब उसकी बुर में अपना थोड़ा सा लंड घुसाया और उसे नीचे होने के लिए कहा।

इस बार उसने कुछ ज़्यादा ही ज़ोर लगा लिया। मेरा आधा लंड उसकी बुर में घुस चुका था। उम्म्ह… अहह… हय… याह… वो दर्द से चीखने ही वाली थी कि मैंने अपने हाथ से उसका मुँह दबा दिया.. वरना उस दिन तो पब्लिक में धुलाई हो जाती।

उससे दर्द सहा नहीं गया और उसकी आँखों से आँसू आने लगे, मैं उसको किस करने लगा।

थोड़ी देर में जब उसका दर्द कम हुआ तो वो खुद ही धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। मैं भी नीचे से धक्का लगाने लगा। वो मादक सिसकारियां ले रही थी और आवाजें निकालने लगी थी।

कुछ ही पलों की चुदाई के बाद वो अपनी चरम सीमा पर पहुँचने वाली थी, उसकी स्पीड बढ़ गई और उसने कहा- मेरी बुर से कुछ निकल रहा है और मुझे बहुत मजा आ रहा है।
वो मेरे लंड को अपने गरम-गरम लावे में भिगो गई.. पर मेरा अभी बाकी था।

वो थक चुकी थी तो उसने और चुदने से मना कर दिया और हाथों से मेरे लंड की मुठ मारी। उसने कुछ ही झटकों में मेरा सारा लावा बाहर निकाल दिया।

अब हम दोनों ने अपने आपको साफ किया थोड़ा खून भी दिखा था। हम दोनों ने कपड़े ठीक करके फिर से एक-दूसरे की बांहों में बांहें डालकर बैठे गए।

हम एक-दूसरे को चूमने लगे। हमारे नसीब अच्छे थे कि उस वक़्त वहाँ और कोई नहीं आया।
इस तरह मेरी और बेला की पहली चुदाई गार्डन में हुई।

अब हमारी रोज फोन पे बात होती और फोन सेक्स भी होता।

हमने गार्डन में चुदाई तो की.. पर उस जल्दी-जल्दी की चुदाई में हमें सेक्स का पूरा मज़ा नहीं मिल पाया। बेला भी मेरे साथ पॉर्न मूवी की तरह चुदाई का पूरा मज़ा लेना चाहती थी.. पर जब तक बेला के कॉलेज शुरू नहीं होते हम बाहर नहीं मिल सकते थे।

कुछ हफ्तों बाद बेला की कॉलेज शुरू हो गए और वो कॉलेज में बिज़ी हो गई। अब उसके कॉल आने भी कम हो गए थे। हम रोज तो नहीं.. पर हफ्ते में दो-तीन बार तो फोन सेक्स चैट कर ही लेते थे।
हमारा मिलना नहीं हो रहा था।

कॉलेज शुरू होने के एक महीने बाद हम दोनों ने बाहर घूमने जाने का प्रोग्राम बनाया। तय यह हुआ कि वो घर से अपनी सहेली के साथ कॉलेज के लिए निकलेगी और मुझे कॉलेज के पास मिलेगी, फिर हम वहाँ से घूमने जाएँगे।

तय समय पर हम दोनों वहाँ मिले.. पर जाना कहाँ है यह डिसाइड ही नहीं हुआ था।

उसने कह दिया कि वो सिर्फ़ कॉलेज के हाफ टाइम तक ही बाहर रह सकती है। मेरा दिमाग़ भी काम नहीं कर रहा था कि एक तो इतने दिनों बाद मिले, उसमें भी वक़्त की लिमिटेशन। जाना कहाँ है.. ये भी डिसाइड नहीं हुआ।

मैंने उससे कहा- पहले यहाँ से चलो.. बाद में देखेंगे कि जाना कहाँ है।
हम वहाँ से निकले और एक रेस्टोरेंट में पहुँच कर हमने कॉफ़ी ऑर्डर की और डिसाइड करने लगे।

फिर तय हुआ कि आज कहीं बाहर ना जाते हुए हम सिटी के ही हिल्स गार्डन में जाएँगे और वही अपना समय बिताएँगे क्योंकि वैसे भी आज हमारे पास ज़्यादा वक़्त नहीं था। हमने आधा घंटा वैसे ही बिता दिया था।

हम वहाँ से निकल कर हिल्स गार्डन पहुँचे। हम गार्डन में अपने लिए एक पेड़ की आड़ लेके उसके नीचे खड़े हो गए और एक-दूसरे से शरारत भरी बातें और मस्ती करने लगे।

आख़िर हम बहुत दिनों बाद एक-दूसरे से मिले थे। हमने एक-दूसरे को बांहों में भर लिया और चूमने लगे। इस बार मुझे किस करने में मुझे ज़्यादा मज़ा आ रहा था.. क्योंकि पहले जब हम मिले थे तो वो डरी हुई थी। आज वो कुछ ज़्यादा ही मस्ती में थी।

वैसे भी हमारी फोन पे बातें होती थीं.. तो वो ज़्यादा खुल गई थी। हमने एक-दूसरे को बहुत देर तक चूमा। कभी वो मेरे मुँह में अपनी जुबान डालती, तो कभी मैं अपनी जुबान उसके मुँह में घुमाता। हम बहुत ही ज़्यादा गरम हो गए थे। एक-दूसरे को छोड़ ही नहीं रहे थे।

हम एक-दूसरे को सहलाए जा रहे थे। मैं उसके मम्मों को दबा रहा था। तभी मेरे ध्यान में आया कि हम उस पुराने गार्डन में नहीं हिल्स गार्डन में हैं और यहाँ इससे ज़्यादा कुछ नहीं हो सकता।

अब हम थोड़ा अलग हुए और फिर से एक-दूसरे से शरारत करने लगे। हमने ऐसे ही 1.30 घंटा बिता दिया।

आज उसके पास वक़्त नहीं था.. तो फिर कभी मिलने का बोलकर हम दोनों वहाँ से निकले और पास ही के एक रेस्टोरेंट में आ गए।

यहाँ पर भी हम नाश्ता करते करते एक दूसरे से शरारत कर रहे थे। फिर मैंने उसे कॉलेज के पास ड्रॉप कर दिया। बाकी बातें फोन पर करने के लिए बोला।

शाम को उससे फोन पर बात हुई तो वो कहने लगी- प्रेम कॉलेज में आज मेरा बिल्कुल भी ध्यान नहीं था। मैं सहेली के साथ जल्दी ही घर आ गई। पहली बार सेक्स में जो दर्द हुआ था उसके बाद मैं थोड़ा घबरा गई थी.. इसलिए मैं सिर्फ़ तुमसे फोन पर ही बातें करती थी और तुमसे नहीं मिल रही थी, पर आज जो गार्डन में हुआ उसके बाद तो मैं तड़प रही हूँ। काश ऐसा हो सकता के तुम मेरे पास आ सकते।

मैंने उससे कहा- अभी तो ये सम्भव नहीं है.. पर मैं कुछ सोचता हूँ।

फिर हमने एक-दूसरे से फ़ोन सेक्स करके शांत किया और फोन रख दिया। मैं सोचने लगा कि मैं इसके साथ कहाँ सेक्स कर सकता हूँ। इस बार मैं बड़े ही आराम से और बिना डर के उसे सेक्स का मज़ा देना चाहता था.. पर वो किसी होटल या किसी भी ऐसी जगह नहीं आना चाहती थी, जहाँ पकड़े जाने का डर हो।

तभी मेरे दिमाग़ में बात आई कि मेरे दोस्त का घर खाली है। उसके घर वाले बाहर गए हैं और वो मुझे इस काम में मदद भी कर सकता है।

मैंने दोस्त को कॉल किया, उसको बताया। मेरे थोड़े मनाने के बाद वो तैयार हो गया.. पर उसने मुझसे कहा कि पार्टी देनी पड़ेगी। मैंने ‘हाँ’ कहा और डिसाइड हुआ कि कल हम पार्टी करेंगे और रात को मैं उसके घर पर ही रुक जाऊँगा।

मैंने ये बात बताने के लिए बेला को मैसेज किया क्योंकि उसने मुझे कॉल करने के लिए मना किया है। इसलिए मुझे अगर कभी बात करने का मूड होता तो मैं सिर्फ़ मैसेज करता और वो मुझे कॉल करती। मेरे मैसेज के कुछ देर बाद ही उसका कॉल आया।

मैंने उसे प्लान के बारे में बता दिया और उसको अपने दोस्त के घर का पता भी बता दिया ताकि हमें कोई परेशानी ना हो। मैंने उसे ये भी समझा दिया कि अगर उसे कोई परेशानी हो तो वो मुझे कॉल करे.. मैं उसे पिक करने आ जाऊँगा।

वो बहुत खुश हो गई। अगले दिन मैंने घर पर बोल दिया कि आज मैं अपने दोस्त के घर जा रहा हूँ और रात को वहीं पर रुकूँगा।

उस रात को हम बाहर गए.. हम दोनों दोस्तों ने थोड़ी ड्रिंक की, खाना खाया।

मेरा दोस्त बार-बार मुझसे पूछता रहा कि वो कौन है और कैसे मिली.. पर मैंने उससे कहा- ये मेरा सीक्रेट है और इसके बारे में मैं नहीं बता सकता।

बाद में मैं दोस्त के साथ उसके घर जाके सो गया। सो क्या गए रात भर यही दिमाग़ में चल रहा था कि कल कैसा होगा।

सवेरे हम दोनों उठकर तैयार हुए, उसने मुझे कौन सी चीज कहाँ रखी है.. ये सब बताया और वो अपने काम पर चला गया।
अब मैं बेला के कॉल का इंतजार कर रहा था। करीब 20 मिनट बाद उसका कॉल आया।
उसने बताया- मैं इस एरिया में तो आ गई हूँ मगर मुझे घर नहीं मिल रहा है।

मैंने उससे वहीं खड़े रहने को कहा और मैं उसे लेने चला गया।

कुछ देर बाद हम दोनों साथ में घर पर आए। मैंने अन्दर आते ही दरवाजा लॉक कर दिया। अब हम दोनों के चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी।

मैंने उसे चाय के लिए पूछा.. तो वो कहने लगी- एक तो अपने घर पर नहीं बुलाया और यहाँ दोस्त के घर पर फॉरमॅलिटी निभा रहे हो।
मैंने उससे कहा- यार, कम से कम चाय तो पीते हैं.. तुम्हारे चक्कर में मैंने तो सवेरे की चाय भी नहीं पी।
उसने कहा- ठीक है पर चाय मैं बनाऊँगी।

मैंने उसे किचन दिखाया और कौन सी चीज कहाँ है ये बताया।
वो चाय बना रही थी तो मैं भी वहीं खड़ा था, उसके टाइट जीन्स से उसके चूतड़ों का उभार साफ नजर आ रहा था।

मैं एग्ज़ाइटेड तो था ही.. मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया और गर्दन पर किस करने लगा। उसके गालों पे अपने गाल सहलाने लगा। उसके बालों से खेलने लगा, उसके मम्मों को दबाने लगा।

उसने कहा- लगता है तुमने इसी लिए चाय नहीं पी थी ताकि मैं आऊँ और तुम मेरे साथ ऐसी हरकत करो।
मैंने भी कहा- क्या फर्क पड़ता है.. आख़िर हम यहाँ इसी लिए तो आए हैं कि एक-दूसरे की प्यास बुझा सकें।

वो भी अब पलट कर मेरा साथ देने लगी। हम एक-दूसरे को चूम रहे थे। वो मेरी पीठ पर हाथ सहला रही थी और मैं उसके पूरे शरीर को अपने हाथों से नाप रहा था।
कभी मैं उसकी पीठ पर हाथ घुमाता तो कभी उसके चूतड़ दबाता.. तो कभी मम्मों को दबाता।

हमारी गर्मी से चाय भी जल्दी तैयार हो गई, फिर हम बैठकर चाय की चुस्की लेने लगे।
मैंने उससे पूछा- घर पर क्या बताके आई हो?
उसने कहा- पहले सहेली के घर जा रही हूँ.. फिर वहाँ से कॉलेज जाऊंगी और आते वक़्त थोड़ा लेट हो सकता है। सहेली को भी आज घर की तरफ आने के लिए मना कर दिया है।

अब हम फिर से एक-दूसरे में खोने को बेताब थे। मैंने उसे अपनी बांहों में उठाया और दोस्त के बेडरूम के बेड पर लिटा दिया। मैं खुद उसके बाजू में लेटकर उसे चूमने लगा।
हम एक-दूसरे को चूम रहे थे, मस्ती में एक-दूसरे को काट रहे थे।

मैंने उसका टॉप उतार दिया। फिर जीन्स उतार दी, अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी।
उसने कहा- तुम भी तो अपने कपड़े उतारो।
मैंने कहा- तुम ही उतार दो।

फिर उसने मेरी शर्ट उतारी.. पैंट को भी खोल दिया जिससे मेरा लंड उछलकर बाहर आ गया।
वो थोड़ा शरमा गई मैंने भी उसके मम्मों को आज़ाद कर दिया और उनके साथ खेलने लगा, उन्हें ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा।

मैं कभी उसके मम्मे को दबाता.. तो कभी मुँह में लेकर चूसता.. तो कभी उनको काटता, जिससे वो उछल पड़ती। साथ ही साथ मैं अपना लंड भी उसकी चूत पर रगड़ रहा था.. जिससे वो तड़प जाती। उसके गोरे-गोरे मम्मे एकदम लाल हो गए थे।

वो बोली- मत तरसाओ यार.. जल्दी से मेरी चूत की आग शांत कर दो, मुझसे और नहीं सहा जा रहा!
मैंने कहा- इतनी जल्दी नहीं.. थोड़ा सब्र करो, हमें तो आज पॉर्न मूवी की तरह चुदाई करनी है।

फिर मैंने उसकी पेंटी उतार दी और उसकी चूत को सहलाने लगा। उसकी चूत चिपचिपे पानी से पूरी गीली हो गई थी मैंने उसे अपना लंड चूसने के लिए कहा तो उसने बड़े प्यार से मेरे लंड को पकड़ कर मुँह में लिया। पहले तो सिर्फ़ लंड का टोपा ही चूस रही थी.. पर बाद में पूरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी।

मैंने तो खड़े-खड़े सिर्फ़ बालों में हाथ घुमा रहा था। फिर मैंने कहा- मुझे भी तुम्हारी चूत का मजा चाहिए।
कुछ ही पलों में हम दोनों 69 की पोज़िशन में आकर एक-दूसरे को मज़ा दे रहे थे। हम दोनों उत्तेजना में एक बार झड़ चुके थे पर हमारा चुदाई का मैं प्रोग्राम तो अभी बाकी था।

मेरा लंड झड़ने के बाद भी वैसे ही खड़ा था। दोस्त के घर जाते वक़्त मैंने कन्डोम का पैकेट ले लिया था। मैं कोई रिस्क भी नहीं लेना चाहता था।

मैंने कन्डोम का पैकेट निकाला और उसे मेरे लंड पर कन्डोम पहनाने को कहा। उसने मुझे कन्डोम पहनाया। फिर हम दोनों शुरू हो गए। हम दोनों ने एक-दूसरे के शरीर का हर हिस्सा चूमा।

अब मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। पर टाइट होने की वजह से लंड अन्दर ही नहीं जा रहा था.. तो मैंने उसकी चूत पर वैस्लीन लगाकर चूत सहलाता रहा।

फिर मैंने उसकी चूत में अपनी एक उंगली डाली और उसको अन्दर-बाहर करने लगा, थोड़ी चूत खुली तो दो उंगली डाल दीं।

उसे हल्का सा दर्द हो रहा था.. वो सिसकारियां ले रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ पर आज उसे अपनी प्यास बुझानी थी इसलिए वो हर दर्द बर्दाश्त करने के लिए तैयार थी।

जब उसी चूत लिसलिसी हो गई.. तब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर लगा दिया, मैंने उससे कहा- तुम्हें थोडा दर्द बर्दाश्त करना होगा।
यह कहते ही मैंने एक झटका लगा दिया.. जिससे उसकी चीख निकल गई। मेरा आधा लंड तो अन्दर चला गया था.. पर रुका रहा और उसे चूमता रहा।

थोड़ी देर बाद जब वो नॉर्मल हुई तो मैंने और एक झटका दिया, जिससे मेरा पूरा लंड अन्दर चला गया।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। कुछ वक़्त बाद उसे भी मजा आने लगा.. तो वो भी मेरे धक्कों का जवाब धक्कों से देने लगी और ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी।

उसके कंठ से ‘आहह.. आई..’ की आवाज निकलने लगी, वो कहने लगी- आज मेरी प्यास बुझा दो और ज़ोर से चोदो मुझे.. आह्ह.. आज इस चूत की पूरी खाज मिटा दो.. ओह.. बहुत तड़पी है ये.. आज इससे मत छोड़ो..
‘आह्ह.. बहुत तरसाया है तेरी चूत ने.. आज तुम कहोगी.. तो भी इसे नहीं छोड़ूँगा.. ले..’

इस तरह हम दोनों एक-दूसरे को जोश दिलाते हुए चुदाई का मजा ले रहे थे।
कुछ वक़्त बाद उसने मुझे कसके पकड़ लिया, कुछ ही देर की चुदाई के बाद वो बोल रही थी- मैं झड़ने वाली हूँ।

तो मैंने भी अपने धक्के तेज कर दिए, उसके बाद वो झड़ गई.. पर मैं रुका नहीं और उसे चोदता रहा।

उसके झड़ने की वजह से चुदाई करते वक़्त ‘पच-पच’ की आवाज हो रही थी। थोड़ी देर बाद मैं भी आने को हुआ.. तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और अन्दर ही झड़ गया। मैंने कन्डोम पहना था इसलिए डर भी नहीं था।

हम एक-दूसरे को किस करते हुए बेड पर ही लेटे हुए थे। हम एक-दूसरे के अंगों से खेल रहे थे.. जिसका परिणाम हम वापस गर्म हो गए और हमने फिर चुदाई का कार्यक्रम शुरू कर दिया।

पर इस बार अलग तरीके से चुदाई करनी थी। सो मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा और पीछे से उसकी चूत में अपना लंड डालकर उसे चोदने लगा।

फिर मैंने उसे गार्डन वाली याद दिलाई और हमने फिर उस स्टाइल में चुदाई करने लगे। उस दिन हमने अलग-अलग तरीके से चुदाई की।

कुछ समय बाद हम दोनों तृप्त हो गए और घर से निकल गए।

यह थी मेरी पाठिका की चूत चुदाई की सच्ची कहानी

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