ग़लत रिश्ता ( भाई बहन का )

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भले ही उसकी बहन ने उसके बारे में सोचकर मुठ मारी थी, इसका मतलब ये नही की वो अपनी बहन के बारे में इतना गंदा सोचेगा… उसे अपनी मर्यादा में रहना चाहिए… सोनिया ने तो सिर्फ़ सोचा है, कुछ किया थोड़े ही ना है… सोचने और करने में काफ़ी अंतर है… सोच पर तो किसी का ज़ोर ही नही चलता, उसकी बहन अलग थोड़े ही है…. उसने अगर कुछ सोच भी लिया होगा तो उसका क्या गया…. एक तरह से देखा जाए तो वो अपनी बहन के काम ही आया..भले ही मुठ मारने में मदद की पर कुछ तो किया ना…

अपनी बातो को तर्क-वितर्क के तराजू में तोलकर वो खुद ही अपनी अदालत में चल रहे केस में जीत गया…

पर फिर भी वो अपनी बहन के मुँह से सुनना चाहता था…. और उसने पूछा ही लिया

“वैसे दी, तुम बुरा ना मानो तो प्लीज़ बताओगी … की … क्या सोचा था मेरे बारे में …”

इतना सुनते ही सोनिया के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गयी….
वो अपने नीचे वाले होंठों को दाँत के नीचे दबा कर हँसने लगी और बोली : “तू बड़ा शरारती हो गया है…. एक तरफ तो बड़ा संत बना फिरता है… भाई-बहन के रिश्ते की दुहाई देता रहता है…. और ये गलत है-वो गलत है कहता है, और अब अपनी बहन से सुनना चाहता है की क्या सोचकर वो मास्टरबेट कर रही थी…. सही जा रहा है घुन्ने …”

वो अक्सर सोनू को घुन्ना कहा करती थी…
घुन्ना यानी ऐसा इंसान जो उपर से तो शरीफ दिखता है पर अंदर से पूरा घाग किस्म का होता है…

सोनू ने कोई जवाब नही दिया…. और फिर से पूछा : “बताओ ना दी…. क्या सोच रही थी….”

अब सोनिया को सच में शर्म आ रही थी…. हर बात को खुल कर बोलने वाली सोनिया की बोलती अब बंद हो गयी थी…. सवाल ही ऐसा किया था उसके भाई ने…

वो धीरे से बोली : “नही….. अभी मैं नही बता सकती….”

सोनू ने भी सोचा की वो भी ना जाने क्यों ऐसी डीटेल निकलवाने निकल पड़ा है,जिसका जवाब देने में उसकी बहन को इतनी परेशानी हो रही है वो उसे पूछना ही नही चाहिए था…

पर उसने सोनिया के चेहरे को देखा तो उसने आँखे बंद कर ली थी…
भले ही वो सोनू को बता पाने में आनाकानी कर रही थी पर शायद सोनू के ज़ोर देने पर वो कल रात वाली बात को एक बार फिर से याद कर बैठी थी… और उसी को याद करके उसका हाथ एक बार फिर से हिलने लगा… जो अभी तक उसने अपनी शॉर्ट्स में से निकाला नही था…

सोनू अब एक बार फिर से उसे अपलक निहारने लगा..
लड़कियाँ मुठ मारती हुई कितनी क्यूट लगती है, ये उसे आज ही पता चला था…
इस वक़्त उसे अपनी बहन का चेहरा इतना प्यारा लग रहा था की एक बार तो उसका मन किया की उसे जाकर चूम ले… ऐसी हालत में वो ज़्यादा विरोध भी नही करेगी…

पर अपनी मर्यादा की दीवार का उलंघन करने की सोच उसे एक बार फिर से भाई बहन के रिश्ते की तरफ ले गयी…और उसने सोचना बंद कर दिया…. और पलटकर सो जाने की सोची…

पर तभी

सोनिया का हाथ सरककर अपने पिल्लो की तरफ गया और उसने अपना हथियार बाहर निकाल लिया… यानी अपना डिल्डो..

ना चाहते हुए भी सोनू का हाथ अपने लंड की तरफ चला गया और उसने उसे ज़ोर से भींच दिया..

सोनिया ने अपनी जीन्स की निक्कर के दो बटन खोले और उसे थोड़ा नीचे खिसका दिया…अंधेरे में सोनू को उसकी टाँगो के बीच का हिस्सा सॉफ नही दिख रहा था… इसलिए वो देख ही नही पाया अपनी बहन की चूत को.. पर वहां से आ रही सोंधी – २ महक पूरे कमरे में फ़ैल गयी थी

उसकी उस खुशबु को सूंघ कर और इस एहसास से की वो नीचे से नंगी है, सोनू के मुँह से एक सिसकारी सी निकल गयी.

सोनिया ने बटन दबाकर डिल्डो की मोटर स्टार्ट कर दी….
हल्की घुं की आवाज़ के साथ वो नकली लंड एक बार फिर से थरथराने लगा…
और सोनिया ने उसे अपनी टाँगो के बीच रख कर दबा दिया…

और ज़ोर से सिसकारी मारी..

”आआआआआआआआआआआहह …… सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…..”

ये चीख तो इतनी ज़ोर से मारी थी उसने की उसे डर लगने लगा की कहीं उसके मॉम डेड तक ना पहुँच गयी हो… पर ऐसा कुछ नही हुआ… सोनिया ये बात अच्छी तरह से जानती थी की उसका भाई जाग रहा है, उसके बावजूद उसने अपनी ठरक को रोका नही और मास्टरबेट करना चालू कर दिया… और इतनी तेज आवाज़ भी निकाली… कहीं ये पागल तो नही हो गयी…
पर अगले ही पल उसके दिमाग़ में एक और विचार कौंधा की कहीं ये सब जानबूझकर तो नही कर रही वो…
कहीं उसे उकसाने के लिए तो ये सब इतना खुलकर नही कर रही वो…
पर अपनी बहन को वो अच्छी तरह से जानता था, वो भला ऐसा क्यो करेगी…
उसने ये विचार भी निकालकर बाहर फेंक दिया और गोर से उसकी सिसकारियों में अपना नाम तलाशने लगा…
उसे लगा की शायद कल की तरह आज भी वो उसी के बारे में सोचकर मास्टरबेट कर रही होगी…
और शायद आज भी वो उसी का नाम लेकर झड़ेगी…
पर काफ़ी देर तक कान लगाए रखने के बाद भी उसे सिर्फ़ उम्म्म्म अहह के सिवाए कुछ सुनाई ही नही दिया..

पर उन सिसकारियों को सुनकर उसके अंदर कुछ-2 होने लगा था..
उसने भी अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसे मसलने लगा…

अब एक ही कमरे में दोनो भाई-बहन अलग-2 बेड पर लेटकर मुठ मार रहे थे..

सोनू ने देखा की वो डिल्डो को चूत पर रखकर ज़ोर-2 से रगड़ रही है…
उसकी वाइब्रेशन का आनंद लेती हुई वो सिसकारियाँ मार रही है….
ऊsssss ओsssssss की आवाज निकालते हुए उसके होंठों की गोलाई उसे दूर से दिखाई दे रही थी…और अपने लंड को एक पल के लिए उन होंठों के बीच डालने की सोचकर सोनू की आँखे बंद होती चली गयी और उसी पल में ही वो यथार्थ के धरातल से उड़कर मस्ती भरी सिसकारियाँ लेता हुआ कल्पना की दुनियाँ में पहुँच गया..

उस कल्पना में सोनिया उसके सामने नंगी बैठी थी , सोनू ने बड़ी ही बेशर्मी से अपना लंड सोनिया के मुँह में डाल दिया जिसे वो भी उतने ही भूखेपन से चूसने लगी…

और एक मिनट में ही सोनू के लंड से पिचकारियाँ निकलकर बाहर आने लगी…

और झड़ते-2 दबी आवाज़ में उसके मुँह से भी सोनियाआआssssss निकल ही गया

और बाद में उसने जब मुस्कुराते हुए अपनी आँखे खोली तो सकपका कर रह गया.

सोनिया ठीक उसके सामने खड़ी थी.
सोनू की तो फट्ट कर हाथ में आ गयी…

सोनिया के चेहरे पर गुस्से वाले एक्शप्रेशन थे….

वो कुछ बोलने ही वाला था की सोनिया की हँसी निकल गयी… और वो बहुत देर तक हँसती रही..

सोनू बेचारा फुद्दू सा बनकर उसे देखता रहा…

सोनू के हाथ अभी तक अपने माल से सने हुए थे….

सोनिया की निक्कर के बटन भी अभी तक खुले थे और उसकी नाभि के नीचे का करीब 5 इंच तक का हिस्सा उसे सॉफ नज़र आ रहा था… बस चूत को छोड़कर.

उसकी टी शर्ट भी अस्तव्यस्त ही थी…जिसके नीचे छुपे बूब्स की नोकें सोनू सॉफ देख पा रहा था.

सोनिया जब हंसकर चुप हुई तो बोली : “देखा…. तुमने भी मेरा नाम लिया ना… अब बोलो… ये किसलिए…??”

बेचारा कुछ बोल ही नही पाया… बस अपराध भाव से भरकर इधर उधर देखता रहा…सोनू ने गोर किया की सोनिया बार-2 उसके लंड की तरफ ही देख रही है…. हालाँकि अँधेरा काफी था और वो उसे साफ़ नहीं दिख पा रहा था, पर फिर भी सोनिया की नजरें अँधेरे में भी कुछ ढूँढ़ने की कोशिश कर रही थी.

आज उसके लंड को पहली बार किसी ने देखा था… और वो भी उसकी खुद की बहन ने…

भले ही अँधेरे में पर देखा तो था , ऐसे में उसे छुपाने के बदले ना जाने क्यो वो बेशर्मों की तरह ऐसे ही पड़ा रहा…

दिखाता रहा अपने उस लंड को अपनी बहन को, जिसे उसने पूरी दुनिया की नज़रों से बचा कर रखा था. उसके लंड से अभी तक बूँद-2 करके वीर्य बाहर निकल रहा था

सोनिया : “यही मेरे साथ भी हुआ था…. और मुझसे कंट्रोल नही हुआ… कल भी…. और आज भी…. बट मेरा ऑर्गॅज़म होने से पहले ही तुम्हारा हो गया…. और तुम्हे ऐसा करते देखकर मैं जब यहाँ आई तो तुमने लास्ट में मेरा ही नाम लिया था….”

सोनिया ने बहुत करीब से अपना नाम सोनू के मुंह से सूना था, इसलिए वो उसे झुठला भी नही सकता था. सोनू ने ग्लानि भाव में भरकर अपना सिर झुका लिया…
उसे ऐसा करते देखकर वो एकदम से उसके करीब आई और उसके बेड के साइड में बैठ गयी और बोली : “अर्रे… सोनू…. ऐसा क्यों मुंह बना रहा है… इट्स ओके ….. मुझे इस बात का बिल्कुल बुरा नही लगा की तूने ऑर्गॅज़म के टाइम मेरा नाम लिया… जो ग़लती मुझसे हो सकती है वो तुझसे भी तो हो सकती है ना…. और मैने फील किया है, ऐसे में खुद पर कुछ भी कंट्रोल नही रहता…. ना तो रिश्तेदारी दिखाई देती है और ना ही कुछ और…. अब तो समझ गया ना की क्यों मेरे मुंह से भी तेरा नाम निकला था ….”

इतना कहते हुए और समझाने के भाव में बहकर सोनिया ने अपने भाई का हाथ पकड़कर अपने हाथ में रख लिया..

और बोली : “आई नो की ये सब हमें एक दूसरे के बारे में नही सोचना चाहिए… तुम्हारा तो मुझे पता नही पर जब से मैं घर आई हूँ मेरे माइंड में तुम्हारे अलावा कोई और आया ही नही…. हालाँकि तुम्हारे पास तो सोचने के लिए साक्षी है… बट मेरा तो तुम्हारे सिवा कोई और नही है ना….”

वो अपने दिल की बातें उसे सुना रही थी और सोनू का सारा ध्यान अपने और उसके हाथ की तरफ था…

क्योंकि दोनो के ही हाथ अपने-2 जुर्मों से रंगे हुए थे….

सोनू के हाथ में उसके लंड से निकला गरमा गरम वीर्य अभी तक लगा हुआ था…

और वहीं दूसरी तरफ सोनिया के हाथ भी अपनी चूत के रस में डूबकर अभी तक चिपचिपे से थे…

ऐसे में जब सोनिया ने सोनू का हाथ लेकर सहलाना शुरू किया तो दोनो का रस मिलकर एक हो गया और दोनो के हाथ आपस में चिपकने से लगे…

और सबसे बड़ी बात ये थी की दोनो के हाथ चिपचिपा रहे थे और इस बात से सोनिया को कोई फ़र्क ही नही पड़ रहा था… वो तो अपनी ही बातें चोदने में लगी हुई थी…

आख़िरकार सोनू बोल ही पड़ा : “बट दी……. आई थिंक .. मुझे ऐसा नही सोचना चाहिए था… मुझसे ग़लती हो गयी…आई एम सॉरी.”

वो एक बार फिर से बड़े प्यार से बोली : “अर्रे बेबी , इट्स ओके …. मैने कहा ना आई एम ओके विद दिस…. इंफेक्ट अगर तुम चाहो तो आगे से भी मेरे बारे में सोचकर ये सब कर सकते हो…”

ये बोलते हुए एक बार फिर से सोनिया की नजरें सोनू के लंड की तरफ चली गयी

जवाब में सोनू आश्चर्य से अपनी आँखे फाड़कर उसे देखने लगा..

सोनिया : “या…. आई थिंक जब इतनी बाते हमारे बीच हो चुकी है और इतना सब हम एक दूसरे को देख चुके हैं तो इन सब बातों को खुलकर होने देने में ही हम दोनो की भलाई है….वरना बेकार में ही हम अपने-2 माइंड में सॉरी फील करते रहेंगे… लेकिन करेंगे तो फिर भी ना…. इसलिए जब करना ही है तो खुल कर करना चाहिए…”

सोनू तो उसके इस प्रस्ताव को सुनकर हक्का बक्का सा रह गया…

जिस भाई-बहन की मर्यादा का वास्ता देकर उसने खुद को इतने समय से रोक रखा था, उसी मर्यादा की धज्जियाँ उड़ाने में लगी थी उसकी बहन…
सोनिया के हिसाब से अगर चलने लगे तो एक ही हफ्ते में वो उसे चोद बैठेगा…
और वो तो बिल्कुल ग़लत होगा…
और उस ग़लती को रोकने का एक ही तरीका है…
इस खेल को आगे बढ़ाया ही ना जाए.

पर सोनू का खुद पर कंट्रोल ख़त्म सा हो चुका था….
जैसे अभी कुछ देर पहले मुठ मारते हुए उसने भी अपनी बहन का नाम ले ही लिया, ठीक उसी तरह से उसकी इतनी बातें सुनने के बाद भी वो सिर्फ़ हूँ-हाँ ही कर पाया..
उसे ऐसा करते देखकर वो एकदम से उसके करीब आई और उसके बेड के साइड में बैठ गयी और बोली : “अर्रे… सोनू…. ऐसा क्यों मुंह बना रहा है… इट्स ओके ….. मुझे इस बात का बिल्कुल बुरा नही लगा की तूने ऑर्गॅज़म के टाइम मेरा नाम लिया… जो ग़लती मुझसे हो सकती है वो तुझसे भी तो हो सकती है ना…. और मैने फील किया है, ऐसे में खुद पर कुछ भी कंट्रोल नही रहता…. ना तो रिश्तेदारी दिखाई देती है और ना ही कुछ और…. अब तो समझ गया ना की क्यों मेरे मुंह से भी तेरा नाम निकला था ….”

इतना कहते हुए और समझाने के भाव में बहकर सोनिया ने अपने भाई का हाथ पकड़कर अपने हाथ में रख लिया..

और बोली : “आई नो की ये सब हमें एक दूसरे के बारे में नही सोचना चाहिए… तुम्हारा तो मुझे पता नही पर जब से मैं घर आई हूँ मेरे माइंड में तुम्हारे अलावा कोई और आया ही नही…. हालाँकि तुम्हारे पास तो सोचने के लिए साक्षी है… बट मेरा तो तुम्हारे सिवा कोई और नही है ना….”

वो अपने दिल की बातें उसे सुना रही थी और सोनू का सारा ध्यान अपने और उसके हाथ की तरफ था…

क्योंकि दोनो के ही हाथ अपने-2 जुर्मों से रंगे हुए थे….

सोनू के हाथ में उसके लंड से निकला गरमा गरम वीर्य अभी तक लगा हुआ था…

और वहीं दूसरी तरफ सोनिया के हाथ भी अपनी चूत के रस में डूबकर अभी तक चिपचिपे से थे…

ऐसे में जब सोनिया ने सोनू का हाथ लेकर सहलाना शुरू किया तो दोनो का रस मिलकर एक हो गया और दोनो के हाथ आपस में चिपकने से लगे…

और सबसे बड़ी बात ये थी की दोनो के हाथ चिपचिपा रहे थे और इस बात से सोनिया को कोई फ़र्क ही नही पड़ रहा था… वो तो अपनी ही बातें चोदने में लगी हुई थी…

आख़िरकार सोनू बोल ही पड़ा : “बट दी……. आई थिंक .. मुझे ऐसा नही सोचना चाहिए था… मुझसे ग़लती हो गयी…आई एम सॉरी.”

वो एक बार फिर से बड़े प्यार से बोली : “अर्रे बेबी , इट्स ओके …. मैने कहा ना आई एम ओके विद दिस…. इंफेक्ट अगर तुम चाहो तो आगे से भी मेरे बारे में सोचकर ये सब कर सकते हो…”

ये बोलते हुए एक बार फिर से सोनिया की नजरें सोनू के लंड की तरफ चली गयी

जवाब में सोनू आश्चर्य से अपनी आँखे फाड़कर उसे देखने लगा..

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