मेरी पहले सेक्स की कहानी – First time indian choot chudai

ये बात तब की है जब मैं क्लास 10त मे पड़ता था. मेरा शरीर मीडियम और रंग गोरा था. पढ़ने मे होशियार और दिखाने मे भी सुन्दर था ऐसा मेरे दोस्त लोग मुझे बताते है
एग्ज़ॅम के बाद सम्मर वाकेशन मे मेरे मामा के वाहा गया. मामा बॉमबे रहते थे और मामी (40य्र्स) मामा का लड़का (18य्र) 1 लड़की (**य्र) 2 लड़की (**य्र) की इतना परिचय काफ़ी है
उन दीनो मुझे लड़कीो मे कोई ज़्यादा रूचि नही थी. सिर्फ़ उनके साथ बाते करना और साथ मे खेलना ही होता था. रात को हम सब चाट पे सोते थे. मैं और मेरे मामा का ल्डका चाट के आगेवले हिस्से मे और मामी और उनकी दोनो लड़किया चाट के पिच्चे वाले हिस्से मे सोती थी.
एक दिन मैं और मेरे मामा का लड़का दोनो खेत पे गये. वाहा एक गढ़े और गढ़ी को हमने देखा जो सेक्स कर रहे थे. मैं तो घबरा गया लेकिन साथ ही साथ मुझे ये जानने की इच्च्छा भी हो रही थी की आख़िर ये क्या है. मैने ध्यान से देखने लगा. और मुझे मेरे शरीर के एक तरह का रोमॅन्स हो रहा था. मेरा औजार मेरी चड्डी मे खड़ा होने लगा था. कुच्छ देर इस शो को देखने के बाद हम खेत पे पहुचे. मैने मामा के लड़के (रवि) को कहा रवि गढ़े की चुननु कितनी बड़ी थी. तो रवि ने कहा टुजे मज़ा आया ये सब देख के
मई- हा मज़ा आया
रवि- इंसान भी ऐसा करते है. टुजे देखना है?
मई- हा
रवि- अपने खेत पे मजदूर और उसकी बीवी को मैने कही बार देखा है.
फिर दोफर होने के कारण हम खेत पे बनी एक झोपड़ी की तरफ जाने लगे. उधर तीन चार छ्होटी छ्होटी झोपडिया बनी हुई थी
हम दोनो एक झोपड़ी मे बैठे तभी रवि ने मुझे कहा की चल बाजू की झोपड़ी मेसए आवाज़ आ रही है तू किस्मतवाला है इसलिए टुजे ज़्यादा इंतजार नही करना प़ड़ रहा है.
हम दोनो बाजू की झोपड़ी के पास गये और एक होल मैसे रवि कुच्छ देखने की ट्राइ कर रा था. कुच्छ टाइम तक वो देखता रहा फिर उसने अपना एक हाथ अपने पैंट के आगे रख के मसलने लगा. रह रह कर वो पैंट के आगे ज़िप हाथ डाल के अपने लॅंड को मसल रहा था. फिर मुझे कहा की देख गढ़े गढ़ी वाला खेल.
मैने भी उसी होल से देखना चालू किया तो मैं अचंभे से भर गया.
अंदर घास के ढेर पे नफीसजीजी ( जो हमारे मामा के खेत पे काम करने वाली एक मजदूर की बेटी थी और विधवा (23य्र) थी) नंगी लेती हुई थी और उसके पिशब की जगह को भूरिया काका लड़का (रामदीन 25य्र) चाट रहा था. मैं कुछ आँचाए रोमॅन्स से भर गया. मेरी चुननु धीरे धीरे अपने आप बड़ी होने लगी और उसके सूप़ड़े पे अलग सी मन को भाने वाली फीलिंग्स होने लगी.
देखते देखते मेरा हाथ मेरी चुननु पे चला गया. और मैं भी रवि की तरह उसको मसालने लगा. ये देख के रवि भी खुश हो रहा था. उसने कब अपना पैंट खोल के अपना 7″ का नाग बाहर निकाला मुझे पता ही नही चला. और मेरे साथ सात के खड़ा हो गया और मेरे पिच्छवाड़े पे दवाब देने लगा. मुझे लगा शायद वो भी पिच्चे से अंदर का नज़ारा देख रहा हो. लेकिन उसने धीरे धीरे मेरी गंदे पे धक्के लगाना शुरू किया. तब मैने पीछे मूड के देखा तो थोड़ा घबरा गया.
रवि का लंड देख के
उसके लंड के अजूबाजू बाल थे. मैं कुच्छ कहता इससे पहले रवि ने मेरा हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया और उसको आगे पिच्चे करवाने लगा. एक आंटी शाहमति के साथ मैं भी मशीन की तरह करने लगा. कुच्छ देर बाद सफेद कलर के पानी की पिचकारी निकली और ज़मीन पे गिरने लगी. मुझे बहुत बड़ा अचंभा हुआ मैने कहा रवि तेरा पिशब ऐसा घधा क्यो है. रवि ने संजया की ये पिशब नही है ये तो लड़कियो का अमृत है.
फिर उसने मुझे कहा की तेरे लंड से अभी ऐसा अमृत निकलेगा तब टुजे पता चलेगा की इसका क्या आनंद है.
अंदर रामदीन नफीसा के उपेर सवार हो गया था और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहा था. साथ ही कहा रहा था-
रामदीन- कितनी टाइट है रे तू.
नफीसा- तो ढीली कर देना मुझे रामा
रामदीन-टुजे जितनी बार धोकता हू उतनी बार और प्यास बढ़ जाती है मेरी रानी
नफीसा- तो बुजा देना अपनी प्यास किसने माना किया है मेरे राजा.
रामदीन- तेरा रस पीके मुझे कुच्छ और खाने पीने की इच्छा ही नही रहती है नफीसा
नफीसा – तो किसने माना किया है मेरे राजा
रामदीन- तेरी बड़ी बाहें को देख के तो मैने कितनी बार मूठ मर्री लेकिन जब से टुजे चखा है कुच्छ और अच्छा ही नही लगता.
नफीसा- चल हॅट बदमाश मेरी बड़ी बाहें ऐसी वैसी नही है.
रामदीन- वो कैसी भी हो लेकिन मेरा लंड तो उसका नाम सुन के तनतना जाता है. तू तो शुरू से अपने मामा के घर बड़ी हुई इसलिए टुजे कभी देखने का मोका ही नही मिला गॅव मे
नफीसा- तो अब कर लेना अपने दिल की मुराद पूरी
फिर उसने नफीसा को पेट बाल लिटाया और औस्की गांड के छेद को चातने लगा ये देख के मुझे घिन सी आ गयी लेकिन रोमॅन्स और बढ़ रहा था मेरे अंदर
फिर रामदीन ने उसकी गांड मे डाला या चुत मे मुझे कुच्छ पता नही चला. कुच्छ देर बाद वो दोनो फारिग होगे कपड़े पहनेने लगे. हम दोनो भी जल्दी से अपनी झोपड़ी के अंदर पहुँच गये. उन दोनो ने बाहर हाथ मूह धोके खेत की चले गये.
रवि ने मेरी निक्कर के उपेर से मेरी चुननु को मसलना चालू किया.
मई बहुत एग्ज़ाइट हो रहा था. फिर उसने मेरी निक्कर खोल के मेरी गुलाबी कलर की चुननु निकली और हिलने लगे. कुच्छ देर बाद मेरे शरीर मे लखो चईटिया रंगने लगी और एक पतले पानी के साथ सफेद कौलूर का घधा प़ड़ार्थ बाहर निकला
मूज़े 100 स्वर्ग की शांति मिल गयी थी.
रवि- कैसा लगा
मई-कुच्छ मत पुच्छ
रवि- आज रात को भी मज़ा दूँगा टुजे
मई-हा
रवि-किसी को बठाना मत
मई-हा
फिर हम दोनो ने खाना खाया इतने मे नफीसा को हमारी झोपड़ी के पिच्चे जाते हुए देखा

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