इंडियन वर्जिन सेक्स कहानी – Indian Virgin Sex Story

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मेरा नाम नवीन उम्र 22 साल है. मैं देल्ही मे अकेला रहता हूँ. मेरा होमटाउन आमेडबॅड है. मेरी हाइट 5 फीट 5 इंच की है. रंग गोरा और वजन 70 क्ग्ज़ का है. मेरी सेक्स की डिज़ाइर आम लोगो से बहुत ज़्यादा है. वाहा कुछ लड़कियो से मेरे संबंध है.

ये बात है डिसेंबर 2013 की सर्दियो की. मैं अपने ऑफीस के काम से आमेडबॅड गया था. मैं वाहा कुछ दीनो तक रुकने वाला था. जैसे मैने बताया आह्मेबाद मेरा होमटाउन है. वाहा मेरा घर है. वाहा कुछ दिन मैने अपने ऑफीस का काम किया. मेरा मॅन वाहा नही लग रहा था, मैं वाहा से जाना चाहता था. लेकिन मेरी ऑफीस का काम ख़त्म नही हुआ था. मैं सुबह जल्दी ऑफीस चला जाता था और रात को देर से वापस आता था. मेरे कुछ 2-3 दिन ऐसे ही काट गये.

सॅटर्डे को मैं घर जल्दी आ गया. शाम को मैं डिन्निंग टेबल पर बैठ के समोसे खा रहा था. समोसे बहुत ही अच्छे बने थे. मैं मज़े से खा रहा था तभी पीछे से आवाज़ आई: “आंटी?”
मेरा ध्यान समोसे और टीवी पर था.
मेरी मा ने कहा: “नवीन इसे पहचानो?”
मैने बिना देखे बोला: “मा मुझे लड़की पसंद है.”

मेरी मा ने पीछे से मुझे हल्के से थप्पड़ मराते हुई बोली: “ये अर्पिता है. सुरेशभाई की बेटी. कुछ दीनो पहले ही इसकी सगाई हुई है.”
मैने फॉर्मर्ली उससे ही हेलो की और मैं वाहा से चला गया. मैने उससे ज़्यादा बात नही की ना उसे गौर से देखा.

मैं ज़्यादातर लड़कियो को इग्नोर कराता हूँ. क्यूंकी फिर वो लड़किया रात मे मुझे चैन से सोने नही देती.

अर्पिता मेरे पापा के सबसे अच्छे दोस्त सुरेश अंकल की बेटी है. पिछले 10-20 सालो से दोनो दोस्तो के बीच बात चिट बाँध थी. और हाल कुछ दीनो पहली ही रिश्तो मे सुधार आया था. अर्पिता की मा जब अर्पिता 10 साल की थी तभी गुजर गयी थी. अर्पिता अपने पापा, भाई और भाभी के साथ रहती थी.

अगले दिन सनडे था. मैं सुबह ऑफीस जा रहा था.
मा ने कहा: “नवीन ये मिठाई का बॉक्स सुरेशभाई को दे आ.”
मैने कहा: “क्या हुआ सुरेश अंकल फिर से शादी कर रहे है?”
मा ने कहा: “नही बदमाश. श्वता (अर्पिता की भाभी) की गोड़भराई है. हम सबको भोपाल जाना होगा. सुरेशभाई ने मिठाई की ज़िम्मेदारी तुम्हारे पापा को दी थी. इसलिए ये मिठाई के बॉक्स उनके यहा दे आओ.”
मैने कहा: “ठीक है.”

मैं अर्पिता के घर पह्ोचा. वो सब लोग नाश्ता कर रहे थे. इतने मे अर्पिता किचन से निकली. उसको देखते ही मेरे होश उस गये. वो क्या लग रही थी. उसने विंटर की सुबह मे तीन कपड़े का नाइट ड्रेस ही पहन रखा था. अंदर कुछ नही पहना था. उसके मीडियम साइज़ के बूब्स, उसकी कमर, उसकी गान्ड. ये सब देखकर मेरा लंड जीन्स के अंदर तुरंत खड़ा हो गया. मैने अपने दोनो पैरो से उसे संभाला. मैं जेसे उसे देख रहा था वो तुरंत अपने रूम मे चली गयी. मुझे कुछ समाज नही आ रहा था.

मैने सुरेशुंकले से पूछा: “आप लोगो को ठंड नही लगती.”
उन्हो ने कहा: “हमे सिर्फ़ शाम और रात को ही ठंड लगती है. सुनो नवीन तुम्हे हमारे साथ भोपाल चलना है. बहुत सालो बाद तुम मिले हो इस बार तुम्हे नही छोड़ेंगे.”
अमर (अर्पिता का भाई) बोला: “हा यार चलो अब मेरे बाद तुम्हारा नंबर है, ये सब देखलो और सिख़लो.”

मैने कहा: “नहीं अंकल मुझे ढेर सारा काम ख़त्म करना है और अगले वीक वापस जाना है.”
सुरेश अंकल: “अगर तुम हमारे साथ आते तो बड़ा मज़ा आता. घर पर अकेले रहोगे? खाना कहा खाओगे?”
मे: “अंकल मुझे अकेले रहने की आदत हैं. बाहर खाना खलूँगा.”
सुरेश अंकल: “नहीं. अर्पिता खाना पहुचा देगी.”

मे: “नहीं. मेरा कुछ फिक्स नहीं होता. मैं कब खाना ख़ौ.”
सुरेश अंकल: “कोई बात नही अर्पिता खाना तुम्हारे घर पर रख कर चली जाएगी. तुम खा लेना.”
बहुत बहस के बाद मैं मन गया.
मे: “अर्पिता नही आ रही भोपाल?”

सुरेश अंकल: “नहीं जमाई राजा मिलने आने वाले हैं. वो कुछ दीनो के लिए मुंबई काम से जाने वाले हैं इसलिए ट्यूसडे को अर्पिता से मिलने आ रहे हैं.”
मैं थोड़ी देर वाहा पर बैठा और फिर चला गया.
लेकिन अर्पिता मेरे दिमाग़ से निकल ही नही रही थी.
हुमेशा से अर्पिता के लिए मैं कुछ फील कराता आ रहा था, पर मुझे अपनी फीलिंग्स एक्सप्रेस करनी नही आती.
उस सनडे की रात मैं सो ही नही पाया.

अगले दिन मंडे सब लोग भोपाल के लिए चेलिए गये. अब आमेडबॅड मे सिर्फ़ मैं और अर्पिता बचे थे. अर्पिता और मेरी मा ने मेरे खाने के बड़े मे फोन पर बात करली थी. मंडे मा खाना बनाकर गयी थी. मैने रात को ओवेन मे गरम करके खा लिया. फिर से नींद नही आई. अर्पिता नाइट ड्रेस मे मुझे पागल कर रही थी. ऐसा पहली बार हुआ था.

फिर ट्यूसडे को मैं सुबह जल्दी ऑफीस चला गया. फिर मुझे याद आया की आज अर्पिता का मंगेतर आने वाला था. मैने अर्पिता को फोन किया. उसकी आवाज़ भी मुझे सेक्सी लगती थी. तब वाहा हितेश (अर्पिता का मंगेतर) मोजूद था. उसने मुझे रात को साथ मैं खाने पर बुलाया.

मैं रात को खाने पर गया. आज अर्पिता एक दम मामूली दिखती थी. मुझे कुछ समाज नही आया. वो बड़ा अजीब बिहेव कर रही थी. खाने पर सिर्फ़ मैं और हितेश ही बात कर रहे थे. अर्पिता शांत थी. मुझे वाहा ऐसा लगा दोनो के बीच जगदा हुआ हैं. वरना न्यूली एंगेज्ड कपल ऐसे बिहेव नही करते. वैसे हितेश बोरिंग और चिपकू किसाम का था. मुझे कुछ ख़ास अच्छा नही लगा. अर्पिता के घर से जाते जाते मैने कहा: “ये लो घर की दूसरी चाबी. तुम आराम से खाना पह्ोचना. मैं सिर्फ़ रात को हो चाओं से खा पाता हूँ.”

उसने सीर हिलाकर हा कहा. मैने हितेश को बस स्टेशन पर चोदा और अपने घर चला गया.

वेडनेसडे शाम को उसका कॉल आया.
अर्पिता: “आज मेरी तबीयत ठीक नही है. इसलिए आज खाना नही बना पाई हूँ. सॉरी”
मे: ” कोई बात नही. तुमने दवाई ली?”
अर्पिता: “दो दिन से ले रही हूँ पर कुछ फ़र्क नही प़ड़ रहा.”

मे: “मैं शाम को लेने आऊंगा. और किसी बड़े डॉक्टर के पास जाएँगे.”
बहुत बहस के बाद वो मन गयी.
शाम को उसके घर गया. बहुत देर बाद उसने दूर खोला. वो कमज़ोर लग रही थी. ठीक से चल भी नही पा रही थी.
मैं फॉरन उसे हॉस्पिटल ले गया. वाहा उसे अड्मिट कर दिया. ग्लूकोस चढ़ाया और देर रात डिसचार्ज कर दिया. मैं उसे सीधा अपने घर ले गया. मैं रात भर नमक के पानी से उसका बुखार कम कराता रहा.

सुबह मैने उसे उठाया. सीर पर हाथ रखा, बुखार बिल्कुल नही था. वो ठीक थी. मैने उसे चाय और नाश्ता कराया. नाश्ते पर मैने कहा.
मे: “कौन से पप्पू डॉक्टर की दवाई ले रही थी. पता है कल क्या हुआ था.”
उसने जवाब नही दिया. थोड़ा स्माइल किया और मेरी और देखने लगी. मुझे आँखे पढ़नी नही आती. पर ऐसा लगा वो अंदर से बहुत रो रही है.
मे: “आज यही रुक जाना. मैं दोपार को बाहर से खाना लेकर आऊगा. तुम आराम करना.”

जवाब नही दिया बस मुझे देखे जा रही थी.
मैं ऑफीस चला गया.

हुँने लंच साथ मे किया और शाम को मैने उसके घर चोद दिया. उस दिन वो कुछ नही बोली सिर्फ़ मेरी और देखती रहती. मेरे प्जस पर फॉरमॅलिटी के लिए हस्ती. मैने देखा उसका शरीर एक 20 साल की लड़की का है पर उसका चहरा एक 10 साल की मासूम लड़की का था. ऐसा लग रहा था वो बिल्कुल अकेली थी. मेरी तरह.

फ्राइडे सुबह मैने फोन किया उसकी तबीयत पूछने के लिए. उसने फोन रिसीव नही किया. मैं उसके घर गया. उसने दूर खोला. मारा लंड फिर से खड़ा हो गया. वो नाहके निकली थी. क्या लग रही थी. उसके भीगे बाल. उसकी भीगी हुई ड्रेस. उसमे मे उसके उभरे हुए बूब्स. मैने गुस्से मे कहा: “फोन क्यू नही उठाया?”

फिर से वही मासूम नज़रो से मुझे देखने लगी. मैने दोबारा पूछा. उसने उसी तरह देखते हुए कहा: “नहा रही थी.” हम दोनो खामोशी से एक दूसरे को देख रहे थे. मैं वाहा से चला गया. उस दिन शाम को वो घर पर खाना रख कर चली गयी. उस रात फिर से मुझे नींद नही आई. वो सुबह का मंज़र याद करते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था. अब मेरी अर्पिता को छोड़ने नही इचा तेज़ हो गयी. पर वो एमोशनली डिस्टर्ब थी.

फिर सॅटर्डे की शाम आई. मैं घर शाम को 5 बजे ही आ गया. मैने देखा घर खुला था. अर्पिता अंदर थी खाना रख रही थी. मैने उसकी तबीयत के बड़े मे पूछा. उसने कहा वो ठीक है. मैने कहा आज साथ मैं खाना खाते हैं. ठोकी बहस के बाद वो मन गयी. मैने कहा तुम बैठो मैं कपड़े बदल के आता हूँ. वो हॉल मे सोफे पर बैठ गयी. सलवार मे वो ग़ज़ब ढा रही थी. मैं चेंज करके सोफे पर ठीक उसके सामने बैठा. वो बहुत ही सेक्सी दिख रही थी. मैने बाते शुरू की.

मे: “क्या तुम हितेश को पसंद कराती हो?”
उसने जवाब नही दिया.
मे: “क्या तुमाहरी मर्ज़ी से ये रिश्ता फिक्स हुआ था?”
अर्पिता: “मैं ठीक हूँ.”

मे: “अर्पिता तुम्हे किस बात का दर है?”
अर्पिता: “मैं हितेश को पसंद कराती हूँ.”
मे: “क्या तुम दोनो ने कभी किस किया है?”
अर्पिता: “नही”
मे: “तुम्हे पता है किस कैसे करते हैं.”
वो ड्ऱ गयी और बोली: “मैं घर जा रही हूँ.”

मे: “तुम मेरे साथ सब कुछ बाँट सकती हो. मैं तुम्हे पसंद कराता हूँ. तुम्हे हस्ता और खुश देखना चाहता हूँ.”
अर्पिता (ज़ोर से): “मुझे ड्ऱ लग रहा है. कही तुम मेरे साथ…”
मे: “मैं तुम्हारा रेप ना कर डून.”
वही नज़र
मैने उसके करीब गया और उसको गले लगाया और कहा: “मैं तुम्हारा रेप नही करूँगा. टीवी से बाहर निकलो.”
अर्पिता: “तुम मुझे अकेला छोड़ दो. जैसे सबने चोद दिया है.”
मे: “क्या हुआ?”

अर्पिता: “मैं अपनी मा को बहुत मिस कराती हूँ. मेरा उनके अलावा कोई नहीं था. कोई मेरी मेरी परवाह नही कराता. मैं अपने घर मे सिर्फ़ एक कांवली भाई हूँ. मुझे तुम्हारी मा के साथ अच्छा लगता है. वो मुझे मा की कमी महसूस नही होने देती. पर मेरा भाई उन्हे पसंद नही कराता.”

ऐसा लगता था वो अभी रो पड़ेगी. मैने टॉपिक चेंज कर दिया.
मे: “मैने आज तक इतनी सेक्सी कांवली भाई नही देखी!”
अर्पिता: “यह सेक्स क्या होता है?”
मे: “तुम्हे अँहि पता?”
अर्पिता: “नही”
मे: “सच मे?”
अर्पिता: “हन नही पता.”
मे: “जब लड़का और लड़की नंगे होकर बिस्तर पर सोते है, तब सेक्स होता है!”
अर्पिता: “सच मे.”
मे: “क्या तुम और हितेश इन सबके बड़े मैं बात नही करते.”
अर्पिता: “नही.”

अर्पिता की ज़िंदगी बस घर और टीवी तक ही सीमित थी. वो कभी बाहर निकली ही नही थी.
हुँने रात 8:00 पीयेम को साथ मे डिन्नर किया. फिर मैं उसको घूमने के लिए बाहर ले गया. वो मेरे साथ खुश थी. हस्ती थी. मुझे यह देख के अच्छा लगा. मैने उसे आइस करीम खिलाई. राइड्स पर साथ बैठे. और खूब मज़े किए. वो बहुत ही ज़्यादा खुश थी.

फिर रात को 10:00 बजे उसे घर चोद के आ गया. वो बस मुस्कुरके मुझे देख रही थी.

अर्पिता: “आज मुझे तुम्हारे साथ बहुत अच्छा लगा.”
और फिर मैं अपने घर की और चला गया.
जैसे ही घर पर पह्ोचा अर्पिता का फोन आया.
अर्पिता: “घर की चाबी नही मिल रही है. तुम यहा आओ.”

मैं वाहा गया. वो जल्दी से मेरे बाएक पर बैठ गयी और बोली जल्दी तुम्हारे घर ले लो. हम मेरे घर की और निकल गये. रास्ते मे वो बोली.
अर्पिता: “हम रात को बिस्तर पर नंगे आओएंगे.”
मैं तो हिल गया. मैने बाएक रोकी. उसने कहा जल्दी करो.
मैने रास्ते मे से कॉनडम्स और कुछ खाने पीने के लिए ले लिया.
हम घर पर पह्ोचे.
इंडियन वर्जिन सेक्स कहानी – Indian Virgin Sex Story – 1

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