Re: तरक्की का सफ़र

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[size=150:2y57sha3][color=#BF0000:2y57sha3]“हाँ गाँड में! तुम राज और रवि से पूछ सकते हो, गाँड मारने में कितना मज़ा आता है, लेकिन हाँ गाँड पे थोड़ा तेल या क्रीम लगाना नहीं भूलना क्योंकि गाँड का छेद छोटा होता है और इससे दर्द ज्यादा होता है”, मैंने कहा।

फिर उसने मेरी गाँड मारी और हम सो गये। सुबह मैं सो कर उठी तो आर्यन गहरी नींद में सोया हुआ था। मैं नहाने चली गयी और जब लौटी तो देखती हूँ कि आर्यन अपने खड़े लंड को पकड़े बैठा था।

मुझे देख कर वो बिस्तर से उठा और मुझे बाँहों में भर कर बिस्तर की ओर घसीटने लगा। “नहीं आर्यन! अभी नहीं! अब मैं नहा चुकी हूँ!” मैंने कहा।

“प्लीज़ प्रीती!! देखो ना मेरा लंड कैसे खड़ा है, इसका तो खयाल करो”, उसने मुझे और जोरों से भींचते हुए कहा।

इसका खयाल मैं दूसरे तरीके से कर देती हूँ, कहकर मैंने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। थोड़ी ही देर में उसके लंड ने पानी छोड़ दिया।

वो मुझे फिर भी चोदने की ज़िद करने लगा। जब मैंने मना किया तो वो गुस्से में कमरे से बाहर चला गया और मुझे नहीं पता अब वो कहाँ है।

प्रीती ने अपनी बात पूरी की।

“थैंक यू प्रीती! मैं जानती थी तुम आर्यन को सही रास्ता दिखाओगी! मैं संभाल लूँगी उस शैतान लड़के को”, रूही बोली, “आबिदा क्या तुमने आर्यन को देखा है?”

“हाँ मैडम!!! जब वो सलमा को चोद रहे थे”, आबिदा थोड़ा मुस्कुराते हुए बोली।

थोड़ी देर में आर्यन सलमा को अपनी बगल में दबाये हॉल में दाखिल हुआ।

“कुतिया!!! जा मेरे लिये नाश्ता ला!!!” आर्यन ने आबिदा से कहा। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

“आर्यन मुझे बदतमिज़ी पसंद नहीं है जरा भी!!! समझे???” रूही ने उसे डाँटते हुए कहा, “फौरन उससे माफी माँगो।”

“रहने दें मैडम! मुझे बुरा नहीं लगा”, आबिदा टेबल पर नाश्ता लगाते हुए बोली, “ये मुझे हमेशा ऐसे ही बुलाते हैं, पहले तो बुरा लगता था पर अब शायद मैं आदी हो गयी हूँ।”

“आबिदा! मुझे सच-सच बताओ कि ये सब कब से चल रहा है और क्यों चल रहा है”, रूही थोड़ा गुस्से में बोली।

“मैडम! दो साल से! जब आप घर में नहीं होती थी तो आर्यन बाबा मुझे अकेले में पकड़ लेते थे। वो मुझे चोदना चाहते थे पर मैंने उन्हें कभी चोदने नहीं दिया। हाँ मैं उन्हें अपनी चूचियों से और चूत से खेलने जरूर देती थी।”

“मेरा भी मन करता था चुदवाने को पर मैं अपने आप पर काबू रखती थी, और मैंने सलमा से भी कह दिया था कि वो आर्यन से ना चुदवाये। बस आर्यन बाबा हमारी चूचियों पर अपना लंड रगड़ कर झड़ जाते थे”, आबिदा बोली।

“हाँ मैडम! आबिदा ठीक कह रही है”, सलमा बोली, “आज भी मैं इन्हें चोदने नहीं दे रही थी पर इन्होंने कहा कि आज से इन्हें इजाज़त है।”

“नहीं! इसने इजाज़त नहीं ली थी”, रूही हँसते हुए बोली, “हाँ माँगता तो मैं जरूर दे देती। आर्यन आज से तुम आबिदा को भी जब जी चाहे चोद सकते हो।”

“मैं और इस कुतिया को चोदूँगा? कभी नहीं!” आर्यन गुस्से में बोला।

“कोई बात नहीं! समय इसका जवाब देगा”, रूही बोली।

आर्यन, आयेशा के पास जाकर बोला, “चलो कमरे में चुदाई करते हैं।”

“पहले मुझे नाश्ता तो खत्म करने दो”, आयेशा नाश्ता करते हुए बोली।

“क्या ये घटिया सा नाश्ता… इस नाश्ते से अच्छा है?” आर्यन अपना गाऊन उठा कर अपने खड़े लंड को दिखाते हुए बोला।

“हाय अल्लाह! क्या खूबसूरत लंड है तुम्हारा!” आयेशा लड़खड़ाते कदमों से उठी और उसके लंड को पकड़ कर बाहर जाने लगी, “सॉरी आँटी! मैं अपना नाश्ता बाद में कर लूँगी।”

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