कच्ची उम्र की कामुकता

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क्या बात हैं, आज बड़ी बेचैन दिख रही हो‚…….रिया ने पास बैठी नीलू से पुचछा
‘नही रे ऐसी कोई बात नही‚…………नीलू ने बात टलने के नियत से कहा
‘हमेशा तेरी बकबक से, सर मे दर्द पैदा कर देती हो……….आज एटानी खामोश हो, ज़रूर कोई बात हैं‚
‘भरोसा रख ऐसी कोई बात नही‚……नीलू ने ज़ल्ला कर कहा
‘ठीक हैं मत बता , मैं तो समाज़ ती थी हम पक्की सहेलिया हैं, एक दूसरे से कोई बात नही चुपाती, मगर तू नही बठाना चाहती है तो मैं फोर्स नही करूँगी‚………………….रिया ने ब्रम्‍हस्त्रा छोड़ा, जोकि बिल्कुल सही निशाने पे लगा.
‘क्लास च्छुतने के बाद बताउँगी‚……..आख़िर नीलू ने मन लिया
‘ठीक हैं‚

रिया और नीलू पक्की सहेलिया थी, शहर के एक नामी कॉनवेंट स्कूल मे पढ़ती थी,दोनो ही स्स्क की स्टूडेंट थी, उनकी दोस्ती एटानी गहरी थी,की बाकी लड़किया उनसे जलती थी. रिया एक उप्पर मिडलेक्लस फॅमिली से थी, तो नीलू का परिवार शहर का प्रातिष्ठित,आमिर था. लेकिन एससे उनकी दोस्ती पर कोई फ़र्क नही पड़ता था. सिर्फ़ रिया के परिवार वाले थोड़े चिंतित रहते थे, उनके बीच सोशियल स्टेटस का फ़र्क जो था.

क्लास ख़ात्मा होने के बाद दोनो स्कूल के पिच्चे बने गर्दन मे बैठ गयी.

‘चल अब बता क्या हुआ हैं‚……..रिया जानने के लिए उतावली थी
और नीलू सोच मे प़ड़ गयी थी शुरुवत कैसे करे

‘देख मैं तुज़े सब बताती हू, पर पहले मेरे कुच्छ सवालो के सही सही जवाब देने होगे‚……..नीलू अपनी भूमिका बाँध रही थी
‘क्या पुचचाना चाहती हैं तू‚
‘उूुुुुुउउंम……‚
अरे पुच्छ ना……ये उूुुुुुुउउंम्म क्या हैं‚………रिया जानने के लिए अधीर हो रही थी.

‘तूने कभी सेक्स किया हैं‚……………नीलू ने बम फोड़ा.
‘क्या……..??? तेरा दिमाग़ तो नही खराब हुआ, अगर ऐसा कुच्छ किया होता तो क्या तुज़से चुपाती…?”
‘मैं जानती हू की तू मुज़ासे कुच्छ नही चुपाती,लेकिन कुच्छ ऐसा हुआ हैं,मूज़े पुचचाना ज़रूरी लगा‚

‘क्या हुआ हैं…? कही तूने एकेलेहि कुच्छ,मेरा मतलब हैं….‚
‘नही मैने कुच्छ नही किया हैं‚
‘तो…… ?‚…….रिया से जिगयसा चुप नही रही थी.

‘तू मेरे घर का डिज़ाइन जानती हैं,मेरे बेडरूम से किचन के लिए जाना हो तो भाय्या के बेडरूम के सामने से गुजर ना पड़ता हैं‚
‘हाँ जानती हू,तेरे घर पर कई बार आ चुकी हू, तू आगे बोल.‚…………रिया अभिभि कुच्छ समाज़ पाने मे असमर्थ थी.

‘कल रात अचानक मेरी नींद खुली,12.30 से उपर का समय हुआ होगा,मूज़े भूख सी महसूस हुई, मैने थोड़ी देर वैसे ही सोने की कोशिश की, पर नींद नही आई, तो मैने सोचा किचन मे जाकर दूध वग़ैरा कुच्छ पे लू,मैं उठाकर किचन की तरफ चल दी,मगर………..‚
‘मगर क्या….अरे बोल ना‚………रिया सुस्पेंसे को बर्दाशस्त नही कर पा रही थी.
‘मूज़े भाय्या,भाभी के बेडरूम से कुच्छ आवाज़े सुनाई दी‚
‘क्या आवाज़े सुनाई दी‚…….रिया का सुस्पेंसे बढ़ता ही जा रहा था

‘वो…वो..भाभी…भाय्या से…..कहा रही …थी…,वो…वो…‚
‘अरे वो…वो…क्या कहा रही हैं, अब बक भी‚………रिया अब एक्शिटे हो रही थी ,उसे कुच्छ कुच्छ समाज़ मे आ रहा था.

‘एमेम….एम्म…मूज़े शर्म आती हैं…‚…………नीलू सचमुच शर्मा रही थी
‘ओये होये मेरी शर्मीली कबूतरी, अब ये शरमाना छोड़ और बता भाभी क्या कह रही थी.

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