हिंदी सेक्स कहानियां – प्रेम आश्रम

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[size=150:2fkhygn5]हिंदी सेक्स कहानियां – प्रेम आश्रम पार्ट -१
हिंदी सेक्स कहानियाँ

प्रेम आश्रम वाले गुरूजी कहते हैं कि लड़कियों की पिक्की, बाल आने के बाद बुर या भोस, चुदने के बाद चूत और फटने (बच्चा होने) के बाद फुद्दी बन जाती है।
अब मैं यह सोच रहा था कि मिक्की (मोनिका) की अभी पिक्की ही है या बुर बन गई है। इतना तो पक्का है कि भले ही उसकी पिक्की पूरी तरह से बुर या भोस न बनी हो पर वो बनने के लिए जरूर आतुर होगी। पता नहीं इन कमसिन लड़कियों की पिक्की को बुर बनने की इतनी जल्दी क्यों लगी रहती है। और जब बुर बन जाती है तो चूत बनने के लिए बेताब रहती है।
आप सोच रहे होंगे कि ये मिक्की कौन है?
मिक्की मेरे साले की लड़की है। घर में सब उसे मिक्की और सभी सहेलियां मोना और स्कूल में वो मोनिका माथुर के नाम से जानी जाती है। उम्र १८ के आसपास, +२ में पढ़ती है। गदराया बदन शोख, चंचल, चुलबुली, नटखट, नादान, कमसिन, क़यामत। कन्धों तक कटे बाल, सुतवां नाक, पतले पतले गुलाबी होंठ जैसे शहद से भरी दो पंखुडियां, सुराहीदार गर्दन, बिल्लोरी आँखें, छोटे छोटे नींबू जो अब अमरुद बन गए हैं पतली कमर, चिकनी चिकनी बाहें और केले के पेड़ की तरह चिकनी जांघें। सबसे कमाल की चीज तो उसके छोटे छोटे खरबूजे जैसे नितम्ब हैं।
हे भगवान् … अगर कोई खुदकुशी करने जा रहा हो और उसके नितम्ब देख ले तो एक बार अपना इरादा ही बदलने पर मजबूर हो जाए। उसकी पिक्की या भोस का तो आप और मैं अभी केवल अंदाजा ही लगा सकते हैं। कुल मिला कर वो एक क़यामत है। ऐसी कन्याएं किसी भी अच्छे भले आदमी का घर बर्बाद कर सकती है। पर मुझे क्या पता था कि भगवान् ने इसे मेरे लिए ही बनाया है।
पहले मैं अपने बारे में थोड़ा बता दूं। मेरा नाम प्रेम गुरु है। मैं एक बहु राष्ट्रीय कंपनी में काम करता हूँ। उम्र ३२ साल, कद ५’ ८” रंग गेहुँवा। शक्ल-सूरत ठीक ठाक। वैसे आदमियों की शक्ल-ओ-सूरत पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता, ख़ास बात उसका स्टेटस होता है और दूसरा उसकी सेक्स पॉवर। भगवान् ने मुझे इन दोनों चीजों में मालामाल रखा है। मेरे लिंग का साइज़ ७” है और मोटाई २ इंच। मेरा सुपाड़ा आगे से कुछ पतला है। आप सोच रहे होंगे फिर पतले सुपाड़े से चुदाई का मज़ा ज्यादा नहीं आता होगा तो आप गलत सोच रहे हैं। यह तो भगवान् का आशीर्वाद और नियामत समझिये। गांड मरवाने वाली औरतें ऐसे सुपाड़े को बहुत पसंद करती है। आदमियों को भी अपना लण्ड अन्दर डालने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती।
जिन आदमियों के लिंग पर तिल होता है वो बड़े चुद्दकड़ होते है फिर मेरे तो सुपाड़े पर तिल है आप अंदाजा लगा सकते हैं मैं कितना बड़ा चुद्दकड़ और गांड का दीवाना हूँ। मेरी पत्नी मधुर ३६-२८-३६, उम्र २८ साल बहुत खूबसूरत है। उसे गांड मरवाने के लिए मनाने में मुझे बहुत मिन्नत करनी पड़ती है। लेकिन दोस्तों ये फिर कभी। क्यों कि ये कहानी तो मिक्की के बारे में है।
वैसे तो ये कहानी नहीं बल्कि मेरे अपने जीवन की सच्ची घटना है। दरअसल मैं अपने अनुभव एक डायरी में लिखता था। ये सब उसी में से लिया गया है। हाँ मुख्य पात्रों के नाम और स्थान जरूर बदल दिए हैं। मैं अपनी उसको (?) बदनाम कैसे कर सकता हूँ जो अब इस दुनिया में नहीं है जिसे मैं प्रेम करता हूँ और जन्म जन्मान्तर तक करता रहूँगा। इसे पढ़कर आपको मेरी सच्चाई का अंदाजा हो जायेगा। मेरा दावा है कि मेरी ये आप-बीती आपको गुदगुदाएगी, हँसाएगी, रोमांच से भर देगी और अंत में आपकी आँखे भी जरूर छलछला जायेंगी।

मेरी एक फंतासी थी। किसी नाज़ुक कमसिन कली को फूल बनाने की। पिछले ७-८ सालो में मैं लगभग १५-२० लड़कियों और औरतों को चोद चुका हूँ पर अब मैं इन मोटे मोटे नितम्बों और भारी भारी जाँघों वाली औरतों को चोदते चोदते बोर हो गया हूँ। मैंने अपने साथ पढ़ने वाली कई लड़कियों को चोदा है पर वो भी उस समय २०-२१ की तो जरूर रही होंगी। हाँ अपने कामवाली बाई गुलाबो की लड़की अनारकली जरूर १८ के आस पास रही होगी पर वो भी मुझे तब मिली जब उसकी बुर चूत में बदल चुकी थी। सच मानो तो पिछले ३-४ सालों से तो मैं किसी कमसिन लड़की को चोदने के चक्कर में मरा ही जा रहा था।
शायद आपको मेरी ये बातें अजीब सी लगे- नाजुक कलियों के प्रति मेरी दीवानगी। हमारे गुरूजी कहते हैं चुदी चुदाई लड़कियों/औरतों को चोदने में ज्यादा मुश्किल नहीं होती क्योंकि वे ज्यादा नखरे नहीं करती और चुदवाने में पूरा सहयोग करती है। इन छोटी छोटी नाज़ुक सी लड़कियों को पटाना और चुदाई के लिए तैयार करना सचमुच हिमालय पर्वत पर चढ़ने से भी ज्यादा खतरनाक और मुश्किल काम है।
कहते है भगवान् के घर देर है पर अंधेर नहीं है। मेरा साला किसी कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर है। वो अपने काम के चक्कर में हर जगह घूमता रहता है। इस बार वो यहाँ टूर पर आने वाला था। मधु ने उसे अपनी भाभी और मिक्की को भी साथ लाने को मना लिया।
सुबह-सुबह जब मैं उन्हें लेने स्टेशन पर गया तो मिक्की को देख कर मेरा दिल इतना जोर से धड़कने लगा जैसे रेल का इंजन। मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा दिल हलक के रास्ते बाहर आ जायेगा। मैंने अपने आप पर बड़ी मुश्किल से काबू किया। सामने एक परी जैसी बिल्लौरी आँखों वाली नाज़ुक सी लड़की कन्धों पर बेबी डोल लटकाए मेरे सामने खड़ी थी – नीले रंग का टॉप और काले रंग की जीन पहने, सिर पर सफ़ेद कैप, स्पोर्ट्स शूज, कानों में छोटी छोटी सोने की बालियाँ, आँखों पर रंगीन चश्मा ? ऊउफ्फ्फ़ … मुझे कत्ल करने का पूरा इरादा लिए हुए।
दोनों जाँघों के बीच जीन पैंट के अन्दर फंसी हुई उसकी उभरी हुई बुर किसी फ़रिश्ते का भी ईमान खराब कर दे ! मुझे लगा कि मेरा पप्पू अपनी निद्रा से जाग कर अंगडाई लेने लगा है। मैं भी कितना उल्लू का पट्ठा हूँ मिक्की को पहचान ही नहीं पाया। ३-४ साल पहले जब मैं अपनी ससुराल के किसी फंक्शन में जब मैंने उसे देखा था तो उसकी उम्र कोई १३-१४ साल के लगभग रही होगी। मैं भी कितना गधा था इतनी ख़ूबसूरत बला की ओर मेरा ध्यान पहले नहीं गया। मैं तो उसे एक अंगूठा चूसने वाली, इक्कड़ -दुक्कड़, छुपम-छुपाई खेलने वाली साधारण सी लड़की ही समझ रहा था। कितनी जल्दी ये लड़की जवानी पूरी बोम्ब बन गई है। मैं उसे ऊपर से नीचे तक देखता ही रह गया। उसका बदन कितना निखर सा गया था। मैं अभी सोच ही रहा था कि उसकी पिक्की की साइज़ कितनी बड़ी हो गई होगी और उसकी केशर क्यारी बननी शुरू हुई या नहीं मेरा मतलब है की वो अभी पिक्की ही है या बुर बन गई है। पता नहीं उसने अभी तक अपनी पिक्की या बुर से मूतने का ही काम लिया है या कुछ और भी, अचानक मेरे साले की आवाज मेरे कानों में पड़ी।
अरे प्रेम ! कहाँ खो गए भई ?
मैं अपने ख़्वाबों से जैसे जागा। आइये-आइये भाई साहब ! रास्ते में कोई परेशानी तो नहीं हुई? मैंने उनका अभिवादन करते हुए पूछा।
उन्होंने क्या जवाब दिया, मुझे कहाँ ध्यान था, मेरी आँखें तो बस मिक्की पर से हटाने का नाम ही नहीं ले रही थी। ऐसे खूबसूरत मौके का फायदा कौन कम्बख्त नहीं उठाएगा। आप समझ ही गए होंगे मैंने आगे बढ़ते हुए मिक्की को अपनी बाहों में भरते हुए कहा- अरे मिक्की माउस ! तू तो बहुत बड़ी हो गई है।
अपने सीने से लगाए मैंने उसकी गालों और सिर के बालों पर हाथ फिराया। उसके छोटे छोटे अमरुद मेरे सीने से दब रहे थे। उसके नाज़ुक बदन की कुंवारी खुश्बू मेरे नथुनों में समां गई। मुझे लगा कि मेरे ख़्वाबों की मंजिल मेरे सामने खड़ी है। मेरा दिल तो कर रहा था कि उसका प्यार से एक चुम्बन ले लूँ पर स्टेशन पर उसके माता-पिता के सामने ऐसा करना कहाँ संभव था। न चाहते हुए भी मुझे उस से अलग होना पड़ा लेकिन अलग होते होते मैंने उसके गालों पर एक प्यारी सी थप्पी तो लगा ही दी। फिर मैंने उसका हाथ पकड़ा और हम सभी स्टेशन से बाहर अपनी कार की ओर आ गए।
घर पहुँचने पर मधु ने अपने भैय्या, भाभी और मिक्की का गरमजोशी से स्वागत किया और फिर मिक्की की और बढ़ते हुए कहा,“अरे मोना तू ?” मधु मिक्की को मोना ही बुलाती है, वो उसे अपनी बाहों में लेते हुए बोली।
“नमस्ते बुआजी !” शायद कहीं सितार बजी हो, जलतरंग छिड़ी हो या किसी अमराई में कोयल कूकी हो, इतनी मीठी और सुरीली आवाज मिक्की के सिवा किसकी हो सकती थी।
“अरे ये तो मुझसे भी एक इंच बड़ी हो गई है।” मधु ने कहा।
“हाँ लम्बी तो बहुत हो गई है पर पढ़ाई-लिखाई में अभी भी मन नहीं लगाती !” सुधा ने बुरा सा मुंह बनाते हुए हुए कहा।
“अरे अभी बच्ची है, अपने आप पढ़ लेगी, तुम क्यों चिंता करती हो !” मधु बोली।
मैं सोच रहा था- क्या वाकई ये अभी बच्ची (बची) ही है। उसके स्तन, नितम्ब तो कहर बरपाने वाले बन चुके हैं।[/size:2fkhygn5]

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