मेरे पति का छोटा सा लण्ड

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शालिनी की कहानी शालिनी की ज़ुबानी…

मैं पूरे मज़े के साथ मोमबत्ती को अपने चूत के अंदर ले रही थी।

उन्होंने और तेज़ी के साथ मोमबत्ती को मेरी चूत में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया।

पांच मिनट भी नहीं गुज़रे कि मैं एक बार फिर से झड़ गई। मैं अब तक चार बार झड़ चुकी थी।

वो मुझे तीस-पैंतीस मिनट में चार बार झड़ता हुआ देखकर सोच में पड़ गए।

पिछले डेढ़ साल की चुदाई में मैं कभी-कभी ही झड़ती थी।

दोस्तो, आपका इंतजार खत्म हुआ अब पेश है, मेरी आगे की कहानी…

जाहिर है, इसकी वजह उनके लण्ड का छोटा होना था।

अब वो मेरी चूत में मोमबत्ती को अंदर-बाहर जाता हुआ देखने लगे और उनको भी मज़ा आ रहा था।
मेरी चूत ने मोमबत्ती को एक दम जकड़ रखा था।

मेरे झड़ने के बाद उन्होंने मोमबत्ती को मेरी चूत से बाहर निकाल लिया तो मैं बोली – रजत, तुमने मोमबत्ती क्यों निकाल ली।
प्लीज, कुछ देर तक और अंदर-बाहर करो, मुझे एक बार और झड़ जाने दो, प्लीज।

उन्होंने मोमबत्ती को दोबारा से मेरी चूत में डाल दिया और बहुत ही ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर करने लगे।

इस बार मैं जल्दी नहीं झड़ रही थी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं अपना चुत्तड़ उठा-उठा कर पूरी मोमबत्ती को अपने चूत में ले रही थी।

लगभग दो मिनट के बाद मैंने अपना चुत्तड़ बहुत तेज़ी के साथ ऊपर उठाना शुरू कर दिया तो वो समझ गए कि मैं अब फिर से झड़ने वाली हूँ।

उन्होंने मोमबत्ती को और तेज़ी के साथ मेरी चूत में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया।

दो-तीन मिनट में ही मैं फिर से झड़ गई।
इस बार मेरी चूत से ढेर सारा पानी आया।

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जहाँ तक मुझे याद है ये पहली बार था, जब मेरी चूत ने कामरस छोड़ा था।

मैंने बेहद उत्तेजना में उनसे कहा- प्लीज, मेरी चूत का सारा पानी तुम चाट लो, बहुत मेहनत के बाद निकला है।

उन्होंने भी बिना सोचे मेरी चूत का सारा पानी चाट लिया और बोले- शालिनी, अब मैं तुम्हारी फ़ुद्दी चोद लूँ?

मैंने कहा– मेरी जान, तुमने आज मुझे ज़िंदगी का वो मज़ा दिया है जिसके लिए मैं डेढ़ साल से तड़प रही थी, अब तुम जितनी बार चाहो मुझे चोदो, मैं एकदम तैयार हूँ।

उनका लण्ड तो पहले से ही खड़ा था।
उन्होंने मेरी चूत में अपने लण्ड को डाला तो मोमबत्ती से चुदवाने की वजह से उनका लण्ड मेरी चूत में एकदम आराम से घुस गया।

उनके लण्ड पर मेरी चूत की कोई पकड़ नहीं थी और मुझे कुछ भी पता नहीं चल रहा था।

उन्होंने मुझे चोदना शुरू तो कर दिया लेकिन उनको कोई मज़ा नहीं आ रहा था।

वो बोले– जान, मोमबत्ती से चुदवाने के बाद तुम्हारी चूत तो एक दम ढीली हो गई है… मुझे मज़ा नहीं आ रहा है।

मैं बहुत जोश में थी और बोली- मेरी गाण्ड अभी तक एक दम टाइट है… प्लीज, अगर तुम चाहो तो मेरी गाण्ड मार लो… लेकिन एक शर्त है।

उन्होंने पूछा– क्या?

मैंने कहा- हम एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और हमें एक-दूसरे के दर्द का एहसास भी है…

मुझे मोमबत्ती से चुदवाने में बहुत मज़ा आया, लेकिन असली लण्ड से जो मज़ा आएगा वो मोमबत्ती में कहाँ है…
तुम मेरे लिए किसी आदमी का इंतेज़ाम कर दो जिसका लण्ड लंबा और मोटा हो। मैं प्रॉमिस करती हूँ कि तुम्हारे अलावा मैं पूरी ज़िंदगी केवल उस आदमी से ही चुदवाऊँगी…

एक बार फिर वो सोच में पड़ गए और थोड़ी देर बाद वो बोले- क्या तुम हवस और वासना के चलते कुछ ज्यादा ही नहीं कह गई?
दुनिया में क्या कोई ऐसा पति होगा जो अपनी पत्नी को किसी गैर मर्द से चुदवायेगा?

यह शायद गलत सवाल है… पूछना यह चाहिए कि क्या ऐसी औरत होगी, जो अपने पति से किसी दूसरे मर्द का इंतज़ाम करने के लिए कहेगी, अपनी चूत की आग शांत करने के लिए…

जाहिर है दोस्तो, आपके दिमाग में काफी सवाल उमड़ रहे होंगे, मेरी काफी सहेलियाँ मुझे रांड, छिनाल और न जाने क्या-क्या उपाधियाँ दे रहीं होगीं…

पर मुझे ये उपाधियाँ देने वाली मेरी सहेलियों से मेरा सवाल है कि क्या शादी के बाद आपकी चूत ने सिर्फ आपके पति का ही लण्ड लिया है और लिया है तो क्या आपके पति को पता है?

अरे हाँ, बस एक सवाल और क्या सुहागरात में आपकी चूत से मेरी ही चूत की तरह खून निकला था, सीधे शब्दों में क्या आपकी चूत सुहागरात तक अनचुदी थी?

मेरी प्यारी सहेलियों अगर आपके दोनों सवालों का जवाब हाँ हैं, तो यकीनन आप मुझे रंडी, छिनाल, वेश्या, धंधे-वाली जो चाहें बोल सकती हैं पर अगर एक का भी जवाब नहीं है तो बुरा मत मानियेगा और माफ करिए, आपको कुछ कहने का हक़ नहीं है…

तो दोस्तो और सहेलियों, इस बार जिस सवाल पर आपको विचार करना है वो यह है कि क्या प्यार और वासना एक है?

हमेशा की तरह आपकी राय के इंतज़ार में…
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